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Haryana: बच्चों को शिक्षित करने के साथ पर्यावरण को भी महका रहे नरेश श्योराण, देखें पूरी रिपोर्ट
Sat, 19 Oct 2024 11:39 PM IST
भूपेंद्र सिंह
चेतन वर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार (हरियाणा)
चेतन वर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Sat, 19 Oct 2024 11:39 PM IST
सार
नरेश श्योराण ने 2020 में गांव कंवारी के राजकीय उच्च विद्यालय व 2018 में गांव सुलखनी के राजकीय उच्च विद्यालय को सौंदर्यीकरण में प्रथम स्थान दिलवाया। गांव गंगवा स्थित राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में हर्बल पार्क तैयार किया गया, जिसमें 150 से अधिक औषधीय पौधे लगाए गए।
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नरेश श्योराण, गांव गंगवा स्थित राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में बनाया हर्बल पार्क
- फोटो : संवाद
विस्तार
राजकीय विद्यालयों के कुछ शिक्षक ऐसे भी हैं जो शिक्षण कार्य के साथ पर्यावरण संरक्षण का कार्य भी कर रहे हैं। उन्हीं में से एक हैं सेक्टर-13 निवासी 56 वर्षीय नरेश श्योराण, जो फिलहाल गांव गंगवा स्थित राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में बतौर हिंदी विषय के प्रवक्ता के रूप में कार्यरत हैं। अब तक अपने 12 वर्ष के कार्यकाल में उनकी जहां भी तैनाती हुई वहां उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य किया।
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अपने इस जुनून की बदौलत उन्होंने वर्ष 2020 में गांव कंवारी स्थित राजकीय उच्च विद्यालय व 2018 में गांव सुलखनी स्थित राजकीय उच्च विद्यालय को सौंदर्यीकरण प्रतियोगिता में प्रथम स्थान दिलाया।
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अब नरेश श्योराण ने अपने खर्च पर गांव गंगवा स्थित राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में 1000 यार्ड में हर्बल पार्क तैयार किया है, जिसमें 150 से अधिक किस्म के औषधीय पौधे हैं। खास बात यह है कि जिले के 863 राजकीय विद्यालयों में से एकमात्र गांव गंगवा स्थित राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में ही हर्बल पार्क है।
रात की रानी, लैला-मजनू व ब्राह्मी जैसे पौधों से महक रहा हर्बल पार्क
शिक्षक नरेश ने बताया कि हर्बल पार्क में वैसे तो 150 से भी अधिक किस्म के औषधीय पौधे वे लगा चुके हैं। खास बात है कि पार्क में दुर्लभ किस्म के पौधे जिनमें रात की रानी, लैला-मजनू, ब्राह्मी, अपराजिता, नींबू घास, आंक का पत्ता के पौधे भी शामिल हैं।
इसके अलावा हर्बल पार्क में हल्दी, इलायची, आंवला, शतावरी, मोरिंगा, गिलोय, पत्थरचट्टा, र्निगुंडी, अर्जुन, तुलसी, विधारा, नींबू, नीम व शहतूत के पौधे भी लगाए हुए हैं। यहां से ग्रामीण बुखार, वायरल, हृदय संबंधित रोग, श्वास, याददाश्त सहित अन्य रोगों के लिए औषधीय पौधे ले जाते हैं।
वायु सेना में तैनाती के दौरान पेड़-पौधों से हुआ लगाव
नरेश श्योराण ने बताया कि 20 वर्ष तक उन्होंने वायु सेना में सार्जेंट तौर पर सेवाएं दी। इस दौरान उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों में जाने का अवसर मिला। गुजरात, असम व लेह-लद्दाख में ड्यूटी के दौरान उन्हें पेड़-पौधों से लगाव हुआ। क्योंकि हरियाली के मामले में असम व गुजरात के राजकीय विद्यालय हरियाणा से कहीं आगे हैं। जबकि लेह-लद्दाख में ऑक्सीजन की कमी है, जहां माइनस में तापमान होने के कारण पेड़-पौधे वहां के पर्यावरण को संतुलित बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। शिक्षक ने बताया कि पर्यावरण को संतुलित रखने में पेड़-पौधे के अहम योगदान को देख उन्हें पौधों से लगाव हुआ।वायु सेना में सेवा के दौरान एक हजार से ज्यादा पौधे रोपित किए।
अब मल्टीपर्पज पार्क बनाने का लक्ष्य
शिक्षक नरेश श्योराण ने बताया कि डेढ़ साल बाद उनकी सेवानिवृति है, उनका लक्ष्य है कि वे स्कूल के अंदर मल्टीपर्पज पार्क बनाए, जिसमें वे सजावटी व छायादार पौधे रोपित कर उन्हें सींचेंगे। साथ ही छोटी नर्सरियां भी तैयार कर उन्हें आर्गेनिक खाद से रोपित करेंगे।
स्कूल में ही वन मित्र बनाए
हिंदी प्रवक्ता ने बताया कि मुहिम के दौरान उनको काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिसमें पानी व संसाधनों की कमी भी आई। मुख्य रूप से मैन पावर की कमी सामने आई तो उन्होंने स्कूल में ही वन मित्र बनाए। विद्यार्थियों को भी मुहिम में शामिल किया।