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हिसार: बच्ची की गला दबाकर की हत्या, गुप्तांग में मिली इंजरी, सिर की हड्डी और जबाड़ा टूटा मिला
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हिसार। आठ वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में सोमवार सुबह नेपाली समुदाय के लोगों ने नागरिक अस्पताल में रोष प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने आरोपी को फांसी की सजा देने की मांग उठाई। वहीं, दोपहर करीब दो बजे नागरिक अस्पताल के डॉ. विमल जैन, डॉ. पूनम, डाॅ. विनोद, अग्रोहा से आए फॉरेंसिंक एक्सपर्ट हरीश अग्रवाल की टीम ने शव का पोस्टमार्टम शुरू किया।
तीन घंटे चले पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में सामने आया कि दुष्कर्म के बाद बच्ची की गला दबा कर हत्या की गई। इसके बाद सिर और मुंह पर ईंट से वार किए गए। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि बच्ची के गुप्तांग में इंजरी है और सिर व जबाड़ा टूटा मिला है। चिकित्सकों की टीम ने स्वैब, डीएनए के लिए बाल और छाती की हड्डी, केमिकल और एलटीसी जांच के लिए मेडिकल कॉलेज अग्रोहा भेजा है। वहीं पुलिस ने आरोपी अमित उर्फ मोनू को अदालत में पेश कर दो दिन के रिमांड पर लिया है। पुलिस आरोपी के घर से सीसीटीवी की डीवीआर भी ले गई है।
आरोपी को फांसी की मांग को लेकर सुबह नेपाली समुदाय ने की नारेबाजी
सोमवार सुबह 11 बजे पुलिस आरोपी अमित की मेडिकल जांच करवाने के लिए नागरिक अस्पताल के आपातकालीन कक्ष में लेकर आए। पता चलने पर नेपाली समुदाय के लोग अस्पताल परिसर पहुंचे और आपातकालीन कक्ष के बाहर नारेबाजी शुरू कर दी। उन्होंने कहा कि भारत सरकार आठ साल की बच्ची को न्याय दें और आरोपी को फांसी की सजा दें। करीब डेढ़ घंटे तक लोग आपातकालीन कक्ष के बाहर नारेबाजी करते रहे। उनका कहना था कि पीड़ित परिजन गरीबी रेखा के नीचे आते हैं, ऐसे में सरकार उनकी आर्थिक मदद करें। जैसे निर्भया कांड के बाद उसे न्याय दिलवाने के लिए पूरा देश सड़कों पर उतारा था, ऐसे ही बच्ची को न्याय दिलवाने के लिए आमजन हमारा साथ दें।
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महिला ने पुलिस की गाड़ी पर मारा मुक्का
नागरिक अस्पताल में प्रदर्शन के दौरान पुलिस प्रशासन द्वारा मेडिकल जांच करवाने के बाद आरोपी को आपातकालीन कक्ष से बाहर निकाला गया। गाड़ी में बैठाते समय एक महिला आरोपी को पकड़ने के लिए पीछे दौड़ी। इस दौरान महिला ने गाड़ी के शीशे पर मुक्का भी मारा। पोस्टमार्टम के बाद शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
आरोपी के परिजन बोले-सरेआम फांसी दे दो
आठ साल की बच्ची से दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या करने वाले आरोपी अमित के माता-पिता दोनों सरकारी नौकरी करते हैं। उनका कहना है कि उनके बेटे ने जब ये वारदात की उस समय से ही वो हमारे के लिए मर चुका है। आरोपी को सरेआम फांसी दे देनी चाहिए। हम अदालत में उसकी पैरवी भी नहीं करेंगे और न ही कभी उस से मिलने के लिए जाएगें। उसने हमारा सब कुछ बर्बाद कर दिया। हम सरकार से मांग करते हैं कि उसे फांसी दे दी जाए। उन्होंने कहा कि हम पीड़िता के परिवार के साथ हैं।
आरोपी ने अगले दिन धोए कपड़े
आरोपी के परिजनों ने बताया कि शुक्रवार रात को अमित करीब एक बजे घर आया था। देर रात तक उसे तलाशते रहे थे, लेकिन उसका कहीं कोई पता नहीं चला था। सुबह जब उससे बात की तो उसने कुछ नहीं कहा और खुद ही अपने कपड़े धोने लगा। उसके बाद अपने कमरे में सो गया। रविवार को जब पुलिस उसे पकड़ कर ले जा रही थी उस समय भी उसने कोई जवाब नहीं दिया। बाद में बेटे द्वारा किए अपराध का पता चला। आरोपी ऑटो चालक है।
बच्ची की आत्मिक शांति के लिए शाम को निकाला कैंडल मार्च
