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वर्ल्ड हेल्थ डे आज : 200 बेड के नागरिक अस्पताल को खुद इलाज की दरकार
ब्यूरो/अमर उजाला/हिसार
Updated Thu, 07 Apr 2016 02:03 AM IST
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नागरिक अस्पताल
- फोटो : Bureau
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शहर के नागरिक अस्पताल को खुद इलाज की सख्त जरूरत है। 200 बेड के इस अस्पताल में सभी सुविधाएं न होने के कारण काफी मरीजों को मजबूरन प्राइवेट अस्पतालों में जेबें ढीली करनी पड़ती हैं। इतना ही नहीं डॉक्टरों समेत कई कैटेगरी के पद रिक्त पड़े हैं। कई आधुनिक सुविधाएं न होने के कारण यह अस्पताल रेफरल सेंटर बनकर रह गया है।
जिले के 200 बेड वाले सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं की हालत बेहद खस्ता है। आने वाले मरीजों को इलाज के लिए मशक्कत करनी पड़ती है। मरीजों को ओपीडी पर्ची कटवाने, डॉक्टर को बीमारी बताने और फिर दवा लेने के लिए काफी समय गंवाना पड़ता है। डॉक्टर समेत कई कैटेगरी के पद खाली होने के कारण कार्यरत कर्मचारियों पर वर्क लोड रहता है और मरीजों का भी अतिरिक्त समय लगता है।
लड़ाई-झगड़े या एक्सीडेंट में घायल मरीज काफी आते हैं। डॉक्टर मरीजों को रोहतक पीजीआई रेफर करने में देर नहीं लगाते। जिस कारण काफी मरीजों को शहर के महंगे अस्पतालों में मजबूरन इलाज कराना पड़ता है। गौरतलब है कि सरकारी अस्पताल में प्रतिदिन एक हजार से अधिक मरीज आते हैं।
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एमओ के 11 व नर्स के 35 पद खाली
नागरिक अस्पताल में फिलवक्त एमओ के 11 और स्टाफ नर्स के 35 पद खाली हैं। एमओ के 55 पद सृजित हैं, जबकि 44 नियुक्त हैं। दो डाइटीशियन और एक डेंटल सर्जन का पद खाली है। स्टाफ नर्स के 90 में 35 पद खाली हैं। वार्ड सर्वेंट के 29 और स्वीपर के 23 पद खाली हैं। इससे कार्यरत पर काम का अतिरिक्त बोझ है। इसके अलावा लैब टेक्नीशियन के 10 पद, क्लर्क का एक, फार्मासिस्ट का एक, स्टोरकीपर के दो, कंप्यूटर क्लर्क का एक, ओटीए के आठ, रेडियोग्राफर के तीन, डेंटल मैकेनिक का एक, एलए के तीन, प्लास्टर टेक्निशियन के दो, धोबी के पांच, चौकीदार के छह, हेड कुक का एक, कुक के पांच और संदेशवाहक के तीन पद खाली हैं।
एलटी के 10 पद खाली होने से परेशानी
सरकारी अस्पताल में लैब टेक्निशियन के 14 पद सृजित हैं। वहां 4 नियुक्त हैं, यानीके 10 पद खाली हैं। यही वजह है कि लैब के आगे ब्लड टेस्ट और अन्य प्रकार के टेस्ट कराने के लिए लोगों को काफी इंतजार करना पड़ता है। यही कारण है कि गैलरी मरीजों से खचाखच भरी रहती है। जेबकतरे सबसे ज्यादा अस्पताल में वहीं सक्रिय रहते हैं। वहां कई मरीजों की जेब कट चुकी है।
डिमांड एक
ट्रॉमा सेंटर : सरकारी अस्पताल में ट्रॉमा सेंटर की खास जरूरत है। क्योंकि यहां सिरसा, फतेहाबाद के अलावा राज्य से सटे पंजाब और राजस्थान के चूरू तक के मरीज आते रहते हैं। मगर सेंटर की उम्मीद धूमिल है। उसके लिए दक्ष स्टाफ भी यहां नहीं है।
डिमांड दो
वेंटिलेटर : यहां वेंटिलेटर की भी जरूरत है। फिलवक्त इसकी उम्मीद भी न के बराबर है। इसके लिए दक्ष स्टाफ और ढांचागत सुविधा नहीं है। जिस कारण यहां आने वाले मरीजों को मजबूरन प्राइवेट अस्पतालों का रुख करना पड़ता है।
ब्लड सेप्रेटर मशीन
सरकारी अस्पताल में ब्लड सेप्रेटर मशीन स्थापित करने की घोषणा सूबे के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज द्वारा की गई थी। घोषणा के मुताबिक अप्रैल से इसे काम शुरू कर देना था। मगर अभी तक इसे स्थापित नहीं किया गया है। न ही जल्द कोई उम्मीद नजर आ रही।
इनकी भी है जरूरत
सिटी स्कैन और एमआरआई की सुविधा की भी जरूरत है। इसके अलावा काफी ऐसे टेस्ट हैं, जो अभी सिविल अस्पताल में नहीं किये जा सकते हैं। आम आदमी का तो सरकारी अस्पतालों की तरफ ही रुझान होता है।
