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मन, शरीर और आत्मा की ऊर्जा साधना है विद्युत ध्यान : आचार्य कृष्ण उत्सव
Sun, 19 Oct 2025 11:54 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Sun, 19 Oct 2025 11:54 PM IST
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कौशिक नगर स्थित ध्यान केंद्र में साधना करने पहुंचे साधक। स्रोत : आयोजक
- फोटो : Reasi news
हिसार। समर्थ गुरु धारा संघ की ओर से रविवार को मिर्जापुर रोड, कौशिक नगर में स्थित साधना केंद्र में साप्ताहिक ध्यान सत्र आयोजित किया गया, जिसमें आचार्य कृष्ण उत्सव ने साधकों को विद्युत ध्यान करवाया। सत्र की शुरुआत उत्सव, गुरु वंदना और ध्यान के महत्व पर संक्षिप्त प्रवचन से हुई।
आचार्य ने बताया कि विद्युत ध्यान विशेष ध्यान पद्धति है, जिसमें साधक अपने शरीर और मन में विद्युत (ऊर्जा) के प्रवाह को महसूस करता और संतुलित करता है। इसका उद्देश्य है तनाव कम करना, मानसिक स्थिरता पाना और शरीर की प्राकृतिक ऊर्जा को सक्रिय करना। आचार्य कृष्ण उत्सव ने बताया कि विद्युत ध्यान का अर्थ है ऊर्जा के स्रोत पर ध्यान या ऊर्जा की तरंगों के साथ मन को जोड़ना। इसमें साधक अपने भीतर प्रवाहित प्राण ऊर्जा को विद्युत धारा की तरह अनुभव करता है।
इसके बाद आचार्य ने साधकों को विद्युत ध्यान की प्रक्रिया समझाई और ध्यान के दौरान उत्पन्न होने वाली ऊर्जाओं को संतुलित करने के उपाय बताए। आचार्य ने बताया कि ध्यान के प्रकार और तकनीक विभिन्न हो सकती हैं और यह आध्यात्मिक गुरु या आध्यात्मिक शिक्षक के मार्गदर्शन में किया जाता है। प्रत्येक रविवार सुबह सात से नौ बजे तक समर्थ गुरु धारा संघ ध्यान के कार्यक्रम का आयोजन करता है, जोकि सभी के लिए निशुल्क होता है।
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आचार्य ने बताया कि विद्युत ध्यान विशेष ध्यान पद्धति है, जिसमें साधक अपने शरीर और मन में विद्युत (ऊर्जा) के प्रवाह को महसूस करता और संतुलित करता है। इसका उद्देश्य है तनाव कम करना, मानसिक स्थिरता पाना और शरीर की प्राकृतिक ऊर्जा को सक्रिय करना। आचार्य कृष्ण उत्सव ने बताया कि विद्युत ध्यान का अर्थ है ऊर्जा के स्रोत पर ध्यान या ऊर्जा की तरंगों के साथ मन को जोड़ना। इसमें साधक अपने भीतर प्रवाहित प्राण ऊर्जा को विद्युत धारा की तरह अनुभव करता है।
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इसके बाद आचार्य ने साधकों को विद्युत ध्यान की प्रक्रिया समझाई और ध्यान के दौरान उत्पन्न होने वाली ऊर्जाओं को संतुलित करने के उपाय बताए। आचार्य ने बताया कि ध्यान के प्रकार और तकनीक विभिन्न हो सकती हैं और यह आध्यात्मिक गुरु या आध्यात्मिक शिक्षक के मार्गदर्शन में किया जाता है। प्रत्येक रविवार सुबह सात से नौ बजे तक समर्थ गुरु धारा संघ ध्यान के कार्यक्रम का आयोजन करता है, जोकि सभी के लिए निशुल्क होता है।
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