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हादसों को न्योता दे रहीं रोडवेज की किमी स्कीम की बसें
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हिसार। रोडवेज के बेड़े में शामिल किलोमीटर स्कीम की बसें सड़क पर बेरोकटोक और बेतरतीब दौड़ रही हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इन बसों से कई हादसे हो चुके हैं। इसके बावजूद विभाग के उच्चाधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे। आलम यह है कि विभाग इन हादसों की जिम्मेदारी लेने से कतरा रहा है। वहीं, मामले में हरियाणा रोडवेज विभाग के डीजी वीरेंद्र दहिया का कहना है कि वह अब इन बसों के हादसों की जानकारी लेंगे और जांच करवाएंगे।
विभाग के अधिकारी यह कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं कि ये ट्रांसपोर्ट की बसें हैं। ट्रांसपोर्ट का मालिक ही इसका जिम्मेदार है। परिवहन विभाग ने यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने के उद्देश्य से इन बसों को सड़कों पर उतारा था। ये बसें जब से सड़कों पर उतरी उसके बाद कई हादसों को अंजाम दे चुकी हैं। रोडवेज कर्मियों का कहना है कि इन बसों के चालक को बिना किसी प्रशिक्षण के बसों की कमान दे दी जाती है। हालांकि डीजी का कहना है कि उनका डग टेस्ट होता है।
किलोमीटर स्कीम की बसों से हो चुके हादसे
- 5 अक्तूबर को हिसार डिपो की किलोमीटर स्कीम की बस नरवाना में बाइपास पर एक ट्राले से टकराई थी। करीब 40 सवारियों से भरी इस बस में करीब 35 लोगों को चोट आई थी। हादसे में रोडवेज के पूर्व कर्मचारी की मौत हुई थी। चार-पांच यात्री पीजीआई तो चार-पांच अग्रोहा मेडिकल कॉलेज रेफर किए गए थे।
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- जुलाई में अंबाला-हिसार हाइवे पर कुरुक्षेत्र के इस्माइलाबाद के पास भिवानी डिपो की किलोमीटर स्कीम की 60 सवारियों से भरी बस पलटी थी। 22 सवारियों को चोट पहुंची थी।
- हिसार डिपो की ही किलोमीटर स्कीम की बस दिसंबर 2020 को गुरुग्राम में मुंढाल के पास एक ट्रैक्टर- ट्रॉली से टकराई थी। हालांकि इस हादसे में परिचालक को ही चोट आई थी।
- दिसंबर 2020 को ही हिसार डिपो की किलोमीटर स्कीम की बस हिसार में एयरपोर्ट के पास पलट गई थी। उस दौरान भी चालक बस को तेज गति से चला रहा था। हादसे में 20 से 25 सवारियां घायल हुई थी। उल्लेखनीय है कि इसके अलावा भी किलोमीटर स्कीम की बसों के चालक कई हादसों को अंजाम दे चुके हैं।
नहीं दी जा रही ट्रेनिंग
रोडवेज कर्मचारी ने बताया कि रोडवेज में चालक की भर्ती निकलती है तो उस व्यक्ति के पास तीन वर्ष का अनुभव प्रमाण पत्र होता है। भर्ती होने के बाद उस चालक का रोड टेस्ट, डग टेस्ट व बैक अट्ठा टेस्ट होता है। 35 दिन के ये ट्रेनिंग होती है। उसके बाद एक महीने तक उस चालक को उसकी इच्छा अनुसार ही रूट पर भेजा जाता है। रोडवेज कर्मियों का आरोप है कि किलोमीटर स्कीम बसों वालों को किसी प्रकार की ट्रेनिंग नहीं दी जा रही।
मैं खुद छोड़ना चाहता हूं पद, नहीं हो रही सुनवाई
हरियाणा रोडवेज के लीज बस इंचार्ज सतीश सेठी ने बताया कि वह स्वयं इस पद को छोड़ना चाहते हैं। वह कई बार जीएम सहित उच्चाधिकारियों को मौखिक रूप से व लिखित में दे चुके हैं कि उन्हें इस पद से हटाकर अन्य पद दिया जाए। उनका कहना है कि उनकी सुनवाई नहीं हो रही। सतीश सेठी ने कहा कि किलोमीटर स्कीम बसों के चालकों की शिकायतें आ रही हैं, लेकिन वह कुछ नहीं कर सकते। वह उनके दस्तावेज ही चेक करते हैं। दस्तावेज के बारे में उन्होंने जानकारी देने से मना किया। इससे जाहिर है कि यहां सेटिंग का खेल चल रहा है।
हादसा हुआ तो रोडवेज नहीं जिम्मेदार
किलोमीटर स्कीम की बसें ट्रांसपोर्ट की होती हैं। ऐसे में हादसा होने पर कोई भी पीड़ित रोडवेज विभाग को दोषी नहीं ठहरा सकता। ट्रांसपोर्ट संचालक हर्जाना दे या न दें, ये उनकी इच्छा पर निर्भर रहता है। वहीं किलोमीटर स्कीम बसों के कई चालकों ने इन बसों पर लगी संतरी पट्टी को हटा दिया है। इससे लोग इन्हें रोडवेज की बस समझ रहे हैं। ये बस चालक वाहन चलाते समय मोबाइल फोन चलाते हैं। बसों में म्यूजिक सिस्टम रखवाए हुए हैं। तेज रफ्तार के कारण हादसे हो रहे हैं। ऐसे में रोडवेज अधिकारियों को शिकायत देते हैं तो उनका कहना होता है कि वह कुछ नहीं कर सकते। ये ट्रांसपोर्ट की बस हैं।