स्टाफ की कमी दूर करने के लिए प्रदेश मुख्यालय को लिखा गया है। नागरिक अस्पताल को डॉक्टर और अन्य स्टाफ मिलने की पूरी उम्मीद है। इसके अलावा ब्लड सेप्रेटर मशीन और अन्य सुविधाएं जल्द मिलने की संभावना है।
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जिले के 200 बेड वाले सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं की हालत बेहद खस्ता है। आने वाले मरीजों को इलाज के लिए मशक्कत करनी पड़ती है। मरीजों को ओपीडी पर्ची कटवाने, डॉक्टर को बीमारी बताने और फिर दवा लेने के लिए काफी समय गंवाना पड़ता है। डॉक्टर समेत कई कैटेगरी के पद खाली होने के कारण कार्यरत कर्मचारियों पर वर्क लोड रहता है और मरीजों का भी अतिरिक्त समय लगता है।
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लड़ाई-झगड़े या एक्सीडेंट में घायल मरीज काफी आते हैं। डॉक्टर मरीजों को रोहतक पीजीआई रेफर करने में देर नहीं लगाते। जिस कारण काफी मरीजों को शहर के महंगे अस्पतालों में मजबूरन इलाज कराना पड़ता है। गौरतलब है कि सरकारी अस्पताल में प्रतिदिन एक हजार से अधिक मरीज आते हैं।
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एमओ के 11 व नर्स के 35 पद खाली
नागरिक अस्पताल में फिलवक्त एमओ के 11 और स्टाफ नर्स के 35 पद खाली हैं। एमओ के 55 पद सृजित हैं, जबकि 44 नियुक्त हैं। दो डाइटीशियन और एक डेंटल सर्जन का पद खाली है। स्टाफ नर्स के 90 में 35 पद खाली हैं। वार्ड सर्वेंट के 29 और स्वीपर के 23 पद खाली हैं। इससे कार्यरत पर काम का अतिरिक्त बोझ है। इसके अलावा लैब टेक्नीशियन के 10 पद, क्लर्क का एक, फार्मासिस्ट का एक, स्टोरकीपर के दो, कंप्यूटर क्लर्क का एक, ओटीए के आठ, रेडियोग्राफर के तीन, डेंटल मैकेनिक का एक, एलए के तीन, प्लास्टर टेक्निशियन के दो, धोबी के पांच, चौकीदार के छह, हेड कुक का एक, कुक के पांच और संदेशवाहक के तीन पद खाली हैं।
एलटी के 10 पद खाली होने से परेशानी
सरकारी अस्पताल में लैब टेक्निशियन के 14 पद सृजित हैं। वहां 4 नियुक्त हैं, यानीके 10 पद खाली हैं। यही वजह है कि लैब के आगे ब्लड टेस्ट और अन्य प्रकार के टेस्ट कराने के लिए लोगों को काफी इंतजार करना पड़ता है। यही कारण है कि गैलरी मरीजों से खचाखच भरी रहती है। जेबकतरे सबसे ज्यादा अस्पताल में वहीं सक्रिय रहते हैं। वहां कई मरीजों की जेब कट चुकी है।
डिमांड एक
ट्रॉमा सेंटर : सरकारी अस्पताल में ट्रॉमा सेंटर की खास जरूरत है। क्योंकि यहां सिरसा, फतेहाबाद के अलावा राज्य से सटे पंजाब और राजस्थान के चूरू तक के मरीज आते रहते हैं। मगर सेंटर की उम्मीद धूमिल है। उसके लिए दक्ष स्टाफ भी यहां नहीं है।
डिमांड दो
वेंटिलेटर : यहां वेंटिलेटर की भी जरूरत है। फिलवक्त इसकी उम्मीद भी न के बराबर है। इसके लिए दक्ष स्टाफ और ढांचागत सुविधा नहीं है। जिस कारण यहां आने वाले मरीजों को मजबूरन प्राइवेट अस्पतालों का रुख करना पड़ता है।
ब्लड सेप्रेटर मशीन
सरकारी अस्पताल में ब्लड सेप्रेटर मशीन स्थापित करने की घोषणा सूबे के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज द्वारा की गई थी। घोषणा के मुताबिक अप्रैल से इसे काम शुरू कर देना था। मगर अभी तक इसे स्थापित नहीं किया गया है। न ही जल्द कोई उम्मीद नजर आ रही।
इनकी भी है जरूरत
सिटी स्कैन और एमआरआई की सुविधा की भी जरूरत है। इसके अलावा काफी ऐसे टेस्ट हैं, जो अभी सिविल अस्पताल में नहीं किये जा सकते हैं। आम आदमी का तो सरकारी अस्पतालों की तरफ ही रुझान होता है।
स्टाफ की कमी दूर करने के लिए प्रदेश मुख्यालय को लिखा गया है। नागरिक अस्पताल को डॉक्टर और अन्य स्टाफ मिलने की पूरी उम्मीद है। इसके अलावा ब्लड सेप्रेटर मशीन और अन्य सुविधाएं जल्द मिलने की संभावना है।
- डॉ. दयानंद, पीएमओ नागरिक अस्पताल