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पक्षियों से प्यार हुआ तो घर में ही बना दिए गौरैया के लिए आशियाने
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खुद तैयार किए गए घोंसले को दिखाते रमेश वर्मा।
- फोटो : Hisar
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अश्वनी कुमार
हिसार। अभी तक आपने पार्कों और घरों की छतों पर पक्षियों को दाना-पानी डालते देखा होगा, मगर नंगथला के रमेश वर्मा को पक्षियों से इतना प्यार हो गया कि उन्होंने अपने घर में ही गौरैया के लिए आशियाने बना दिए। आज उन्होंने अपने घर में जगह-जगह 50 से ज्यादा घोंसले बना दिए हैं, जिनमें 100 से ज्यादा चिड़ियां रह रही हैं। उल्लेखनीय है कि प्रतिवर्ष 20 मार्च को विश्व गौरैया संरक्षण दिवस मनाया जाता है।
रमेश वर्मा के अनुसार उसके पास चेन्नई, हैदराबाद, जम्मू सहित अन्य जगहों से भी फोन आ रहे हैं और लोग पूछ रहे हैं कि किस तरह पक्षियों का संरक्षण कर सकते हैं। रमेश कुमार की नंगथला में प्रिटिंग प्रेस की दुकान है। परिवार का पालन पोषण करने के साथ-साथ इन चिड़ियों की देखभाल करते हैं। समयानुसार इन्हें दाना-पानी देते हैं।
चिड़ियों को न हो कोई नुकसान, उतरवा दिया कमरे का पंखा
चिड़ियों को बारिश और धूप से बचाने के लिए रमेश कुमार ने अपने घर में टीन लगवाई है। उसके नीचे कई घोंसले बनाए हुए हैं। दीवार के साथ भी घोंसले बनाए हुए हैं, जिनमें चिड़ियां रह रही हैं। इसके अलावा एक कमरे में भी कुछ घोंसले बनाए हुए हैं, लेकिन चिड़ियों को कोई नुकसान न पहुंचे इसके लिए उन्होंने कमरे का पंखा तक उतार दिया है। साथ ही रमेश कुमार पक्षियों को बचाने के लिए स्कूली बच्चों को भी समय-समय पर जागरूक करते रहते हैं। खास बात यह है कि उन्होंने ईको फ्रेंडली घोंसले तैयार किए हैं, जिनमें गत्ते का डिब्बा, पुरानी पाइप और लोहे की टीन आदि का इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने बताया कि अप्रैल से जून तक चिड़िया के अंडे देने का समय होता है। इस दौरान इनका विशेष ध्यान रखा जाता है।
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...यूं आया ख्याल
रमेश वर्मा बताते हैं कि जब वह 10वीं कक्षा में पढ़ते थे तो उन्होंने एक दिन अखबार में पढ़ा था कि जहरीली खेती और पक्के मकान होने के कारण वर्ष 2020 में गौरैया लुप्त हो जाएगी। उसके बाद से उन्होंने इसके संरक्षण की ठान ली। धीरे-धीरे पक्षियों से प्यार बढ़ता गया और आज घर में 50 से ज्यादा घोंसले बना दिए। रमेश वर्मा वर्ष 1998 से चिड़िया का संरक्षण कर रहे हैं। इस काम में केवल रमेश ही नहीं, बल्कि उनका पूरा परिवार उनको सहयोग कर रहा है।
घर-घर जाकर घोंसले के लिए जगह छोड़ने की कर रहे अपील
रमेश कुमार खुद चिड़ियों की देखभाल करने के साथ-साथ लोगों को भी जागरूक कर रहे हैं। गांव में जहां-जहां मकान बन रहे हैं, उन लोगों के घरों जाकर वहां घोंसले के लिए जगह छोड़ने के लिए भी प्रेरित कर रहे हैं, ताकि इनको बचाया जा सके। इतना ही नहीं, वह घर में खुद घोंसले को तैयार कर लोगों को निशुल्क दे रहे हैं, ताकि गौरैया का अधिक से अधिक संरक्षण किया जा सके। (संवाद)
