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पराली जलाने और पटाखों से शहर की वायु गुणवत्ता ‘गंभीर’
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शहर में छाया स्मॉग।
- फोटो : Hisar
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हिसार। दिवाली वाले दिन शहर में प्रदूषण का स्तर गंभीर श्रेणी में पहुंच गया। हालात यह रहे कि वीरवार शाम चार बजे एक्यूआई अपने सर्वाधिक स्तर 452 पर जा पहुंचा। यही नहीं शुक्रवार को एक्यूआई का आंकड़ा 400 से नीचे नहीं ही आया। शहरवासी जहरीले वातावरण में सांस लेने को मजबूर हैं। वहीं, पराली जलाने में फतेहाबाद जिला प्रदेश में सबसे आगे है। शुक्रवार को प्रदेश में 331 जगह पर पराली जलाने की घटनाओं में अकेले फतेहाबाद में 92 लोकेशन मिली हैं। हालांकि हिसार जिले में पराली जलाने पर काफी हद तक रोक लगी है। हिसार में शुक्रवार को पराली जलाने पर 4 केस दर्ज किए गए। इस साल हिसार में अब तक केवल 28 स्थानों पर पराली को जलाया गया है।
उधर, प्रतिबंध के बावजूद आधी रात तक आतिशबाजी हुई। आतिशबाजी को लेकर किसी भी तरह की सख्ती दिखाई नहीं दी। हालांकि कुछ जगहों पर पुलिस ने वीडियो बनाकर औपचारिकता निभाई। बता दें कि कुछ दिनों से शहर में प्रदूषण की स्थिति खराब बनी हुई है। मगर पिछले दो दिनों से स्थिति ज्यादा खराब हो रखी है। जिला प्रशासन की तरफ से इस बार दिवाली पर होने वाली आतिशबाजी पर रोक लगाई हुई थी। प्रशासन का तर्क था कि चूंकि पहले से ही प्रदूषण काफी ज्यादा है। ऐसे में आतिशबाजी होने से स्थिति और ज्यादा खराब हो सकती है। हालांकि इस रोक का कोई असर नजर नहीं दिखा।
इस तरह से बढ़ा प्रदूषण का स्तर
दिन समय एक्यूआई स्थिति
बुधवार रात 9 बजे 305 बहुत खराब
वीरवार सुबह 6 बजे 403 गंभीर
दोपहर 12 बजे 441 गंभीर
शाम 4 बजे 452 गंभीर
रात 8 बजे 434 गंभीर
रात 10 बजे 441 गंभीर
रात 12 बजे 342 बहुत खराब
शुक्रवार रात 1 बजे 438 गंभीर
सुबह 6 बजे 430 गंभीर
सुबह 9 बजे 421 गंभीर
दोपहर 12 बजे 418 गंभीर
शाम 5 बजे 411 गंभीर
रात 8 बजे 418 गंभीर
कम तापमान और हवा में नमी से बढ़ी परेशानी
पर्यावरणविद प्रो. नरसिंह बिश्नोई के अनुसार वर्तमान में शहर में प्रदूषण की जो स्थिति बनी हुई है, उसका कारण गाड़ियों का धुआं, कूड़े का जलना, आतिशबाजी व निर्माण कार्य है। चूंकि इस समय तापमान कम है और हवा में नमी है तो इन कारणों से पैदा हुईं जहरीली गैसें व धूलकण वातावरण से बाहर नहीं जा पा रहे हैं और नमी के साथ मिल जाते हैं। इसी वजह से स्मॉग पैदा होती है। इस समय वातावरण में कार्बन डाई ऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड, सल्फर डाई ऑक्साइड व नाईट्रोजन ऑक्साइड जैसी जहरीली गैंसें मौजूद हैं। इसके अलावा इतने छोटे धूलकण हैं, जो सांस के साथ हमारे शरीर में प्रवेश कर जाते हैं और हमारी सांस की नली से चिपक जाते हैं। सिर्फ बारिश व तेज हवा ही इससे छुटकारा दिला सकती है।
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उधर, प्रतिबंध के बावजूद आधी रात तक आतिशबाजी हुई। आतिशबाजी को लेकर किसी भी तरह की सख्ती दिखाई नहीं दी। हालांकि कुछ जगहों पर पुलिस ने वीडियो बनाकर औपचारिकता निभाई। बता दें कि कुछ दिनों से शहर में प्रदूषण की स्थिति खराब बनी हुई है। मगर पिछले दो दिनों से स्थिति ज्यादा खराब हो रखी है। जिला प्रशासन की तरफ से इस बार दिवाली पर होने वाली आतिशबाजी पर रोक लगाई हुई थी। प्रशासन का तर्क था कि चूंकि पहले से ही प्रदूषण काफी ज्यादा है। ऐसे में आतिशबाजी होने से स्थिति और ज्यादा खराब हो सकती है। हालांकि इस रोक का कोई असर नजर नहीं दिखा।
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इस तरह से बढ़ा प्रदूषण का स्तर
दिन समय एक्यूआई स्थिति
बुधवार रात 9 बजे 305 बहुत खराब
वीरवार सुबह 6 बजे 403 गंभीर
दोपहर 12 बजे 441 गंभीर
शाम 4 बजे 452 गंभीर
रात 8 बजे 434 गंभीर
रात 10 बजे 441 गंभीर
रात 12 बजे 342 बहुत खराब
शुक्रवार रात 1 बजे 438 गंभीर
सुबह 6 बजे 430 गंभीर
सुबह 9 बजे 421 गंभीर
दोपहर 12 बजे 418 गंभीर
शाम 5 बजे 411 गंभीर
रात 8 बजे 418 गंभीर
कम तापमान और हवा में नमी से बढ़ी परेशानी
पर्यावरणविद प्रो. नरसिंह बिश्नोई के अनुसार वर्तमान में शहर में प्रदूषण की जो स्थिति बनी हुई है, उसका कारण गाड़ियों का धुआं, कूड़े का जलना, आतिशबाजी व निर्माण कार्य है। चूंकि इस समय तापमान कम है और हवा में नमी है तो इन कारणों से पैदा हुईं जहरीली गैसें व धूलकण वातावरण से बाहर नहीं जा पा रहे हैं और नमी के साथ मिल जाते हैं। इसी वजह से स्मॉग पैदा होती है। इस समय वातावरण में कार्बन डाई ऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड, सल्फर डाई ऑक्साइड व नाईट्रोजन ऑक्साइड जैसी जहरीली गैंसें मौजूद हैं। इसके अलावा इतने छोटे धूलकण हैं, जो सांस के साथ हमारे शरीर में प्रवेश कर जाते हैं और हमारी सांस की नली से चिपक जाते हैं। सिर्फ बारिश व तेज हवा ही इससे छुटकारा दिला सकती है।
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