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Hisar News: ड्रोन दीदी मोनिका खुद आत्मनिर्भर बनीं, 11 महिलाओं को दिया रोजगार
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ड्रोन चलातीं दीदी मोनिका।
हिसार। ड्रोन दीदी मोनिका न केवल खुद आत्मनिर्भर बनीं, सेल्फ हेल्प ग्रुप बनाकर 11 महिलाओं को भी स्वावलंबी बनाया। बीए की पढ़ाई के बाद कुछ नया करने की ठानी और ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण लेकर इसका लाइसेंस हासिल किया।
आज मोनिका न केवल खुद रोजगार चला रही हैं बल्कि अन्य महिलाओं को भी अपने साथ जोड़कर शक्ति स्वरूपा बनीं है। मोनिका बताती हैं कि ड्रोन का प्रशिक्षण लेकर खेतों से जुड़ना मेरे लिए बिल्कुल नया था। लोगों को ड्रोन चलाते हुए देखती थी तो मन में रोमांच उठता कि काश मैं भी इसे ऑपरेट कर पाती। पढ़ाई पूरी करने के बाद कई विकल्पों पर विचार किया। आखिर ड्रोन चलाना सीखने का निर्णय लिया। यह काम इसलिए भी महत्वपूर्ण था कि इसके जरिए वह खेती से भी जुड़ेगी।
ड्रोन के जरिए फसलों पर कीटनाशक का छिड़काव ट्रेंड में है। इसलिए इसी में हाथ आजमाने की ठानी। शुरुआत में 15 दिन का प्रशिक्षण लिया और दक्ष होने के बाद लाइसेंस हासिल किया। आज ड्रोन तकनीक को न केवल खुद के लिए बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी रोजगार का नया साधन बना दिया है।
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जनवरी 2024 में मोनिका ने ड्रोन उड़ाने की ट्रेनिंग ली और इसके बाद इसका कृषि क्षेत्र में प्रयोग करने लगीं। मोनिका ड्रोन की मदद से खेतों में फसलों पर कीटनाशक का छिड़काव करती हैं। इसके लिए वे प्रति एकड़ 400 रुपये लेती हैं। यह कार्य न केवल किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है, बल्कि मोनिका के साथ जुड़ी 11 महिलाओं के लिए भी आय का स्रोत बन गया है।
मोनिका सेल्फ हेल्प ग्रुप की सदस्य हैं, जिसमें महिलाएं मिलकर काम करती हैं और एक-दूसरे को सशक्त बनाती हैं। इस समूह की महिलाएं ड्रोन तकनीक में प्रशिक्षित हो रही हैं और अब वे खेतों में फसल की निगरानी, कीटनाशक छिड़काव जैसे कार्य कर रही हैं।
मोनिका ने बताया कि फसलों पर स्प्रे करना जोखिम भरा काम हैं। ऐसे में ड्रोन से स्प्रे करने से, जहां किसानों के लिए समय की बचत होती है, वहीं एक एकड़ में स्प्रे करने में 6-7 मिनट का समय लगता है।
एक बार चार्ज होने पर ड्रोन तीन एकड़ में स्प्रे कर सकता है। मेरे ग्रुप में 11 महिलाएं हैं। जब भी किसी किसान का ऑर्डर आता है तो चार से पांच महिलाएं उनके साथ जाती हैं।
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आज मोनिका न केवल खुद रोजगार चला रही हैं बल्कि अन्य महिलाओं को भी अपने साथ जोड़कर शक्ति स्वरूपा बनीं है। मोनिका बताती हैं कि ड्रोन का प्रशिक्षण लेकर खेतों से जुड़ना मेरे लिए बिल्कुल नया था। लोगों को ड्रोन चलाते हुए देखती थी तो मन में रोमांच उठता कि काश मैं भी इसे ऑपरेट कर पाती। पढ़ाई पूरी करने के बाद कई विकल्पों पर विचार किया। आखिर ड्रोन चलाना सीखने का निर्णय लिया। यह काम इसलिए भी महत्वपूर्ण था कि इसके जरिए वह खेती से भी जुड़ेगी।
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ड्रोन के जरिए फसलों पर कीटनाशक का छिड़काव ट्रेंड में है। इसलिए इसी में हाथ आजमाने की ठानी। शुरुआत में 15 दिन का प्रशिक्षण लिया और दक्ष होने के बाद लाइसेंस हासिल किया। आज ड्रोन तकनीक को न केवल खुद के लिए बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी रोजगार का नया साधन बना दिया है।
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जनवरी 2024 में मोनिका ने ड्रोन उड़ाने की ट्रेनिंग ली और इसके बाद इसका कृषि क्षेत्र में प्रयोग करने लगीं। मोनिका ड्रोन की मदद से खेतों में फसलों पर कीटनाशक का छिड़काव करती हैं। इसके लिए वे प्रति एकड़ 400 रुपये लेती हैं। यह कार्य न केवल किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है, बल्कि मोनिका के साथ जुड़ी 11 महिलाओं के लिए भी आय का स्रोत बन गया है।
मोनिका सेल्फ हेल्प ग्रुप की सदस्य हैं, जिसमें महिलाएं मिलकर काम करती हैं और एक-दूसरे को सशक्त बनाती हैं। इस समूह की महिलाएं ड्रोन तकनीक में प्रशिक्षित हो रही हैं और अब वे खेतों में फसल की निगरानी, कीटनाशक छिड़काव जैसे कार्य कर रही हैं।
मोनिका ने बताया कि फसलों पर स्प्रे करना जोखिम भरा काम हैं। ऐसे में ड्रोन से स्प्रे करने से, जहां किसानों के लिए समय की बचत होती है, वहीं एक एकड़ में स्प्रे करने में 6-7 मिनट का समय लगता है।
एक बार चार्ज होने पर ड्रोन तीन एकड़ में स्प्रे कर सकता है। मेरे ग्रुप में 11 महिलाएं हैं। जब भी किसी किसान का ऑर्डर आता है तो चार से पांच महिलाएं उनके साथ जाती हैं।