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जीजेयू का डीबीटी प्रोजेक्ट मामला : डुप्लीकेट चाबी लगाने से ताले में आई थी खराबी
ब्यूरो / अमर उजाला, हिसार
Updated Tue, 20 Sep 2016 12:57 AM IST
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जीजेयू
- फोटो : Demo
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डीबीटी प्रोजेक्ट मामले में अब जांच कमेटी के सामने लैब इंचार्ज ने भी कोई डॉक्यूमेंट चोरी होने की बात से इनकार कर दिया है। लैब इंचार्ज ने कमेटी को ये बयान लिखित में दिए हैं। लैब इंचार्ज ने कमेटी को कहा है कि ताला खराब होने की वजह से चोरी का शक हुआ था। कमेटी के सामने उन्होंने ताला खराब होने की वजह डुप्लीकेट चाबी से ताले को खोलने का प्रयास बताया है। यह चाबी भी उनके द्वारा ही बनवाई गई है।
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कमेटी को लिखित में दिया नहीं हुई चोरी
सोमवार को दोनों पक्षों की सुनवाई विश्वविद्यालय द्वारा बनाई गई कमेटी के सामने हुई। जिसमें दोनों से सवाल जवाब किए गए। इसके बाद लिखित में दिया गया कि कोई फाइल चोरी नहीं हुई। इसके बाद कमेटी ने रिपोर्ट बना ली है। जिसे कंपाइल कर कुलपति को सौंपा जाना है।
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शिकायत में नहीं था किसी चोरी का कोई जिक्र
जीजेयू में बायो नैनो टेक्नोलॉजी विभाग में ताला टूटने की शिकायत 16 अगस्त को आई थी। इसके बाद संबंधित मामले की फाइल चोरी होने की अफवाह फैल गई थी। लेकिन शिकायत में किसी भी तरह की चोरी का कोई जिक्र नहीं था। सीएसओ के अनुसार उन्हें मिली शिकायत के मुताबिक 12 अगस्त को ताला बंद किया गया था। 13 तारीख की छुट्टी थी। 14 अगस्त को ताला टूटा हुआ मिला था। इसके बाद डीबीटी प्रोजेक्ट की फाइल चोरी की खबरें आ रही थी। लेकिन अमर उजाला ने दो दिन की पड़ताल के बाद मामले को स्पष्ट कर बता दिया था कि विभाग से कोई चोरी नहीं हुई थी।
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यह था डीबीटी प्रोजेक्ट से जुड़ा मामला
जीजेयू के बायो नैनो टेक्नोलॉजी विभाग में डीबीटी प्रोजेक्ट के तहत रिसर्च कर रही रिसर्चर ने प्रोजेक्ट इंचार्ज पर 75 हजार रुपये मांगने का आरोप लगाया था। वीसी के संज्ञान में मामला आने के बाद प्रोफेसर ने रिसर्चर को गैर हाजिर रहने और रिसर्च वर्क ठीक से न करने का हवाला देकर उन्हें टर्मिनेट करने के लिए कुलपति को पत्र लिख दिया, जिसके बाद रिसर्चर को टर्मिनेट कर दिया गया था। बाद में रिसर्च एसोसिएट ने बताया था कि उक्त प्रोफेसर ने एक नहीं तीन रिसर्चर्स से 1.60 रुपये मांगे थे। बाद में दबाव में आए प्रशासन ने रिसर्चर का टर्मिनेशन वापस ले लिया। वहीं मामले को लेकर कमेटी बना दी गई थी। इसके बाद अमेरिका की यूनिवर्सिटी को भेजे गए 19 लाख रुपयों को लेकर सवाल उठे तो मामले की जांच भी शुरू कर दी गई थी। इसके बाद मामले की फाइल चोरी की खबरें आ रही थी।
हमने दोनों पक्षों को सुन लिया है। दोनों पक्षों से अलग-अलग बातचीत करके जवाब लिए हैं। रिपोर्ट तैयार कर जल्द ही कुलपति को सौंप दी जाएगी। 19 लाख के मामले में बातचीत बाद में की जाएगी।
- प्रो. अशोक मल्होत्रा, कमेटी अध्यक्ष एवं डीन एकेडमिक अफेयर, जीजेयू
कोई फाइल चोरी नहीं हुई है। लैब इंचार्ज ने लिखित में कमेटी को दिया है कि कोई भी फाइल या डॉक्यूमेंट चोरी नहीं हुआ है। केवल ताले को लेकर शिकायत दी गई थी।
- डॉ. संदीप राणा, प्रॉक्टर एवं जांच कमेटी के सदस्य, जीजयू, हिसार