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Weather Haryana: प्रदेश में अब तक सामान्य से 18 प्रतिशत कम बारिश, 21 से 26 सितंबर तक बारिश की संभावना

Tue, 20 Sep 2022 12:15 AM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, हिसार (हरियाणा)
अमर उजाला ब्यूरो, हिसार (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Tue, 20 Sep 2022 12:15 AM IST
सार

हरियाणा में चार जिलों में सामान्य से अधिक, दो में सामान्य और 16 जिलों में सामान्य से कम बदरा बरसे हैं। 21 से 26 सितंबर तक हरियाणा के पूर्वी, उत्तरी व दक्षिणी जिलों में हल्की से मध्यम बारिश व बाकी क्षेत्रों में बिखराव वाली गतिविधियां दर्ज करने की संभावनाएं बन रही हैं।

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Haryana has so far received 18 percent less rain than normal
रोहतक में बारिश। - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)

विस्तार

हरियाणा में मानसून सीजन में अब तक सामान्य से 18 प्रतिशत कम बारिश हुई है। 19 सितंबर तक 339.4 एमएम बारिश हुई है, जबकि सामान्य बारिश का आंकड़ा 414.3 एमएम है। वहीं प्रदेश के जिलों की बात करें तो सिर्फ चार जिलों (फतेहाबाद, सिरसा, हिसार व कैथल) में ही सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। झज्जर और जींद में सामान्य तो 16 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। 

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मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन के अनुसार फिलहाल प्रदेश में मानसून की गतिविधियों पर ब्रेक लगा हुआ है, जिस वजह से संपूर्ण इलाके तापमान में बढ़ोतरी हो रही है। फिलहाल एक कम दबाव का क्षेत्र उत्तर पश्चिम बंगाल की खाड़ी पर बना हुआ है। इसके असर से मानसूनी हवाओं का मैदानी राज्यों की तरफ रुख हो जाएगा।
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यहां से ये हवाएं ओडिसा, छत्तीसगढ़ व मध्य प्रदेश होते उत्तर प्रदेश में पहुंच जाएंगी, जिसका आंशिक प्रभाव हरियाणा व एनसीआर पर भी देखने को मिला। इसके प्रभाव से 21 से 26 सितंबर तक हरियाणा के पूर्वी, उत्तरी व दक्षिणी जिलों में हल्की से मध्यम बारिश व बाकी क्षेत्रों में बिखराव वाली गतिविधियां दर्ज करने की संभावनाएं बन रही हैं। इसके बाद प्रदेश व एनसीआर से मानसून की वापसी की संभावना है।
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कृषि पर यह रहेगा प्रभाव
हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक डॉ. रमेश के अनुसार अगर खरीफ की फसलों की बात करें तो कम बारिश का सबसे ज्यादा नुकसान बाजरे की फसल पर होगा। इस बार बाजरे की पैदावार काफी कम होगी। हालांकि इसका थोड़ा बहुत असर कपास, ग्वार व मूंग की फसल पर भी पड़ेगा। वहीं रबी की फसल की बात करें तो इस माह में बारिश न होने से बारानी क्षेत्रों में फसलों की बिजाई पर असर पड़ेगा।


इस क्षेत्र में सिंचाई के साधन नहीं है और यहां बिजाई जमीन में रहने वाली नमी पर ही निर्भर करती है। इन क्षेत्रों में ज्यादातर सरसों व चने की बिजाई की जाती है। इसके अलावा जहां पलेवा करके बिजाई करते हैं, वहां भी किसानों को ज्यादा पानी लगाना पड़ेगा।

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