बच्ची के अंतिम संस्कार के बाद नेपाली समुदाय के लोग नई अनाजमंडी एरिया में एकत्रित हुए। बच्ची की आत्मा की शांति और आरोपी को फांसी की सजा दिलवाने के लिए कैंडल मार्च निकाला। नई अनाजमंडी से हाथों में मोमबत्तियां लेकर दोषी को फांसी दो के नारे लगाते हुए पारिजात चौक पर पहुंची। कैंडल मार्च के दौरान जाम की स्थिति बन गई।
आरोपी को अदालत में पेश कर दो दिन के रिमांड पर लिया है। घटना स्थल की निशानदेही कर बच्ची की हत्या में प्रयुक्त ईंट को बरामद किया जाएगा। - कप्तान सिंह, शहर थाना प्रभारी
बेटियों की हिफाजत के लिए घर से स्कूल तक अभिभावकाें को बरतनी होगी सतर्कता
हिसार। जिले में एक सप्ताह में तीन बेटियों के साथ दरिंदगी हुई। एक बेटी की तो हत्या तक कर दी गई। बेटियां न तो घर के सामने सुरक्षित हैं और न ही स्कूल में। लगातार हो रही इन घटनाओं ने समाज के हर वर्ग को झकझोर दिया है। वर्तमान हालात को देखते हुए महिलाओं का कहना है कि अब अभिभावकाें को बेटियों की हिफाजत के लिए घर से स्कूल तक सतर्कता बरतनी होगी।
समाज की सोच में सकारात्मक बदलाव लाए बिना ऐसे अपराध खत्म नहीं होंगे। ऐसे मामलों में त्वरित व सख्त सजा देकर ही अपराध की मानसिकता को बदला जा सकता है। इसके अलावा हर मां-बाप को अपने बच्चों की पहले से कई गुना अधिक सुरक्षा करने की जरूरत है। - निर्मला दलाल, गृहिणी
नशे की प्रवृति और मोबाइल ने बेटियों को पहले से कहीं अधिक असुरक्षित कर दिया है। हर मां-बाप की अब यह नैतिक जिम्मेदारी भी है कि अपने बच्चों को नशे व मोबाइल के दुष्प्रभाव से भी अवगत कराएं। इसके अलावा दोषियों को सख्त व जल्दी सजा का प्रावधान हो। - रितू जाखड़, गृहिणी
पिछले दिनों एक स्कूल में हुई घटना ने चिंता और बढ़ा दी। अगर स्कूल में ऐसा होगा तो लोगों का भरोसा टूटते देर नहीं लगेगी। इसलिए शिक्षकों, अभिभावकों व प्रशासनिक तंत्र को मिलकर पहले से ही अधिक गंभीरता से कार्य करना होगा। बेटियों को घर से लेकर स्कूल व खेल मैदान तक सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराना सबकी जिम्मेदारी है। - वंदना अरोड़ा, शिक्षिका
ऐसी घटनाएं माहौल को डरावना बनाती हैं। हालांकि, शिक्षा के प्रसार व कानून की सख्ती से हालात पहले से बेहतर हो रहे हैं, लेकिन अभी भी काफी प्रयास की जरूरत है। सबसे पहला काम समाज की सोच में बदलाव के लिए प्रयास करना है। रेनू वशिष्ठ, शिक्षिका
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तीन घंटे चले पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में सामने आया कि दुष्कर्म के बाद बच्ची की गला दबा कर हत्या की गई। इसके बाद सिर और मुंह पर ईंट से वार किए गए। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि बच्ची के गुप्तांग में इंजरी है और सिर व जबाड़ा टूटा मिला है। चिकित्सकों की टीम ने स्वैब, डीएनए के लिए बाल और छाती की हड्डी, केमिकल और एलटीसी जांच के लिए मेडिकल कॉलेज अग्रोहा भेजा है। वहीं पुलिस ने आरोपी अमित उर्फ मोनू को अदालत में पेश कर दो दिन के रिमांड पर लिया है। पुलिस आरोपी के घर से सीसीटीवी की डीवीआर भी ले गई है।
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आरोपी को फांसी की मांग को लेकर सुबह नेपाली समुदाय ने की नारेबाजी
सोमवार सुबह 11 बजे पुलिस आरोपी अमित की मेडिकल जांच करवाने के लिए नागरिक अस्पताल के आपातकालीन कक्ष में लेकर आए। पता चलने पर नेपाली समुदाय के लोग अस्पताल परिसर पहुंचे और आपातकालीन कक्ष के बाहर नारेबाजी शुरू कर दी। उन्होंने कहा कि भारत सरकार आठ साल की बच्ची को न्याय दें और आरोपी को फांसी की सजा दें। करीब डेढ़ घंटे तक लोग आपातकालीन कक्ष के बाहर नारेबाजी करते रहे। उनका कहना था कि पीड़ित परिजन गरीबी रेखा के नीचे आते हैं, ऐसे में सरकार उनकी आर्थिक मदद करें। जैसे निर्भया कांड के बाद उसे न्याय दिलवाने के लिए पूरा देश सड़कों पर उतारा था, ऐसे ही बच्ची को न्याय दिलवाने के लिए आमजन हमारा साथ दें।
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महिला ने पुलिस की गाड़ी पर मारा मुक्का
