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Hisar News: जल संरक्षण के प्रति गंभीर नहीं हरियाणावासी, भुगतने पड़ सकते हैं गंभीर परिणाम
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हिसार। हरियाणा के लोग जल संरक्षण को लेकर गंभीर नहीं हैं। पानी ज्यादा बर्बाद करते हैं। जल्द ही इसको लेकर उचित कदम नहीं उठाए गए तो परिणाम भयंकर हो सकते हैं। ये बात गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय में बुधवार को रेमन मैग्सेसे पुरस्कार विजेता जल पुरुष राजेंद्र सिंह ने कही। उन्होंने कहा कि विज्ञान और तकनीक की दिशा प्रकृति के अनुकूल होनी चाहिए। प्रकृति से प्रेम होगा, तभी विज्ञान संवेदनशील होगा। विज्ञान में केवल ‘इक्वेशन’ और ‘कैलकुलेशन’ न हो, उसमें ‘सेंस’भी हो। दुनिया में जिस तरह पानी की किल्लत चल रही है, उससे यह तय है कि तीसरा विश्व युद्ध भी पानी के लिए ही होगा।
राजेंद्र सिंह बुधवार को विश्वविद्यालय के फूड टेक्नोलॉजी विभाग, बायो एंड नैनो विभाग, इनवायरनमेंट साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग और जूलोजी विभाग के सौजन्य से ‘सतत विकास के लिए पर्यावरण, खाद्य एवं जैव प्रौद्योगिकी में वैश्विक चुनौतियां (आईसीईएफबी 24)’ विषय पर शुरू हुए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह को बतौर मुख्यातिथि संबोधित कर रहे थे। सम्मेलन की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने की।
कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत के सपने को पूरा करना है तो खाद्य, पर्यावरण और बायो तकनीकी के क्षेत्र में साझे शोध व अनुसंधान करने होंगे। यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन इसी दिशा में विश्वविद्यालय का एक प्रयास है।
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कुलसचिव प्रो. विनोद छोकर ने कहा कि विश्व तकनीक के क्षेत्र में बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहा है। हमें प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान नहीं पहुंचाने वाली तकनीकों को विकसित करना होगा। प्रो. राजेश लोहचब ने बताया कि इस सम्मेलन में 24 तकनीकी सत्र, तीन पोस्टर सत्र होंगे, पांच विदेशी विशेषज्ञों सहित 45 विशेषज्ञ प्रतिभागियों को संबोधित करेंगे।
नदी को पुनर्जीवित करना है तो नदी में पानी की मात्रा बढ़ाएं
हर एक नदी का नाम किसी सभ्यता से जुड़ा होता है। आधुनिकता के दौरान नदी पर एक सिल्ट की लेयर आ गई और वह नदी सूख गई है। वह अंदर भी और ऊपरी हिस्से में भी सूख चुकी है। नदी को दोबारा से री जनरेट करना है तो उसमें पानी का बहाव लंबे समय तक रहना चाहिए। साथ ही नदी में पानी की मात्रा बढ़ाएं और जब तक उसका बहाव सही नहीं होता उसका प्रयोग कम करें। इससे नदी पुनर्जीवित हो जाएगी। एसवाईएल एक राजनीतिक मुद्दा बन चुका है जिसे मुख्यमंत्री बनना हो वह इस मुद्दे को उठाता है और बनने के बाद मुद्दा वैसा का वैसा ही रहता है।
42 साल में 29 नदियों को किया पुनर्जीवित
राजेंद्र कुमार ने बताया कि उन्होंने अरवरी, रूपा रेल, भगानी, सरसा ये वे नदियां है जिन्हें सूखने के बाद दोबारा पुनर्जीवित किया गया है। इनको जीवित करने के लिए पेड़ों को लगाया गया। नदियों में बांध बनाकर पानी डाला गया। धीरे-धीरे नदियों में पानी बहने लगा और नदियां पुनर्जीवित हो गईं।
डार्क जोन का करना होगा समाधान
