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Hisar News: भैंसों की नस्ल सुधार, बेहतर खानपान से एक ब्यांत में औसतन 150 फीसदी दूध उत्पादन बढ़ाया

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 29 Dec 2023 02:53 AM IST
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Due to breed improvement and better diet of buffaloes, average milk production in one calving increased by 150 percent.
हिसार। केंद्रीय भैंस अनुसंधान केंद्र (सीआईआरबी) ने भैसों के ब्यांत में दूध उत्पादन की मात्रा में 150 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। केंद्र के वैज्ञानिकों की मानें तो यह उन्होंने नस्ल सुधार, बेहतर खानपान व रखरखाव से दूध उत्पादन को बढ़ाया। यही नहीं पशुपालकों को भी ये ज्यादा दूध उत्पादन वाले पशु मिले, इसके लिए केंद्र ने उच्च गुणवत्ता गुणवत्ता वाले झोटों के वीर्य से 2.3 लाख टीके तैयार करवाए हैं, जो निशुल्क पशुपालकों को उपलब्ध करवाए जा रहे हैं।
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केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सज्जन सिंह ने बताया कि जिस समय सीआईआरबी ने इस दिशा में कार्य शुरू किया था, उस समय एक भैंस एक ब्यांत में औसतन 1600 लीटर दूध देती थी, जिसे अब केंद्र ने बढ़ाकर 4000 लीटर कर दिया है। डॉ. सज्जन सिंह ने बताया कि पहला उन्होंने नस्ल सुधार पर ध्यान दिया। इसके तहत उच्च गुणवत्ता वाली भैंस से पैदा हुए झोटों के वीर्य से पैदा हुईं भैंसों का इस्तेमाल किया। दूसरा पशुओं के लिए ऐसा पौष्टिक चारा तैयार किया, जो उनकी शारीरिक जरूरतों काे पूरा करने के साथ-साथ दूध उत्पादन को भी बढ़ाए। इसके लिए उन्होंने स्थानीय क्षेत्र में उगने वाली घास, स्थानीय फसलें ज्वार, बाजरा, मक्का और खनिज मिश्रण मिलाकर भोजन तैयार किया, जिससे पशुओं की न सिर्फ शारीरिक जरूरत पूरी हुई, बल्कि दूध उत्पादन में भी बढ़ोतरी हुई। इसके अलावा उनका बेहतर प्रबंधन किया, जिसके तहत उनके बढि़या शेल्टर की व्यवस्था की गई।
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डॉ. सज्जन सिंह ने बताया कि पशुपालकों के पास भी ज्यादा दूध देने वाले पशु हो, इसके लिए उच्च गुणवत्ता वाले सांडों के वीर्य के 2.3 लाख टीके तैयार किए हैं, जो किसानों के लिए उपलब्ध है। निशुल्क पशुपालकों को ये टीके उपलब्ध करवाते हैं। आसपास के गांवों में ये टीके उपलब्ध भी करवाए जा रहे हैं, जिसका उन्हें फायदा भी मिल रहा है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में एक पशुपालक की भैंस एक ब्यांत में औसतन 2000 लीटर दूध दे रही है। संस्थान में देश में सर्वाधिक 23.2 लीटर दूध देने वाली भैंस भी है। संस्थान ने औसतन प्रति पशु उत्पादकता 11.95 किलोग्राम उत्पादन के साथ नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
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आगे यह रहेगा लक्ष्य
प्रधान वैज्ञानिक ने बताया कि उनका लक्ष्य उच्च गुणवत्ता वाले झोटों के वीर्य के टीके की संख्या बढ़ाकर 5 लाख करने का लक्ष्य है। इसके अलावा गिनती के बजाय पशुओं की गुणवत्ता बढ़ाने पर उनका जोर रहेगा, क्योंकि आने वाले समय में भोजन को लेकर इंसान व पशुओं में जंग होगी। इसके लिए जरूरी है कि पशुओं की संख्या कम की जाए। सिर्फ बेहतर गुणवत्ता वाले पशुओं को ही रखा जाए। खानपान की जरूरत पूरी हुई उत्पादन की जरूरत भी पूरी हुई।
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