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उकलाना में तीसरी बार चुनाव, एक बार कांग्रेस जीती तो एक बार इनेलो
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जिले के सात हलकों में से नलवा और उकलाना हलके ही ऐसे हैं, जो बाकी हलकों की अपेक्षा सबसे नए हैं। आज हम बात कर रहे हैं जिले के एकमात्र आरक्षित उकलाना हलके की। 2009 में यहां पहली बार चुनाव हुए तो सत्ता की लहर में कांग्रेस के नरेश सेलवाल विधायक चुने गए।
कांग्रेस के उम्मीदवार रहे नरेश सेलवाल ने 3 हजार 738 वोटों से यह सीट जीतकर कांग्रेस के खाते में डाली थी। तब उन्हें इनेलो की सीमा गैबीपुर से कड़ी चुनौती मिली थी। नरेश सेलवाल को 45 हजार 973 (41.17 प्रतिशत) वोट मिले थे और सीमा को 42 हजार 235 यानी 37.83 प्रतिशत मत हासिल हुए थे। पहली बार हुए इन चुनावों में आठ उम्मीदवारों ने यहां से किस्मत आजमाई थी।
दूसरी बार इनेलो जीती, सीमा हार गई
दूसरी बार यहां 2014 में चुनाव हुए और इस चुनाव में पहली बार जो पार्टी दूसरे नंबर पर रही थी, वो पहले नंबर आ गई। यानी इनेलो को जीत तो मिली, लेकिन सीमा गैबीपुर हार गईं। उन्होंने पार्टी बदली और भाजपा ने उन्हें टिकट दिया। इस चुनाव में इनेलो के अनूप धानक ने उन्हें 17 हजार 927 वोटों से हराया। अनूप को 58 हजार 120 और सीमा देवी को 40 हजार 282 वोट मिले। 2009 में चुनाव जीतने वाली कांग्रेस को 2014 के चुनाव में तीसरा स्थान मिला था।
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जीतने और हारने वालों ने बदल ली पार्टियां
कमाल की बात है कि पिछले दोनों चुनावों में पहले और दूसरे नंबर पर रहे सभी प्रत्याशियों ने पार्टियां बदल ली हैं। सीमा गैबीपुर ने 2014 में ही पार्टी बदल ली थी तो इस बार कांग्रेस का टिकट नहीं मिलने से नाराज नरेश सेलवाल ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में ताल ठोक दी, जिसके बाद उन्हें कांग्रेस से निष्काशित कर दिया है। वहीं, 2014 में चुनाव जीतने वाले इनेलो के अनूप धानक अब जेजेपी की पार्टी का झंडा थामकर चुनावी मैदान में है। भाजपा ने सीमा गैबीपुर के बजाय आशा खेदड़ पर भरोसा जताकर उन्हें मैदान में उतारा है।
सबसे अधिक मतदाता और मतदान केंद्र
नारनौंद हलके के बाद उकलाना हलके में सबसे अधिक एक लाख 96 हजार 278 मतदाता हैं। जिनमेें से एक लाख छह हजार 459 पुरुष और 89 हजार 819 महिला मतदाता हैं। इनमें 718 पुरुष सर्विस मतदाता और 16 महिला सर्विस मतदाता भी शामिल हैं। इसके अलावा हलके में सबसे अधिक 203 मतदान केंद्र हैं।
ये हैं प्रमुख समस्याएं
- नहरी पानी की समस्या
- परिवहन सुविधा की कमी
- सीवरेज समस्या
- खेल स्टेडियम की कमी
- कटों के चलते बिजली समस्या
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कांग्रेस के उम्मीदवार रहे नरेश सेलवाल ने 3 हजार 738 वोटों से यह सीट जीतकर कांग्रेस के खाते में डाली थी। तब उन्हें इनेलो की सीमा गैबीपुर से कड़ी चुनौती मिली थी। नरेश सेलवाल को 45 हजार 973 (41.17 प्रतिशत) वोट मिले थे और सीमा को 42 हजार 235 यानी 37.83 प्रतिशत मत हासिल हुए थे। पहली बार हुए इन चुनावों में आठ उम्मीदवारों ने यहां से किस्मत आजमाई थी।
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दूसरी बार इनेलो जीती, सीमा हार गई
दूसरी बार यहां 2014 में चुनाव हुए और इस चुनाव में पहली बार जो पार्टी दूसरे नंबर पर रही थी, वो पहले नंबर आ गई। यानी इनेलो को जीत तो मिली, लेकिन सीमा गैबीपुर हार गईं। उन्होंने पार्टी बदली और भाजपा ने उन्हें टिकट दिया। इस चुनाव में इनेलो के अनूप धानक ने उन्हें 17 हजार 927 वोटों से हराया। अनूप को 58 हजार 120 और सीमा देवी को 40 हजार 282 वोट मिले। 2009 में चुनाव जीतने वाली कांग्रेस को 2014 के चुनाव में तीसरा स्थान मिला था।
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जीतने और हारने वालों ने बदल ली पार्टियां
कमाल की बात है कि पिछले दोनों चुनावों में पहले और दूसरे नंबर पर रहे सभी प्रत्याशियों ने पार्टियां बदल ली हैं। सीमा गैबीपुर ने 2014 में ही पार्टी बदल ली थी तो इस बार कांग्रेस का टिकट नहीं मिलने से नाराज नरेश सेलवाल ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में ताल ठोक दी, जिसके बाद उन्हें कांग्रेस से निष्काशित कर दिया है। वहीं, 2014 में चुनाव जीतने वाले इनेलो के अनूप धानक अब जेजेपी की पार्टी का झंडा थामकर चुनावी मैदान में है। भाजपा ने सीमा गैबीपुर के बजाय आशा खेदड़ पर भरोसा जताकर उन्हें मैदान में उतारा है।
सबसे अधिक मतदाता और मतदान केंद्र
नारनौंद हलके के बाद उकलाना हलके में सबसे अधिक एक लाख 96 हजार 278 मतदाता हैं। जिनमेें से एक लाख छह हजार 459 पुरुष और 89 हजार 819 महिला मतदाता हैं। इनमें 718 पुरुष सर्विस मतदाता और 16 महिला सर्विस मतदाता भी शामिल हैं। इसके अलावा हलके में सबसे अधिक 203 मतदान केंद्र हैं।
ये हैं प्रमुख समस्याएं
- नहरी पानी की समस्या
- परिवहन सुविधा की कमी
- सीवरेज समस्या
- खेल स्टेडियम की कमी
- कटों के चलते बिजली समस्या