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डाबड़ा माइनर: नोटिसधारकों ने कहा- विस्थापित किया तो कहां जाएंगे

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 16 Jun 2025 11:02 PM IST
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Dabda Minor: Notice holders said- where will they go if they are displaced
एसडीएम की कोर्ट के बाहर पहुंचे विभिन्न क्षेत्रों के नोटिसधारक।
हिसार। डाबड़ा माइनर की जमीन से अवैध कब्जे हटाने के मामले में सोमवार को एसडीएम कोर्ट में सुनवाई हुई। नहर की जमीन पर काबिज लोगों के वकीलों ने एसडीएम के समक्ष सिंचाई विभाग की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि लोगों को विस्थापित किया गया तो वे कहां जाएंगे। सिंचाई विभाग ने 60 लोगों को नोटिस देकर नहर की जमीन पर बने निर्माण खाली कर देने को कहा है। इनमें जवाहर नगर, लाजपत नगर व फ्रेंड्स कॉलोनी के लोग शामिल हैं। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 1 जुलाई की तारीख निश्चित की है।
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बीएंडआर विभाग की तरफ से डाबड़ा माइनर पर तोशाम रोड से राजगढ़ रोड तक सड़क का निर्माण किया जाना है। चूंकि इस जमीन पर काफी जगह कब्जे हो रखे हैं तो सिंचाई विभाग ने पैमाइश करवाकर कब्जाधारियों को चिह्नित किया। इसके बाद कब्जा हटाने के लिए नोटिस जारी किए गए। विभाग ने अतिक्रमणकारियों को दो बार नोटिस दिए है। दूसरे नोटिस की अंतिम तिथि 16 जून थी।
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लोग बोले-50-60 साल पहले बने थे मकान
एसडीएम कोर्ट में बचाव पक्ष की तरफ से एडवोकेट अनुज गुप्ता, अभिषेक अग्रवाल, मनोज सैनी, अपूर्व गुप्ता, सचिन चुघ, विकास चौधरी, प्रदीप बाजिया व राजपाल मालिक कोर्ट में पेश हुए। सभी इन केस में सिविल कोर्ट से मिले स्टे की कॉपी भी प्रस्तुत की। वकीलों ने कहा कि प्रभावित लोगों की ओर से अलग-अलग किए गए केस में से पांच में स्टे मिला हुआ है, जिनकी सुनवाई की अलग-अलग तारीखें मिली हुई हैं। लोगों का कहना था कि वे 50-60 साल पहले बने मकानों को कब्जा कहकर तोड़ने के आदेश सही नहीं है।
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सिंचाई विभाग ने अतिक्रम हटाने की कार्रवाई टाली
डाबड़ा माइनर की जमीन पर किए गए कब्जों को हटाने के लिए सिंचाई विभाग को सोमवार को भी कार्रवाई करनी थी, लेकिन इसे टाल दिया गया। इस बारे में सिंचाई विभाग के एसडीओ विरेंद्र ढांडा ने बताया कि पहले सभी नोटिसधारकों की व्यक्तिगत सुनवाई होगी। इसके बाद कार्रवाई करने के बारे में फैसला लिया जाएगा।
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