नागरिक अस्पताल में प्रदर्शन के दौरान पुलिस प्रशासन द्वारा मेडिकल जांच करवाने के बाद आरोपी को आपातकालीन कक्ष से बाहर निकाला गया। गाड़ी में बैठाते समय एक महिला आरोपी को पकड़ने के लिए पीछे दौड़ी। इस दौरान महिला ने गाड़ी के शीशे पर मुक्का भी मारा। पोस्टमार्टम के बाद शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
आरोपी के परिजन बोले-सरेआम फांसी दे दो
आठ साल की बच्ची से दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या करने वाले आरोपी अमित के माता-पिता दोनों सरकारी नौकरी करते हैं। उनका कहना है कि उनके बेटे ने जब ये वारदात की उस समय से ही वो हमारे के लिए मर चुका है। आरोपी को सरेआम फांसी दे देनी चाहिए। हम अदालत में उसकी पैरवी भी नहीं करेंगे और न ही कभी उस से मिलने के लिए जाएगें। उसने हमारा सब कुछ बर्बाद कर दिया। हम सरकार से मांग करते हैं कि उसे फांसी दे दी जाए। उन्होंने कहा कि हम पीड़िता के परिवार के साथ हैं।
आरोपी ने अगले दिन धोए कपड़े
आरोपी के परिजनों ने बताया कि शुक्रवार रात को अमित करीब एक बजे घर आया था। देर रात तक उसे तलाशते रहे थे, लेकिन उसका कहीं कोई पता नहीं चला था। सुबह जब उससे बात की तो उसने कुछ नहीं कहा और खुद ही अपने कपड़े धोने लगा। उसके बाद अपने कमरे में सो गया। रविवार को जब पुलिस उसे पकड़ कर ले जा रही थी उस समय भी उसने कोई जवाब नहीं दिया। बाद में बेटे द्वारा किए अपराध का पता चला। आरोपी ऑटो चालक है।
बच्ची की आत्मिक शांति के लिए शाम को निकाला कैंडल मार्च
बच्ची के अंतिम संस्कार के बाद नेपाली समुदाय के लोग नई अनाजमंडी एरिया में एकत्रित हुए। बच्ची की आत्मा की शांति और आरोपी को फांसी की सजा दिलवाने के लिए कैंडल मार्च निकाला। नई अनाजमंडी से हाथों में मोमबत्तियां लेकर दोषी को फांसी दो के नारे लगाते हुए पारिजात चौक पर पहुंची। कैंडल मार्च के दौरान जाम की स्थिति बन गई।
आरोपी को अदालत में पेश कर दो दिन के रिमांड पर लिया है। घटना स्थल की निशानदेही कर बच्ची की हत्या में प्रयुक्त ईंट को बरामद किया जाएगा। - कप्तान सिंह, शहर थाना प्रभारी
बेटियों की हिफाजत के लिए घर से स्कूल तक अभिभावकाें को बरतनी होगी सतर्कता
हिसार। जिले में एक सप्ताह में तीन बेटियों के साथ दरिंदगी हुई। एक बेटी की तो हत्या तक कर दी गई। बेटियां न तो घर के सामने सुरक्षित हैं और न ही स्कूल में। लगातार हो रही इन घटनाओं ने समाज के हर वर्ग को झकझोर दिया है। वर्तमान हालात को देखते हुए महिलाओं का कहना है कि अब अभिभावकाें को बेटियों की हिफाजत के लिए घर से स्कूल तक सतर्कता बरतनी होगी।
समाज की सोच में सकारात्मक बदलाव लाए बिना ऐसे अपराध खत्म नहीं होंगे। ऐसे मामलों में त्वरित व सख्त सजा देकर ही अपराध की मानसिकता को बदला जा सकता है। इसके अलावा हर मां-बाप को अपने बच्चों की पहले से कई गुना अधिक सुरक्षा करने की जरूरत है। - निर्मला दलाल, गृहिणी
नशे की प्रवृति और मोबाइल ने बेटियों को पहले से कहीं अधिक असुरक्षित कर दिया है। हर मां-बाप की अब यह नैतिक जिम्मेदारी भी है कि अपने बच्चों को नशे व मोबाइल के दुष्प्रभाव से भी अवगत कराएं। इसके अलावा दोषियों को सख्त व जल्दी सजा का प्रावधान हो। - रितू जाखड़, गृहिणी
पिछले दिनों एक स्कूल में हुई घटना ने चिंता और बढ़ा दी। अगर स्कूल में ऐसा होगा तो लोगों का भरोसा टूटते देर नहीं लगेगी। इसलिए शिक्षकों, अभिभावकों व प्रशासनिक तंत्र को मिलकर पहले से ही अधिक गंभीरता से कार्य करना होगा। बेटियों को घर से लेकर स्कूल व खेल मैदान तक सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराना सबकी जिम्मेदारी है। - वंदना अरोड़ा, शिक्षिका
ऐसी घटनाएं माहौल को डरावना बनाती हैं। हालांकि, शिक्षा के प्रसार व कानून की सख्ती से हालात पहले से बेहतर हो रहे हैं, लेकिन अभी भी काफी प्रयास की जरूरत है। सबसे पहला काम समाज की सोच में बदलाव के लिए प्रयास करना है। रेनू वशिष्ठ, शिक्षिका