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Hisar News: पर्वतारोही मीनू को कल्पना चावला शौर्य सम्मान, बाला को मिलेगा इंदिरा गांधी महिला शक्ति अवाॅर्ड

Sat, 08 Mar 2025 12:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार Updated Sat, 08 Mar 2025 12:38 AM IST
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CM Naib Saini will honor women in Panchkula today
हिसार निवासी मीनू कालीरामन।
हिसार। वर्ष 2023 में माउंट एवरेस्ट फतह कर चुकी डाटा गांव की बेटी एवं पर्वतारोही मीनू कालीरामन ने विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी। 2021 में अपने अभियान की शुरुआत की तो माता-पिता ने बाहर भेजने से मना कर दिया। मगर मीनू अपने सपनों को पूरा करने के लिए जिद पर अड़ गई। शुरुआती दौर में छोटी चोटियों को फतह करने में कामयाब हुई तो माता-पिता ने भी उसका साथ देना शुरू कर दिया। 2023 में मीनू माउंट एवरेस्ट फतह करने निकली तो मां निर्मल ने कहा, बेटी या तो तिरंगा फहराना या फिर लिपट कर आना। 17 मई को माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराया तो माता-पिता की आंखों से खुशी के आंसू झलक पड़े। शनिवार को पंचकूला में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मीनू को कल्पना चावला शौर्य अवार्ड से सम्मानित करेंगे। मीनू के साथ पिता कृष्ण कालीरामन भी जाएंगे। मीनू ने बताया उसका सपना सभी सात महाद्वीपों की चोटियों को फतह करना है। जल्द अभियान की शुरुआत करेगी। सरकार से अवार्ड मिलने का पता चला तो बहुत खुशी हुई। हाल ही में मीनू को शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने हाई रेंज बुक आफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में सम्मानित किया है। मीनू अब तक माउंट किलिमंजारो, माउंट मेरा पीक, माउंट फ्रेंडशिप पीक, माउंट युनाम पीक सहित अन्य चोटियों को फतह कर चुकी हैं।
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मानसिक बीमार महिलाओं का सहारा बनीं बाला
आजाद नगर का भाग्यश्री आश्रम मानसिक दिव्यांग महिलाओं को न केवल सहारा दे रहा है बल्कि उनका इलाज करवाकर परिवार से भी मिलवा रहा है। आश्रम अब तक अलग अलग राज्यों की 170 महिलाओं को परिवार से मिलवा चुका है। आश्रम संचालिका बाला वर्मा ने बताया कि चार साल पहले भाई बलवान के साथ मिलकर यह आश्रम शुरू किया था। इस आश्रम में 57 मानसिक बीमार महिलाएं रह रही हैं। बाला ने बताया कि इस तरह की महिलाओं को सहारा देने की लिए उनकी टीम 24 घंटे तैयार रहती है। महिलाओं को आश्रम में लाने के लिए जाते हैं तो उनकी हालत बेहद खराब होती है। सिर में कीड़े तक पड़ जाते हैं। शरीर पर जगह-जगह संक्रमण हो जाता है। आश्रम में आने के बाद पूरी केयर की जाती है। बाला बताती हैं कि वह बचपन से ही परिवार के सदस्यों के साथ आश्रम में जाती थी। वहां यही सुनने को मिलता था कि हमेशा अच्छा करना चाहिए और किसी भी व्यक्ति का मन नहीं दुखाना चाहिए। यहीं से कुछ अच्छा करने की ठानी और फिर छह सदस्य टीम बनाकर आश्रम खोल दिया। जहां से भी सूचना मिलती है, एक कॉल पर टीम मौके पर पहुंच जाती है और मानसिक बीमार महिलाओं को आश्रम में लाकर सेवा करती हैं। टीम में माता भुला देवी, विक्रम लोरा, मंजू बाला, बलवान सिंह और महाबीर व सुमन गुप्ता शामिल हैं।
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