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10 मिनट में कागजातों को कीटाणु रहित कर देगा उपकरण
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पराबैंगनी विकिरण आधारित कागजात कीटाणुशोधन प्रणाली का जायजा लेते कुलपति प्रो. केपी सिंह व अन्य।
- फोटो : Hisar
चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में अब कागज की फाइलों को भी डिस्इंफेक्टिड किया जा सकेगा। विवि के कृषि अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय के वैज्ञानिकों इंजी सुनील कुमार और डॉ. अरुण कुमार अटकान ने इसके लिए एक अल्ट्रा वायलेट (पराबैंगनी) विकिरण आधारित कागजात कीटाणु शोधन प्रणाली विकसित की है।
पूर्व अनुसंधान के अनुसार, अल्ट्रा वायलेट (पराबैंगनी) विकिरण विशेषकर अल्ट्रा वायलेट-सी सूक्ष्म जीवों को नष्ट करने में सक्षम होती हैं। कुलपति प्रो. केपी सिंह के दिशा-निर्देश और मौलिक विज्ञान एवं मानविकी महाविद्यालय के सहयोग से बना यह उपकरण विकिरण द्वारा कागजातों का कीटाणु शोधन लगभग 10 मिनट में कर देता है। वर्तमान में इस उपकरण को विश्वविद्यालय के कुलपति कार्यालय में स्थापित किया गया है। इसके निर्माण में 5000 रुपये के लगभग खर्च आया है।
कागजातों को भी कीटाणु रहित करना जरूरी
विवि के कुलपति प्रो. केपी सिंह ने बताया कि कोरणा के कारण लोगों द्वारा अपनी जीवन शैली में बदलाव के साथ सार्वजनिक स्थानों पर कामकाज के दौरान सावधानी रखना आवश्यक है। सार्वजनिक कार्यालयों में कागजातों का आवागमन इस बीमारी के संक्रमण का कारण बन सकता है। अत: इन कागजातों का कीटाणु शोधन बहुत आवश्यक है। उन्होंने इस ‘अल्ट्रा वायलेट विकिरण आधारित कागजात कीटाणु शोधन प्रणाली’ की सराहना की और इस उपकरण के इस्तेमाल को कोरोना से बचाव में उपयोगी बताया। इस दौरान विशेष कार्यकारी अधिकारी डॉ. एमके गर्ग, कुलसचिव डॉ. बीआर कंबोज, कृषि अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. आरके झोरड़ एवं एसपीएस सुरेंद्र सलूजा भी मौजूद रहे।
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पूर्व अनुसंधान के अनुसार, अल्ट्रा वायलेट (पराबैंगनी) विकिरण विशेषकर अल्ट्रा वायलेट-सी सूक्ष्म जीवों को नष्ट करने में सक्षम होती हैं। कुलपति प्रो. केपी सिंह के दिशा-निर्देश और मौलिक विज्ञान एवं मानविकी महाविद्यालय के सहयोग से बना यह उपकरण विकिरण द्वारा कागजातों का कीटाणु शोधन लगभग 10 मिनट में कर देता है। वर्तमान में इस उपकरण को विश्वविद्यालय के कुलपति कार्यालय में स्थापित किया गया है। इसके निर्माण में 5000 रुपये के लगभग खर्च आया है।
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कागजातों को भी कीटाणु रहित करना जरूरी
विवि के कुलपति प्रो. केपी सिंह ने बताया कि कोरणा के कारण लोगों द्वारा अपनी जीवन शैली में बदलाव के साथ सार्वजनिक स्थानों पर कामकाज के दौरान सावधानी रखना आवश्यक है। सार्वजनिक कार्यालयों में कागजातों का आवागमन इस बीमारी के संक्रमण का कारण बन सकता है। अत: इन कागजातों का कीटाणु शोधन बहुत आवश्यक है। उन्होंने इस ‘अल्ट्रा वायलेट विकिरण आधारित कागजात कीटाणु शोधन प्रणाली’ की सराहना की और इस उपकरण के इस्तेमाल को कोरोना से बचाव में उपयोगी बताया। इस दौरान विशेष कार्यकारी अधिकारी डॉ. एमके गर्ग, कुलसचिव डॉ. बीआर कंबोज, कृषि अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. आरके झोरड़ एवं एसपीएस सुरेंद्र सलूजा भी मौजूद रहे।
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