भूमिगत जल निकालने के लिए ग्राउंड वाटर कंट्रोल एक्ट बनाना होगा। हरियाणा में जहां पानी मिलता है किसान उसी के अनुसार फसल बदल लेते हैं। पहले जहां बाजरा की खेती की जाती थी, अब वहां धान की खेती करने लगे। इस कारण पानी कम हो रहा है। फसल विविधता को अपनाना होगा और इसे रेन पैटर्न के साथ लिंक करना होगा। इससे भूमिगत जल को बचाया जा सकता है। हरियाणा को पानीदार बनाना है तो साफ पानी में गंदे पानी को न मिलने दें और ज्यादा से ज्यादा पेड़-पौधे लगाएं।
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राजेंद्र सिंह बुधवार को विश्वविद्यालय के फूड टेक्नोलॉजी विभाग, बायो एंड नैनो विभाग, इनवायरनमेंट साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग और जूलोजी विभाग के सौजन्य से ‘सतत विकास के लिए पर्यावरण, खाद्य एवं जैव प्रौद्योगिकी में वैश्विक चुनौतियां (आईसीईएफबी 24)’ विषय पर शुरू हुए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह को बतौर मुख्यातिथि संबोधित कर रहे थे। सम्मेलन की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने की।
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कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत के सपने को पूरा करना है तो खाद्य, पर्यावरण और बायो तकनीकी के क्षेत्र में साझे शोध व अनुसंधान करने होंगे। यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन इसी दिशा में विश्वविद्यालय का एक प्रयास है।
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कुलसचिव प्रो. विनोद छोकर ने कहा कि विश्व तकनीक के क्षेत्र में बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहा है। हमें प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान नहीं पहुंचाने वाली तकनीकों को विकसित करना होगा। प्रो. राजेश लोहचब ने बताया कि इस सम्मेलन में 24 तकनीकी सत्र, तीन पोस्टर सत्र होंगे, पांच विदेशी विशेषज्ञों सहित 45 विशेषज्ञ प्रतिभागियों को संबोधित करेंगे।
नदी को पुनर्जीवित करना है तो नदी में पानी की मात्रा बढ़ाएं
हर एक नदी का नाम किसी सभ्यता से जुड़ा होता है। आधुनिकता के दौरान नदी पर एक सिल्ट की लेयर आ गई और वह नदी सूख गई है। वह अंदर भी और ऊपरी हिस्से में भी सूख चुकी है। नदी को दोबारा से री जनरेट करना है तो उसमें पानी का बहाव लंबे समय तक रहना चाहिए। साथ ही नदी में पानी की मात्रा बढ़ाएं और जब तक उसका बहाव सही नहीं होता उसका प्रयोग कम करें। इससे नदी पुनर्जीवित हो जाएगी। एसवाईएल एक राजनीतिक मुद्दा बन चुका है जिसे मुख्यमंत्री बनना हो वह इस मुद्दे को उठाता है और बनने के बाद मुद्दा वैसा का वैसा ही रहता है।
42 साल में 29 नदियों को किया पुनर्जीवित
राजेंद्र कुमार ने बताया कि उन्होंने अरवरी, रूपा रेल, भगानी, सरसा ये वे नदियां है जिन्हें सूखने के बाद दोबारा पुनर्जीवित किया गया है। इनको जीवित करने के लिए पेड़ों को लगाया गया। नदियों में बांध बनाकर पानी डाला गया। धीरे-धीरे नदियों में पानी बहने लगा और नदियां पुनर्जीवित हो गईं।
डार्क जोन का करना होगा समाधान
भूमिगत जल निकालने के लिए ग्राउंड वाटर कंट्रोल एक्ट बनाना होगा। हरियाणा में जहां पानी मिलता है किसान उसी के अनुसार फसल बदल लेते हैं। पहले जहां बाजरा की खेती की जाती थी, अब वहां धान की खेती करने लगे। इस कारण पानी कम हो रहा है। फसल विविधता को अपनाना होगा और इसे रेन पैटर्न के साथ लिंक करना होगा। इससे भूमिगत जल को बचाया जा सकता है। हरियाणा को पानीदार बनाना है तो साफ पानी में गंदे पानी को न मिलने दें और ज्यादा से ज्यादा पेड़-पौधे लगाएं।