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Hisar News: बिजली निगम के टैरिफ आदेश के खिलाफ पूर्व मंत्री संपत सिंह ने दायर की समीक्षा याचिका
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हिसार। प्रदेश के पूर्व वित्त मंत्री प्रो. संपत सिंह ने हरियाणा विद्युत नियामक आयोग के 28 मार्च 2025 के टैरिफ आदेश के खिलाफ समीक्षा याचिका दायर की है। उन्होंने कहा कि आयोग के विद्युत शुल्क में वृद्धि करने से सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं को झटका लगा है।
प्रदेश के पूर्व वित्त मंत्री प्रो. संपत सिंह ने बताया कि विद्युत नियामक के आदेश में आश्चर्यजनक बात यह है कि बिजली कंपनियां 7964.28 करोड़ यूनिट की विभिन्न बिजली उत्पादन इकाइयों से बिजली 3.12 रुपये प्रति यूनिट के दर खरीद कर उपभोक्ताओं को 7.29 रुपये प्रति यूनिट की दर से बेच रही हैं। कुल खरीदी गई बिजली में से उपभोक्ता को केवल 6916 करोड़ यूनिट दी जानी है। रास्ते में नुकसान 22 प्रतिशत से अधिक है। इसलिए उपभोक्ता को उस ऊर्जा के लिए 22 प्रतिशत अधिक भुगतान करना होगा।
उन्होंने बताया कि हरियाणा सरकार ने 30 सितंबर, 2015 को उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना (उदय) के तहत बिजली निगमों के खिलाफ लंबित ऋण की देनदारियों के 34,000 करोड़ रुपये के बोझ को अपने ऊपर लिया था। इसके बाद निगम कर्ज के बोझ से बाहर आ गई। निगमों और हरियाणा सरकार ने मार्च, 2021 में एक बयान दिया था कि हमारी बिजली निगमों को पहली बार 800 करोड़ रुपये का लाभ हुआ है। प्रो. संपत सिंह ने तर्क दिया कि उदय का लाभ मिलने के बाद बिजली वितरण कंपनियों को बिजली की दरें कम करनी चाहिए थीं।
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पहली बार घरेलू उपभोक्ता को भी 50 रुपये प्रति किलोवाट से 75 प्रति किलोवाट का फिक्सड शुल्क का झटका दिया गया है। प्रति यूनिट की दरें भी 25 से 50 प्रतिशत बढ़ाई गई है। कॉमर्शियल उपभोक्ताओं की भी बिजली दरें बढ़ा दी गई है।
सभी श्रेणियों के लिए एफएसए 47 पैसे प्रति यूनिट अभी भी जारी रखा है, जबकि यह जून, 2024 तक वसूल किया जाना था। यह भी कभी न खत्म होने वाला बोझ है। चिंता की बात है कि 22 लाख उपभोक्ताओं की डिफॉल्टिंग राशि 8 हजार करोड़ रुपये हो चुकी है यानी ये 22 लाख उपभोक्ता बिजली की खपत बिना बिल दिए कर रहे है, जिसका बोझ बाकी उपभोक्ताओं पर भी पड़ता है।
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प्रदेश के पूर्व वित्त मंत्री प्रो. संपत सिंह ने बताया कि विद्युत नियामक के आदेश में आश्चर्यजनक बात यह है कि बिजली कंपनियां 7964.28 करोड़ यूनिट की विभिन्न बिजली उत्पादन इकाइयों से बिजली 3.12 रुपये प्रति यूनिट के दर खरीद कर उपभोक्ताओं को 7.29 रुपये प्रति यूनिट की दर से बेच रही हैं। कुल खरीदी गई बिजली में से उपभोक्ता को केवल 6916 करोड़ यूनिट दी जानी है। रास्ते में नुकसान 22 प्रतिशत से अधिक है। इसलिए उपभोक्ता को उस ऊर्जा के लिए 22 प्रतिशत अधिक भुगतान करना होगा।
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उन्होंने बताया कि हरियाणा सरकार ने 30 सितंबर, 2015 को उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना (उदय) के तहत बिजली निगमों के खिलाफ लंबित ऋण की देनदारियों के 34,000 करोड़ रुपये के बोझ को अपने ऊपर लिया था। इसके बाद निगम कर्ज के बोझ से बाहर आ गई। निगमों और हरियाणा सरकार ने मार्च, 2021 में एक बयान दिया था कि हमारी बिजली निगमों को पहली बार 800 करोड़ रुपये का लाभ हुआ है। प्रो. संपत सिंह ने तर्क दिया कि उदय का लाभ मिलने के बाद बिजली वितरण कंपनियों को बिजली की दरें कम करनी चाहिए थीं।
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पहली बार घरेलू उपभोक्ता को भी 50 रुपये प्रति किलोवाट से 75 प्रति किलोवाट का फिक्सड शुल्क का झटका दिया गया है। प्रति यूनिट की दरें भी 25 से 50 प्रतिशत बढ़ाई गई है। कॉमर्शियल उपभोक्ताओं की भी बिजली दरें बढ़ा दी गई है।
सभी श्रेणियों के लिए एफएसए 47 पैसे प्रति यूनिट अभी भी जारी रखा है, जबकि यह जून, 2024 तक वसूल किया जाना था। यह भी कभी न खत्म होने वाला बोझ है। चिंता की बात है कि 22 लाख उपभोक्ताओं की डिफॉल्टिंग राशि 8 हजार करोड़ रुपये हो चुकी है यानी ये 22 लाख उपभोक्ता बिजली की खपत बिना बिल दिए कर रहे है, जिसका बोझ बाकी उपभोक्ताओं पर भी पड़ता है।