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Hisar News: जीजेयू के कुलपति को प्रो. नरसी राम बिश्नोई सतत विकास एवं पर्यावरण क्षेत्र में योगदान के लिए मिला लाइफटाइम अचीवमेंट अवाॅर्ड
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जीजेयू के कुलपति प्रो. नरसी को सम्मानित करते आयोजक।
हिसार। गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (जीजेयू) के कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई को सतत विकास एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट अवाॅर्ड से नवाजा गया। विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के सौजन्य से विश्वविद्यालय के चौधरी रणबीर सिंह सभागार में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन समारोह में बुधवार को उन्हें यह अवाॅर्ड मिला।
बिल्डिंग सस्टेनेबल ऑर्गेनाइजेशनल : साइकोलॉजिकल इश्यूज एंड चैलेंजिज विषय पर आयोजित संगोष्ठी के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. आरपी बाजपेयी ने कहा कि राष्ट्र के निर्माण में मनोविज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका है। मनोविज्ञान आपके विचारों में आधारभूत परिर्वतन लाने का सहायक बन सकता है। देश के सरकारी और निजी हर संस्थान में एक मनोवैज्ञानिक की नियुक्ति होनी चाहिए। इससे न केवल संस्थानों के कर्मचारियों को मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायता मिलेगी साथ ही रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। उन्होंने प्रतिभागियों से कहा, अपनी सोच का दायरा बढ़ाएं। नए उत्पादों का उत्पादन करें व अपने उत्पादों को पेटेंट करवाकर राष्ट्र निर्माण में योगदान दें।
मानसिक स्वास्थ्य, मनोविज्ञान स्थिरता और समावेशी संस्कृति को दें प्राथमिकता
कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने कहा, यूएनओ ने प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण से संबंधित सतत विकास के जिन 17 उद्देश्यों का निर्धारण किया है, वे उद्देश्य गुरु जम्भेश्वर महाराज के 29 नियमों में पहले से ही स्थापित हैं। यदि हम सतत विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में कार्य करना चाहते हैं तो हमें संगठनों में मानसिक स्वास्थ्य, मनोविज्ञान स्थिरता और समावेशी संस्कृति को प्राथमिकता देनी होगी। सतत विकास का अर्थ केवल आर्थिक लाभ नहीं है, बल्कि एक संतुलित, मानसिक रूप से स्वस्थ और सामाजिक रूप से उत्तरदायी समाज का निर्माण भी है।
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इस दौरान रांची इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो साइकेट्री एंड एलाइड साइंसिज के प्रो. अमोल रंजन सिंह मुख्य वक्ता व सोसायटी ऑफ इंडस्ट्रियल एंड आर्गेनाइजेशनल साइकोलॉजी (एसओआईओपी) के अध्यक्ष प्रो. एपी सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस दौरान ''''''''''''''''डिसेबिलिटी एंड रिहेबिलिटेशन'''''''''''''''' नामक एक पुस्तक का विमोचन किया गया। यह पुस्तक डाॅ. संजय कुमार व डाॅ. स्नेहा मित्तल द्वारा लिखी गई है। इस मौके पर कुलपति के तकनीकी सलाहकार प्रो. संदीप राणा, संयोजक मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष के अध्यक्ष डाॅ. संजय कुमार, आयोजन सचिव डाॅ. तरुणा मौजूद रहीं।
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बिल्डिंग सस्टेनेबल ऑर्गेनाइजेशनल : साइकोलॉजिकल इश्यूज एंड चैलेंजिज विषय पर आयोजित संगोष्ठी के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. आरपी बाजपेयी ने कहा कि राष्ट्र के निर्माण में मनोविज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका है। मनोविज्ञान आपके विचारों में आधारभूत परिर्वतन लाने का सहायक बन सकता है। देश के सरकारी और निजी हर संस्थान में एक मनोवैज्ञानिक की नियुक्ति होनी चाहिए। इससे न केवल संस्थानों के कर्मचारियों को मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायता मिलेगी साथ ही रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। उन्होंने प्रतिभागियों से कहा, अपनी सोच का दायरा बढ़ाएं। नए उत्पादों का उत्पादन करें व अपने उत्पादों को पेटेंट करवाकर राष्ट्र निर्माण में योगदान दें।
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मानसिक स्वास्थ्य, मनोविज्ञान स्थिरता और समावेशी संस्कृति को दें प्राथमिकता
कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने कहा, यूएनओ ने प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण से संबंधित सतत विकास के जिन 17 उद्देश्यों का निर्धारण किया है, वे उद्देश्य गुरु जम्भेश्वर महाराज के 29 नियमों में पहले से ही स्थापित हैं। यदि हम सतत विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में कार्य करना चाहते हैं तो हमें संगठनों में मानसिक स्वास्थ्य, मनोविज्ञान स्थिरता और समावेशी संस्कृति को प्राथमिकता देनी होगी। सतत विकास का अर्थ केवल आर्थिक लाभ नहीं है, बल्कि एक संतुलित, मानसिक रूप से स्वस्थ और सामाजिक रूप से उत्तरदायी समाज का निर्माण भी है।
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इस दौरान रांची इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो साइकेट्री एंड एलाइड साइंसिज के प्रो. अमोल रंजन सिंह मुख्य वक्ता व सोसायटी ऑफ इंडस्ट्रियल एंड आर्गेनाइजेशनल साइकोलॉजी (एसओआईओपी) के अध्यक्ष प्रो. एपी सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस दौरान ''''''''''''''''डिसेबिलिटी एंड रिहेबिलिटेशन'''''''''''''''' नामक एक पुस्तक का विमोचन किया गया। यह पुस्तक डाॅ. संजय कुमार व डाॅ. स्नेहा मित्तल द्वारा लिखी गई है। इस मौके पर कुलपति के तकनीकी सलाहकार प्रो. संदीप राणा, संयोजक मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष के अध्यक्ष डाॅ. संजय कुमार, आयोजन सचिव डाॅ. तरुणा मौजूद रहीं।