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सुरक्षा में चूक : मिर्चपुर पीड़ितों की सिक्योरिटी दे रहे 7 गनमैन मिले गैर हाजिर

Fri, 23 Oct 2015 12:26 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला हिसार
ब्यूरो/अमर उजाला हिसार Updated Fri, 23 Oct 2015 12:26 AM IST
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फरीदाबाद के सुनपेड़ गांव में दलित परिवार के घर में आग लगाकर दो मासूमों को जिंदा जलाने के मामले के बाद जिला पुलिस प्रशासन हरकत में आया है।

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आईजी अनिल कुमार राव व एसपी सतेंद्र कुमार गुप्ता की टीम ने हिसार स्थित तंवर फार्म हाउस पर रह रहे पीड़ित परिवारों की सिक्योरिटी का बुधवार देर रात औचक निरीक्षण किया। टीम को मिर्चपुर पीड़ितों की सुरक्षा में चूक मिली। मौके पर 11 जवानों में से 7 गनमैन गैर हाजिर मिले।
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आईजी स्टाफ इंचार्ज जीत बेनीवाल व एसपी की टीम के इंस्पेक्टर ललित कुमार ने सातों जवानों की गैर हाजिरी लगाकर मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों को दी है। वहीं नारनौंद थाना इंचार्ज ने मिर्चपुर गांव का दौरा कर वहां की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि वहां व्यवस्था सही मिली।
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गनमैन की लापरवाही से जा चुकी हैं हिसार में भी जान
आम लोगों की सुरक्षा कर रहे गनमैन का ऐसा ही हाल है। फरीदाबाद का यह कोई पहला मामला नहीं है जब पुलिस सिक्योरिटी ने लापरवाही की है।

हाल ही में हिसार में भी दो मामले सामने आए हैं जिसमें एक बालसमंद निवासी दीप्पी की हत्या कर दी गई थी। दीप्पी को सिक्योरिटी मिली हुई थी मगर हत्या के दौरान गनमैन मौके से गायब था।

ठीक ऐसा ही हाल गांव काजला में हुआ। काजला गांव के डाकिए पवन की हत्या के बाद उसके बेटे व पत्नी को गनमैन दिया हुआ था।

14 अक्तूबर को उनका गनमैन बिना बताए कहीं चला गया और पीछे से बदमाशों ने उनके घर फायरिंग कर दी और हत्या मामले में गवाही न देने की धमकी दी। हालांकि दोनों की जान बच गई। एसपी ने इस मामले में गनमैन राम बिलास सहित दो पुलिस कर्मियों को सस्पेंड कर दिया।

गांव से पलायन कर तंवर फार्म पर रह रहे हैं पीड़ित परिवार
मिर्चपुर कांड के बाद दो समुदायों के बीच जातीय तनाव बढ़ गया था। पीड़ित परिवारों सहित गांव के एक समुदाय के लोग गांव से पलायन कर गए और हिसार स्थित वेदपाल तंवर फार्म हाउस पर आकर रहने लगे। तभी से करीब 100 परिवार तंवर फार्म हाउस पर रह रहे हैं। इन परिवारों को पुलिस ने सुरक्षा मुहैया करवाई हुई है। गांव में आज भी सीआरपीएफ तैनात है।


यह था मिर्चपुर कांड
21 अप्रैल 2010 को एक समुदाय के लोगों ने वाल्मीकि समुदाय के घरों पर हमला कर ताराचंद (70) और शारीरिक रूप से अक्षम उसकी 18 साल की बेटी सुमन की जिंदा जलाकर हत्या कर दी थी।

अदालत इस मामले के 97 आरोपियों में से 82 को सबूत के अभाव में पहले ही बरी कर चुकी है। कोर्ट ने इस मामले में 15 लोगों को दोषी करार दिया था। इसमें से तीन को उम्रकैद सहित कुछ को सजा व दंडित किया गया है।

औचक निरीक्षण किया गया है। 7 जवान गैर हाजिर मिले हैं उनके खिलाफ एक्शन लिया जाएगा। यह अभियान लगातार जारी रहेगा सुरक्षा में लगे जवानों की ड्यूटियां चेक की जाएगी। लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं होगी। - सतेंद्र कुमार गुप्ता, एसपी हिसार

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