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Hisar News: नागरिक अस्पताल की बिगड़ी सेहत, एक बेड पर दो बीमार, जिला अस्पतालों में बिस्तरों की किल्लत से मरीज बेहाल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 23 Aug 2025 12:48 AM IST
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Deteriorating health of the municipal hospital, two patients on one bed, patients are suffering due to the shortage of beds in district hospitals.
नागरिक अस्पताल में एक बेड पर उपचाराधीन दो मरीज। 
हिसार। आयुष्मान योजना के तहत निजी अस्पतालों में मरीजों को 15 दिन से मुफ्त इलाज नहीं मिल पा रहा है। इस कारण जिला अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। वहां बिस्तर बढ़ाने की जरूरत पड़ रही है। ऐसा न होने के कारण कई बार एक बिस्तर पर दो मरीजों को लेटाकर ग्लूकोज और रक्त चढ़ाना पड़ रहा है।
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जिला अस्पताल में कुल बेड क्षमता करीब 200 है। इनमें से 14 बेड आपातकालीन कक्ष में लगे हैं। अस्पताल की ओपीडी में करीब 2,000 मरीज रोज आ रहे हैं। इनमें से करीब 150 मरीज आपातकालीन कक्ष में आ रहे हैं। अधिकतर लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी जाती है लेकिन गंभीर मरीजों का इलाज करने के लिए उन्हें दाखिल करना पड़ता है।
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अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों को अस्पताल के अंदर प्रसव वार्ड, हड्डी रोग, मानसिक रोग, नशामुक्ति वार्ड में रखा जाता है। आईपीडी के कई बेड खाली पड़े हैं लेकिन आपातकालीन कक्ष में कई बार एक, दो बिस्तर पर दो मरीजों को भी लेटाना पड़ रहा है।
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जब दाेनों मरीजों को ग्लूकोज चढ़ाना हो तो समानता रहती है लेकिन एक मरीज को ग्लूकोज और दूसरे मरीज को रक्त चढ़ाते समय मरीज की विषम परिस्थिति के आधार पर अन्य मरीज और उनके तीमारदार स्वयं को असहज महसूस कर रहे हैं।

कोट
हमारा मरीज आपातकालीन कक्ष में भर्ती है। उसे ग्लूकोज चढ़ाया जा रहा है लेकिन उसी बिस्तर पर लेटे दूसरे मरीज को रक्त चढ़ाया जा रहा है। इसी असहजता के कारण मरीज की छुट्टी जल्दी करानी पड़ी। - भीम सिंह, ग्राम खरकड़ी।
हमारा गांव जींद जिले में है लेकिन वहां हमारे मरीज को कई जगह भटकना पड़ता। इससे बचने और बेहतर उपचार के लिए मरीज को यहां लेकर आए थे लेकिन यहां भी बिस्तर कम पड़ना चिंताजनक है। - सुभाष जमौला, जुलाना।

आईएमए के सदस्य निजी चिकित्सक नहीं कर रहे इलाज
-फोटो एचएसआर 01-
हिसार। जिला अस्पताल के कक्ष संख्या 20 में आपातकालीन कक्ष के सामने हर कार्यदिवस पर सुबह नौ से एक बजे तक आयुष्मान कार्ड बनाए जा रहे हैं। इसके लिए आवेदक को आधार कार्ड या राशन कार्ड दिखाना होगा। यह कार्ड बनाने के बाद हर सरकारी अस्पतालों में मरीजों का हर साल पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज किया जा रहा है लेकिन इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के सदस्यों ने बकाया भुगतान न होने पर सात अगस्त से इस योजना का बहिष्कार किया है। इस कारण निजी अस्पतालाें में जाने वाले कार्डधारकों को मायूसी का सामना करना पड़ रहा है।
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