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Hisar News: कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ नारनौंद में निकली जागरूकता रैली, प्रदेशव्यापी अभियान के तहत 26 सितंबर को सीएम को सौंपा जाएगा सुझाव पत्र
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नारनौंद में कार्यक्रम में मौजूद आशा कार्यकर्ता।
नारनौंद। कन्या भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक कुरीति के विरुद्ध शनिवार को नारनौंद में आशा वर्कर्स यूनियन ने जागरूकता रैली निकाली। रैली अनाज मंडी से उपमंडल कार्यालय तक आयोजित की गई। यूनियन की राज्य महासचिव सुरेखा ने कहा कि राज्य में गिरता लिंगानुपात समाज के लिए गंभीर चेतावनी है। वर्ष 2015 से 2019 के बीच कुछ सुधार जरूर हुआ था, लेकिन अब आंकड़े फिर से चिंताजनक हो चले हैं। उन्होंने कहा कि यह समस्या केवल तकनीकी नहीं, बल्कि सामाजिक सोच से जुड़ी है, जिसमें बेटियों को आज भी दोयम दर्जे का समझा जाता है।
सर्व कर्मचारी संघ ब्लॉक अध्यक्ष मास्टर योगेंद्र माजरा ने कहा कि बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जैसे नारे तब तक अधूरे हैं, जब तक इन्हें धरातल पर लागू करने के लिए ठोस और स्थायी नीतियां नहीं बनाई जातीं। उन्होंने सरकार और स्वास्थ्य विभाग से इस दिशा में कड़े कदम उठाने की मांग की। वक्ताओं ने दहेज प्रथा, महंगी शादियाँ, और लैंगिक भेदभाव जैसी सामाजिक बुराइयों को कन्या भ्रूण हत्या की मुख्य वजह बताया। उन्होंने कहा कि आज बेटियां शिक्षा, खेल, विज्ञान, रक्षा और प्रशासन जैसे सभी क्षेत्रों में बेटों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं, फिर भी उन्हें जन्म से पहले ही खत्म कर देना अमानवीय है।
रैली के दौरान बताया गया कि जागरूकता अभियान 1 से 26 सितंबर तक प्रदेश के विभिन्न गांवों और कस्बों में चलाया जा रहा है। समापन के अवसर पर 26 सितंबर को कुरुक्षेत्र में मुख्यमंत्री को एक सुझाव पत्र सौंपा जाएगा, जिसमें इस समस्या से निपटने के लिए ठोस नीतिगत प्रस्ताव शामिल होंगे। कार्यक्रम संचालन आशा वर्कर अनीता ने किया। इस मौके पर यूनियन की राज्य उपप्रधान कमलेश, जिलाध्यक्ष सीमा, ब्लॉक अध्यक्ष प्रोमिला, चेयरमैन शमशेर कूकन, पार्षद अनिल उर्फ गोलू, डॉ. अमित श्योराण आदि माैजूद रहे।
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सर्व कर्मचारी संघ ब्लॉक अध्यक्ष मास्टर योगेंद्र माजरा ने कहा कि बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जैसे नारे तब तक अधूरे हैं, जब तक इन्हें धरातल पर लागू करने के लिए ठोस और स्थायी नीतियां नहीं बनाई जातीं। उन्होंने सरकार और स्वास्थ्य विभाग से इस दिशा में कड़े कदम उठाने की मांग की। वक्ताओं ने दहेज प्रथा, महंगी शादियाँ, और लैंगिक भेदभाव जैसी सामाजिक बुराइयों को कन्या भ्रूण हत्या की मुख्य वजह बताया। उन्होंने कहा कि आज बेटियां शिक्षा, खेल, विज्ञान, रक्षा और प्रशासन जैसे सभी क्षेत्रों में बेटों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं, फिर भी उन्हें जन्म से पहले ही खत्म कर देना अमानवीय है।
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रैली के दौरान बताया गया कि जागरूकता अभियान 1 से 26 सितंबर तक प्रदेश के विभिन्न गांवों और कस्बों में चलाया जा रहा है। समापन के अवसर पर 26 सितंबर को कुरुक्षेत्र में मुख्यमंत्री को एक सुझाव पत्र सौंपा जाएगा, जिसमें इस समस्या से निपटने के लिए ठोस नीतिगत प्रस्ताव शामिल होंगे। कार्यक्रम संचालन आशा वर्कर अनीता ने किया। इस मौके पर यूनियन की राज्य उपप्रधान कमलेश, जिलाध्यक्ष सीमा, ब्लॉक अध्यक्ष प्रोमिला, चेयरमैन शमशेर कूकन, पार्षद अनिल उर्फ गोलू, डॉ. अमित श्योराण आदि माैजूद रहे।
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