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Hisar News: शहरवासियों को मिलेगा साफ पेयजल, बूस्टिंग स्टेशनों पर लगेंगे क्लोरीन गैस डोजर
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हांसी डडल पार्क स्थित बूस्टिंग स्टेशन।
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हांसी। शहर के लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए 14 बूस्टिंग स्टेशनों पर अब ऑटोमेटिक क्लोरीन गैस डोजर लगाए जाएंगे। इससे पेयजल सप्लाई में गैस के रूप में क्लोरीन ऑटोमेटिक तरीके से मिलाते हुए लोगों को शुद्ध पेयजल आपूर्ति की जाएगी। यह डोजर खुद तय करेंगे की पानी को साफ करने के लिए कितनी क्लोरीन की जरूरत है।
शहर के लोगों को आपूर्ति किए जाने वाले पेयजल को क्लोरीन से साफ करने की सुविधा अभी केवल जलघरों में है। शहर में दो जलघर हैं नया व पुराना। इन दोनों जलघरों से पानी क्लोरीन से साफ करके सीधा बूस्टिंग स्टेशन में आता है। इसके बाद पानी घरों में सप्लाई होता है। क्लोरीन से पानी 48 घंटे तक साफ रहता है। लेकिन कई बार तकनीकी खामियों के कारण बूस्टिंग स्टेशन में पानी कई दिनों तक भरा रहता है। कई बार लीकेज के कारण भी बूस्टिंग स्टेशन तक आने वाले पानी में गंदगी मिल जाती है। इस समस्या को देखते हुए जनस्वास्थ्य विभाग ने सभी बूस्टिंग स्टेशनों पर क्लोरीन गैस डोजर लगाने की योजना बनाई है। ताकी पानी को अच्छे से साफ किया जा सके। इसके लिए बीते महीने प्रशासनिक अनुमति मांगी गई थी। अनुमति मिलने के बाद विभाग ने टेंडर लगाया है। टेंडर को आगामी दिनों में खोला जाएगा।
मोटर के पास लगेंगे गैस डोजर
बूस्टिंग स्टेशन में क्लोरीन गैस डोजर मोटरों के पास लगेंगे। इससे पानी में गैस के रूप में क्लोरीन मिक्स होगी। जो पानी को साफ करेगी। बता दें शहर में बूस्टिंग स्टेशनों पर इससे पहले क्लोरीन डोजर नहीं थे।
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कंपनी को पांच वर्ष तक करनी होगी देखरेख
जनस्वास्थ्य विभाग ने क्लोरीन डोजर के लिए टेंडर लगा दिया है। कंपनी को सभी बूस्टिंग स्टेशन पर यह डोजर लगाने होंगे। एक वर्ष में यह डोजर लगाने होंगे। इसमें पहले तीन महीने का समय ट्रायल पीरियड होगा। इसमें देखा जाएगा कि डोजर सही से काम कर रहे हैं या नहीं। उसके बाद पांच वर्ष तक कंपनी को इनकी देखरेख करनी होगी।
मशीन खुद तय करेगी कितनी क्लोरीन मिलानी है
बूस्टिंग स्टेशनों पर लगने वाले डोजर में लगी मशीन पानी की खुद जांच कर लेगी। मशीन तय करेगी कि पानी को कितनी क्लोरीन की जरूरत है और उसी आधार पर पानी में क्लोरीन की मात्रा की आपूर्ति की जाएगी। इसमें मैनुअल गैस मिलाने का झंझट भी नहीं होगा।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -शहरवासियों को स्वच्छ पेयजल मिले इसके लिए हमने बूस्टिंग स्टेशन पर डोजर लगाने की योजना बनाई है। डोजर के लिए टेंडर लगा दिया है। जल्द ही काम शुरू करवाया जाएगा।
- विक्रम, जेई, जनस्वास्थ्य विभाग
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शहर के लोगों को आपूर्ति किए जाने वाले पेयजल को क्लोरीन से साफ करने की सुविधा अभी केवल जलघरों में है। शहर में दो जलघर हैं नया व पुराना। इन दोनों जलघरों से पानी क्लोरीन से साफ करके सीधा बूस्टिंग स्टेशन में आता है। इसके बाद पानी घरों में सप्लाई होता है। क्लोरीन से पानी 48 घंटे तक साफ रहता है। लेकिन कई बार तकनीकी खामियों के कारण बूस्टिंग स्टेशन में पानी कई दिनों तक भरा रहता है। कई बार लीकेज के कारण भी बूस्टिंग स्टेशन तक आने वाले पानी में गंदगी मिल जाती है। इस समस्या को देखते हुए जनस्वास्थ्य विभाग ने सभी बूस्टिंग स्टेशनों पर क्लोरीन गैस डोजर लगाने की योजना बनाई है। ताकी पानी को अच्छे से साफ किया जा सके। इसके लिए बीते महीने प्रशासनिक अनुमति मांगी गई थी। अनुमति मिलने के बाद विभाग ने टेंडर लगाया है। टेंडर को आगामी दिनों में खोला जाएगा।
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मोटर के पास लगेंगे गैस डोजर
बूस्टिंग स्टेशन में क्लोरीन गैस डोजर मोटरों के पास लगेंगे। इससे पानी में गैस के रूप में क्लोरीन मिक्स होगी। जो पानी को साफ करेगी। बता दें शहर में बूस्टिंग स्टेशनों पर इससे पहले क्लोरीन डोजर नहीं थे।
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कंपनी को पांच वर्ष तक करनी होगी देखरेख
जनस्वास्थ्य विभाग ने क्लोरीन डोजर के लिए टेंडर लगा दिया है। कंपनी को सभी बूस्टिंग स्टेशन पर यह डोजर लगाने होंगे। एक वर्ष में यह डोजर लगाने होंगे। इसमें पहले तीन महीने का समय ट्रायल पीरियड होगा। इसमें देखा जाएगा कि डोजर सही से काम कर रहे हैं या नहीं। उसके बाद पांच वर्ष तक कंपनी को इनकी देखरेख करनी होगी।
मशीन खुद तय करेगी कितनी क्लोरीन मिलानी है
बूस्टिंग स्टेशनों पर लगने वाले डोजर में लगी मशीन पानी की खुद जांच कर लेगी। मशीन तय करेगी कि पानी को कितनी क्लोरीन की जरूरत है और उसी आधार पर पानी में क्लोरीन की मात्रा की आपूर्ति की जाएगी। इसमें मैनुअल गैस मिलाने का झंझट भी नहीं होगा।
- विक्रम, जेई, जनस्वास्थ्य विभाग