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Hisar News: पानी के टैंक में खतरनाक कीटनाशक, तीन गांवों में मचा हड़कंप
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सिवानी मंडी- ढाणी रामजस के बूस्टिंग स्टेशन पर थाना प्रभारी को शिकायत। संवाद
सिवानी मंडी। गांव ढाणी में वीरवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब जलघर के टैंक में भरे पानी में कीटनाशक एक्स्ट्रा-जिन की मौजूदगी की पुष्टि हुई। इस टैंक से ढाणी रामजस, ढाणी किशनलाल और ढाणी मीठी में जलापूर्ति की जाती है। पानी में विषैले पदार्थ की मिलावट की खबर फैलते ही लोगों में जलदाय विभाग के प्रति रोष फैल गया। इसकी शिकायत पुलिस को दी गई।
बूस्टिंग स्टेशन पर तैनात कर्मचारी सुनील कुमार मंगलवार को पानी की गुणवत्ता जांचने गए तो देखा कि टैंक में मरी हुई मछलियां और अन्य जीव पड़े थे। कई मछलियों के शरीर फटे हुए थे। इससे पानी में जहरीले पदार्थ की मिलावट का संदेह हुआ। उन्होंने सरपंच प्रतिनिधि सुरेंद्र सिंह और विभागीय अधिकारियों को सूचना दी। पानी में जहरीला पदार्थ होने के शक में तत्काल टैंक से जलापूर्ति बंद कर दी गई और तीनों गांवों के लोगों से कह दिया गया कि किसी ने आज पानी का भंडारण कर लिया है तो पीएं नहीं। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी उग्रसेन बिश्नोई व जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के कनिष्ठ अभियंता दीपक मलिक मौके पर पहुंचे। पानी के नमूने लेकर जांच के लिए करनाल भेजे गए। वीरवार को जांच रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि पानी में ‘एक्स्ट्रा-जिन’ नामक कीटनाशक मौजूद था।
टैंक को खाली करवाकर साफ पानी भरवाया
दीपक मलिक ने बताया कि टैंक को मंगलवार को ही खाली करवाकर पूरी तरह साफ कर दिया गया। अब इसमें स्वच्छ पानी भरकर आपूर्ति बहाल की है। ग्रामीणों ने थाना प्रभारी उग्रसेन को शिकायत दी कि गांव के पास से गुजरती देवसर फीडर नहर के किनारे अक्सर कुछ शरारती तत्व शराब और अन्य नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं। वे वहीं बैठते हैं, नहाते हैं। इससे आसपास से गुजरने वाली महिलाओं व स्कूली बच्चों को असहजता का सामना करना पड़ता है। उन्होंने इन्हीं लोगों पर शक जाहिर करते हुए टैंक में कीटनाशक डालने की शिकायत दी। इसके साथ ही जलघर की नियमित निगरानी व आसपास गश्त बढ़ाने, बूस्टिंग स्टेशनों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने और सुरक्षा गार्ड की व्यवस्था करने की मांग की। थाना प्रभारी ने बताया कि पुलिस इस मामले की पूरी गंभीरता से जांच कर रही है। इस मौके पर सुरेश ओला, पवन कुमार, उमेद सिंह, भारत सिंह, फकीरचंद, रोहतास, संदीप, सुरेंद्र, रघुवीर, विजेंद्र, आवाज सिंह नंबरदार, महावीर, अनिल, नरेश, महेंद्र, विजयपाल नंबरदार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
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बूस्टिंग स्टेशन पर तैनात कर्मचारी सुनील कुमार मंगलवार को पानी की गुणवत्ता जांचने गए तो देखा कि टैंक में मरी हुई मछलियां और अन्य जीव पड़े थे। कई मछलियों के शरीर फटे हुए थे। इससे पानी में जहरीले पदार्थ की मिलावट का संदेह हुआ। उन्होंने सरपंच प्रतिनिधि सुरेंद्र सिंह और विभागीय अधिकारियों को सूचना दी। पानी में जहरीला पदार्थ होने के शक में तत्काल टैंक से जलापूर्ति बंद कर दी गई और तीनों गांवों के लोगों से कह दिया गया कि किसी ने आज पानी का भंडारण कर लिया है तो पीएं नहीं। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी उग्रसेन बिश्नोई व जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के कनिष्ठ अभियंता दीपक मलिक मौके पर पहुंचे। पानी के नमूने लेकर जांच के लिए करनाल भेजे गए। वीरवार को जांच रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि पानी में ‘एक्स्ट्रा-जिन’ नामक कीटनाशक मौजूद था।
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टैंक को खाली करवाकर साफ पानी भरवाया
दीपक मलिक ने बताया कि टैंक को मंगलवार को ही खाली करवाकर पूरी तरह साफ कर दिया गया। अब इसमें स्वच्छ पानी भरकर आपूर्ति बहाल की है। ग्रामीणों ने थाना प्रभारी उग्रसेन को शिकायत दी कि गांव के पास से गुजरती देवसर फीडर नहर के किनारे अक्सर कुछ शरारती तत्व शराब और अन्य नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं। वे वहीं बैठते हैं, नहाते हैं। इससे आसपास से गुजरने वाली महिलाओं व स्कूली बच्चों को असहजता का सामना करना पड़ता है। उन्होंने इन्हीं लोगों पर शक जाहिर करते हुए टैंक में कीटनाशक डालने की शिकायत दी। इसके साथ ही जलघर की नियमित निगरानी व आसपास गश्त बढ़ाने, बूस्टिंग स्टेशनों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने और सुरक्षा गार्ड की व्यवस्था करने की मांग की। थाना प्रभारी ने बताया कि पुलिस इस मामले की पूरी गंभीरता से जांच कर रही है। इस मौके पर सुरेश ओला, पवन कुमार, उमेद सिंह, भारत सिंह, फकीरचंद, रोहतास, संदीप, सुरेंद्र, रघुवीर, विजेंद्र, आवाज सिंह नंबरदार, महावीर, अनिल, नरेश, महेंद्र, विजयपाल नंबरदार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
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