किलोमीटर स्कीम बस चालकों का डग टेस्ट होता है। इन बसों के हादसों की जानकारी ली जाएगी। मामले में जांच भी करवाई जाएगी। - वीरेंद्र दहिया, डीजी, हरियाणा रोडवेज
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विभाग के अधिकारी यह कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं कि ये ट्रांसपोर्ट की बसें हैं। ट्रांसपोर्ट का मालिक ही इसका जिम्मेदार है। परिवहन विभाग ने यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने के उद्देश्य से इन बसों को सड़कों पर उतारा था। ये बसें जब से सड़कों पर उतरी उसके बाद कई हादसों को अंजाम दे चुकी हैं। रोडवेज कर्मियों का कहना है कि इन बसों के चालक को बिना किसी प्रशिक्षण के बसों की कमान दे दी जाती है। हालांकि डीजी का कहना है कि उनका डग टेस्ट होता है।
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किलोमीटर स्कीम की बसों से हो चुके हादसे
- 5 अक्तूबर को हिसार डिपो की किलोमीटर स्कीम की बस नरवाना में बाइपास पर एक ट्राले से टकराई थी। करीब 40 सवारियों से भरी इस बस में करीब 35 लोगों को चोट आई थी। हादसे में रोडवेज के पूर्व कर्मचारी की मौत हुई थी। चार-पांच यात्री पीजीआई तो चार-पांच अग्रोहा मेडिकल कॉलेज रेफर किए गए थे।
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- जुलाई में अंबाला-हिसार हाइवे पर कुरुक्षेत्र के इस्माइलाबाद के पास भिवानी डिपो की किलोमीटर स्कीम की 60 सवारियों से भरी बस पलटी थी। 22 सवारियों को चोट पहुंची थी।
- हिसार डिपो की ही किलोमीटर स्कीम की बस दिसंबर 2020 को गुरुग्राम में मुंढाल के पास एक ट्रैक्टर- ट्रॉली से टकराई थी। हालांकि इस हादसे में परिचालक को ही चोट आई थी।
- दिसंबर 2020 को ही हिसार डिपो की किलोमीटर स्कीम की बस हिसार में एयरपोर्ट के पास पलट गई थी। उस दौरान भी चालक बस को तेज गति से चला रहा था। हादसे में 20 से 25 सवारियां घायल हुई थी। उल्लेखनीय है कि इसके अलावा भी किलोमीटर स्कीम की बसों के चालक कई हादसों को अंजाम दे चुके हैं।
नहीं दी जा रही ट्रेनिंग
रोडवेज कर्मचारी ने बताया कि रोडवेज में चालक की भर्ती निकलती है तो उस व्यक्ति के पास तीन वर्ष का अनुभव प्रमाण पत्र होता है। भर्ती होने के बाद उस चालक का रोड टेस्ट, डग टेस्ट व बैक अट्ठा टेस्ट होता है। 35 दिन के ये ट्रेनिंग होती है। उसके बाद एक महीने तक उस चालक को उसकी इच्छा अनुसार ही रूट पर भेजा जाता है। रोडवेज कर्मियों का आरोप है कि किलोमीटर स्कीम बसों वालों को किसी प्रकार की ट्रेनिंग नहीं दी जा रही।
मैं खुद छोड़ना चाहता हूं पद, नहीं हो रही सुनवाई
हरियाणा रोडवेज के लीज बस इंचार्ज सतीश सेठी ने बताया कि वह स्वयं इस पद को छोड़ना चाहते हैं। वह कई बार जीएम सहित उच्चाधिकारियों को मौखिक रूप से व लिखित में दे चुके हैं कि उन्हें इस पद से हटाकर अन्य पद दिया जाए। उनका कहना है कि उनकी सुनवाई नहीं हो रही। सतीश सेठी ने कहा कि किलोमीटर स्कीम बसों के चालकों की शिकायतें आ रही हैं, लेकिन वह कुछ नहीं कर सकते। वह उनके दस्तावेज ही चेक करते हैं। दस्तावेज के बारे में उन्होंने जानकारी देने से मना किया। इससे जाहिर है कि यहां सेटिंग का खेल चल रहा है।
हादसा हुआ तो रोडवेज नहीं जिम्मेदार
किलोमीटर स्कीम की बसें ट्रांसपोर्ट की होती हैं। ऐसे में हादसा होने पर कोई भी पीड़ित रोडवेज विभाग को दोषी नहीं ठहरा सकता। ट्रांसपोर्ट संचालक हर्जाना दे या न दें, ये उनकी इच्छा पर निर्भर रहता है। वहीं किलोमीटर स्कीम बसों के कई चालकों ने इन बसों पर लगी संतरी पट्टी को हटा दिया है। इससे लोग इन्हें रोडवेज की बस समझ रहे हैं। ये बस चालक वाहन चलाते समय मोबाइल फोन चलाते हैं। बसों में म्यूजिक सिस्टम रखवाए हुए हैं। तेज रफ्तार के कारण हादसे हो रहे हैं। ऐसे में रोडवेज अधिकारियों को शिकायत देते हैं तो उनका कहना होता है कि वह कुछ नहीं कर सकते। ये ट्रांसपोर्ट की बस हैं।
किलोमीटर स्कीम बस चालकों का डग टेस्ट होता है। इन बसों के हादसों की जानकारी ली जाएगी। मामले में जांच भी करवाई जाएगी। - वीरेंद्र दहिया, डीजी, हरियाणा रोडवेज