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वेलोड्रोम नहीं होने पर हाईवे पर अभ्यास कर रहे शहर के साइक्लिस्ट
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हिसार। जिले के खिलाड़ी आज अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बना चुके हैं। बावजूद इसके कुछ खेल ऐसे हैं, जिनके खिलाड़ियों को आज तक सुविधाएं नहीं मिल सकी हैं। लॉकडाउन के बाद साइक्लिंग का क्रेज बढ़ा है। वहीं, कई खिलाड़ी साइक्लिंग में करिअर बनाने के लिए अभ्यास कर रहे हैं, लेकिन जिले में वेलोड्रोम (साइकिल रेसिंग के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला ट्रैक) नहीं होने से खिलाड़ी चंडीगढ़ हाईवे पर अभ्यास करने को मजबूर हैं। वहीं, खेल विभाग हादसे के बाद भी नहीं जागा है।
याद रहे कि करीब दो साल पहले रोड पर साइक्लिंग का अभ्यास कर रहे नेशनल खिलाड़ी विनोद की सड़क हादसे में मौत हो गई थी। आज भी खिलाड़ी भय के माहौल में आम सड़कों से लेकर हाईवे तक पर प्रैक्टिस कर रहे हैं। उनका कहना है कि प्रैक्टिस के दौरान डर बना रहता है कि पीछे से कोई टक्कर न मार दे। कई बार खिलाड़ियों की ओर से वेलोड्रोम बनाने की मांग की जा चुकी है। खिलाड़ियों का कहना है कि जब तक हमें सुविधा ही नहीं मिलेगी तब तक हम कैसे पदक जीत पाएंगे।
प्रभुवाला गांव में बना है सेंटर
खेल विभाग की ओर से जिले के गांव प्रभुवाला में सेंटर बनाया हुआ है, लेकिन वहां वेलोड्रोम की सुविधा नहीं है। इस मैदान में सिर्फ खिलाड़ी वार्मअप, दौड़ सहित अन्य गतिविधियां ही कर पाते हैं। खिलाड़ियों का कहना है कि एक साइक्लिंग खिलाड़ी के लिए वेलोड्रोम होना बहुत जरूरी है। प्रभुवाला में 20 खिलाड़ी साइक्लिंग का अभ्यास करते हैं। इनमें स्टेट से लेकर नेशनल खिलाड़ी शामिल हैं।
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सात साल से साइक्लिंग की प्रैक्टिस कर रहा हूं, लेकिन आज तक विभाग की ओर से हमें वेलोड्रोम की सुविधा नहीं मिल पाई है। प्रैक्टिस के समय कभी भी हादसे का शिकार हो सकते हैं। - राजेश कुमार, नेशनल मेडलिस्ट
हाईवे पर प्रैक्टिस के समय काफी डर लगता है। अलसुबह से ही हाईवे पर छोटे से लेकर बड़े वाहनों का आवागमन शुरू हो जाता है। कभी भी पीछे से कोई टक्कर मार सकता है। खिलाड़ियों को सुविधा देने के लिए जल्द वेलोड्रोम बनाया जाए। - सौरव, नेशनल खिलाड़ी
मैं चार बार नेशनल खेल चुकी हूं, लेकिन अभी तक पदक नहीं जीत पाई। कहीं न कहीं हर बार खेल सुविधाओं की कमी खलती है। यदि अभ्यास के लिए वेलोड्रोम की सुविधा मिल जाए तो बेहतर प्रदर्शन कर पदक जीतने की उम्मीद बढ़ जाएगी। - प्रियंका, नेशनल खिलाड़ी
वेलोड्रोम की सुविधा नहीं होने के कारण खिलाड़ी चंडीगढ़ हाईवे पर प्रैक्टिस कर रहे हैं। प्रैक्टिस के समय खिलाड़ियों में भय बना रहता है। खिलाड़ियों की सुविधाओं को देखते हुए जिले में जल्द वेलोड्रोम बनवाया जाए। - हैप्पी असीजा, कोच, साइक्लिंग
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याद रहे कि करीब दो साल पहले रोड पर साइक्लिंग का अभ्यास कर रहे नेशनल खिलाड़ी विनोद की सड़क हादसे में मौत हो गई थी। आज भी खिलाड़ी भय के माहौल में आम सड़कों से लेकर हाईवे तक पर प्रैक्टिस कर रहे हैं। उनका कहना है कि प्रैक्टिस के दौरान डर बना रहता है कि पीछे से कोई टक्कर न मार दे। कई बार खिलाड़ियों की ओर से वेलोड्रोम बनाने की मांग की जा चुकी है। खिलाड़ियों का कहना है कि जब तक हमें सुविधा ही नहीं मिलेगी तब तक हम कैसे पदक जीत पाएंगे।
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प्रभुवाला गांव में बना है सेंटर
खेल विभाग की ओर से जिले के गांव प्रभुवाला में सेंटर बनाया हुआ है, लेकिन वहां वेलोड्रोम की सुविधा नहीं है। इस मैदान में सिर्फ खिलाड़ी वार्मअप, दौड़ सहित अन्य गतिविधियां ही कर पाते हैं। खिलाड़ियों का कहना है कि एक साइक्लिंग खिलाड़ी के लिए वेलोड्रोम होना बहुत जरूरी है। प्रभुवाला में 20 खिलाड़ी साइक्लिंग का अभ्यास करते हैं। इनमें स्टेट से लेकर नेशनल खिलाड़ी शामिल हैं।
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सात साल से साइक्लिंग की प्रैक्टिस कर रहा हूं, लेकिन आज तक विभाग की ओर से हमें वेलोड्रोम की सुविधा नहीं मिल पाई है। प्रैक्टिस के समय कभी भी हादसे का शिकार हो सकते हैं। - राजेश कुमार, नेशनल मेडलिस्ट
हाईवे पर प्रैक्टिस के समय काफी डर लगता है। अलसुबह से ही हाईवे पर छोटे से लेकर बड़े वाहनों का आवागमन शुरू हो जाता है। कभी भी पीछे से कोई टक्कर मार सकता है। खिलाड़ियों को सुविधा देने के लिए जल्द वेलोड्रोम बनाया जाए। - सौरव, नेशनल खिलाड़ी
मैं चार बार नेशनल खेल चुकी हूं, लेकिन अभी तक पदक नहीं जीत पाई। कहीं न कहीं हर बार खेल सुविधाओं की कमी खलती है। यदि अभ्यास के लिए वेलोड्रोम की सुविधा मिल जाए तो बेहतर प्रदर्शन कर पदक जीतने की उम्मीद बढ़ जाएगी। - प्रियंका, नेशनल खिलाड़ी
वेलोड्रोम की सुविधा नहीं होने के कारण खिलाड़ी चंडीगढ़ हाईवे पर प्रैक्टिस कर रहे हैं। प्रैक्टिस के समय खिलाड़ियों में भय बना रहता है। खिलाड़ियों की सुविधाओं को देखते हुए जिले में जल्द वेलोड्रोम बनवाया जाए। - हैप्पी असीजा, कोच, साइक्लिंग