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हिसार। अभी तक आपने पार्कों और घरों की छतों पर पक्षियों को दाना-पानी डालते देखा होगा, मगर नंगथला के रमेश वर्मा को पक्षियों से इतना प्यार हो गया कि उन्होंने अपने घर में ही गौरैया के लिए आशियाने बना दिए। आज उन्होंने अपने घर में जगह-जगह 50 से ज्यादा घोंसले बना दिए हैं, जिनमें 100 से ज्यादा चिड़ियां रह रही हैं। उल्लेखनीय है कि प्रतिवर्ष 20 मार्च को विश्व गौरैया संरक्षण दिवस मनाया जाता है।
रमेश वर्मा के अनुसार उसके पास चेन्नई, हैदराबाद, जम्मू सहित अन्य जगहों से भी फोन आ रहे हैं और लोग पूछ रहे हैं कि किस तरह पक्षियों का संरक्षण कर सकते हैं। रमेश कुमार की नंगथला में प्रिटिंग प्रेस की दुकान है। परिवार का पालन पोषण करने के साथ-साथ इन चिड़ियों की देखभाल करते हैं। समयानुसार इन्हें दाना-पानी देते हैं।
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चिड़ियों को न हो कोई नुकसान, उतरवा दिया कमरे का पंखा
चिड़ियों को बारिश और धूप से बचाने के लिए रमेश कुमार ने अपने घर में टीन लगवाई है। उसके नीचे कई घोंसले बनाए हुए हैं। दीवार के साथ भी घोंसले बनाए हुए हैं, जिनमें चिड़ियां रह रही हैं। इसके अलावा एक कमरे में भी कुछ घोंसले बनाए हुए हैं, लेकिन चिड़ियों को कोई नुकसान न पहुंचे इसके लिए उन्होंने कमरे का पंखा तक उतार दिया है। साथ ही रमेश कुमार पक्षियों को बचाने के लिए स्कूली बच्चों को भी समय-समय पर जागरूक करते रहते हैं। खास बात यह है कि उन्होंने ईको फ्रेंडली घोंसले तैयार किए हैं, जिनमें गत्ते का डिब्बा, पुरानी पाइप और लोहे की टीन आदि का इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने बताया कि अप्रैल से जून तक चिड़िया के अंडे देने का समय होता है। इस दौरान इनका विशेष ध्यान रखा जाता है।
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...यूं आया ख्याल
रमेश वर्मा बताते हैं कि जब वह 10वीं कक्षा में पढ़ते थे तो उन्होंने एक दिन अखबार में पढ़ा था कि जहरीली खेती और पक्के मकान होने के कारण वर्ष 2020 में गौरैया लुप्त हो जाएगी। उसके बाद से उन्होंने इसके संरक्षण की ठान ली। धीरे-धीरे पक्षियों से प्यार बढ़ता गया और आज घर में 50 से ज्यादा घोंसले बना दिए। रमेश वर्मा वर्ष 1998 से चिड़िया का संरक्षण कर रहे हैं। इस काम में केवल रमेश ही नहीं, बल्कि उनका पूरा परिवार उनको सहयोग कर रहा है।
घर-घर जाकर घोंसले के लिए जगह छोड़ने की कर रहे अपील
रमेश कुमार खुद चिड़ियों की देखभाल करने के साथ-साथ लोगों को भी जागरूक कर रहे हैं। गांव में जहां-जहां मकान बन रहे हैं, उन लोगों के घरों जाकर वहां घोंसले के लिए जगह छोड़ने के लिए भी प्रेरित कर रहे हैं, ताकि इनको बचाया जा सके। इतना ही नहीं, वह घर में खुद घोंसले को तैयार कर लोगों को निशुल्क दे रहे हैं, ताकि गौरैया का अधिक से अधिक संरक्षण किया जा सके। (संवाद)

रमेश वर्मा की ओर से घर में बनाए गए घोंसले। - फोटो : Hisar

रमेश द्वारा बनाए गए घोंसले में बैठीं गौरैया।- फोटो : Hisar