फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Hisar News ›   GJU Vice Chancellor Prof. Narsiram Bishnoi received Lifetime Achievement Award for his contribution in the field of sustainable development and environment

Hisar News: जीजेयू के कुलपति को प्रो. नरसी राम बिश्नोई सतत विकास एवं पर्यावरण क्षेत्र में योगदान के लिए मिला लाइफटाइम अचीवमेंट अवाॅर्ड

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 27 Mar 2025 12:20 AM IST
विज्ञापन
GJU Vice Chancellor Prof. Narsiram Bishnoi received Lifetime Achievement Award for his contribution in the field of sustainable development and environment
जीजेयू के कुलपति प्रो. नरसी को सम्मानित करते आयोजक।  
हिसार। गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (जीजेयू) के कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई को सतत विकास एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट अवाॅर्ड से नवाजा गया। विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के सौजन्य से विश्वविद्यालय के चौधरी रणबीर सिंह सभागार में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन समारोह में बुधवार को उन्हें यह अवाॅर्ड मिला।
विज्ञापन

बिल्डिंग सस्टेनेबल ऑर्गेनाइजेशनल : साइकोलॉजिकल इश्यूज एंड चैलेंजिज विषय पर आयोजित संगोष्ठी के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. आरपी बाजपेयी ने कहा कि राष्ट्र के निर्माण में मनोविज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका है। मनोविज्ञान आपके विचारों में आधारभूत परिर्वतन लाने का सहायक बन सकता है। देश के सरकारी और निजी हर संस्थान में एक मनोवैज्ञानिक की नियुक्ति होनी चाहिए। इससे न केवल संस्थानों के कर्मचारियों को मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायता मिलेगी साथ ही रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। उन्होंने प्रतिभागियों से कहा, अपनी सोच का दायरा बढ़ाएं। नए उत्पादों का उत्पादन करें व अपने उत्पादों को पेटेंट करवाकर राष्ट्र निर्माण में योगदान दें।
विज्ञापन

मानसिक स्वास्थ्य, मनोविज्ञान स्थिरता और समावेशी संस्कृति को दें प्राथमिकता
कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने कहा, यूएनओ ने प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण से संबंधित सतत विकास के जिन 17 उद्देश्यों का निर्धारण किया है, वे उद्देश्य गुरु जम्भेश्वर महाराज के 29 नियमों में पहले से ही स्थापित हैं। यदि हम सतत विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में कार्य करना चाहते हैं तो हमें संगठनों में मानसिक स्वास्थ्य, मनोविज्ञान स्थिरता और समावेशी संस्कृति को प्राथमिकता देनी होगी। सतत विकास का अर्थ केवल आर्थिक लाभ नहीं है, बल्कि एक संतुलित, मानसिक रूप से स्वस्थ और सामाजिक रूप से उत्तरदायी समाज का निर्माण भी है।
विज्ञापन
विज्ञापन

इस दौरान रांची इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो साइकेट्री एंड एलाइड साइंसिज के प्रो. अमोल रंजन सिंह मुख्य वक्ता व सोसायटी ऑफ इंडस्ट्रियल एंड आर्गेनाइजेशनल साइकोलॉजी (एसओआईओपी) के अध्यक्ष प्रो. एपी सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस दौरान ''''''''''''''''डिसेबिलिटी एंड रिहेबिलिटेशन'''''''''''''''' नामक एक पुस्तक का विमोचन किया गया। यह पुस्तक डाॅ. संजय कुमार व डाॅ. स्नेहा मित्तल द्वारा लिखी गई है। इस मौके पर कुलपति के तकनीकी सलाहकार प्रो. संदीप राणा, संयोजक मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष के अध्यक्ष डाॅ. संजय कुमार, आयोजन सचिव डाॅ. तरुणा मौजूद रहीं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed