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हिसारः 5 साल पुराने मामले में जाट नेता यशपाल मलिक, दलबीर किरमारा सहित कई लोग बरी
Fri, 05 Jul 2019 01:32 AM IST
रोहतक ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हिसार (हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हिसार (हरियाणा)
Published by: रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 05 Jul 2019 01:32 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : PTI
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वर्ष 2014 के एक मामले में जाट नेता यशपाल मलिक, रोडवेज कर्मी यूनियन नेता दलबीर किरमारा सहित अनेक लोगों को बरी कर दिया गया, जबकि इसी मामले से जुड़े 10 लोगों को अदालत भगौड़ा घोषित कर चुकी है। जेएमआईसी जसबीर की अदालत ने चार नवंबर 2014 को सिविल लाइन थाने में दर्ज केस में वीरवार को अपना फैसला सुनाया।
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एडवोकेट विक्रम मित्तल ने बताया कि बुड़ाक व आसपास के 8-10 गांवों में पानी का संकट था। इसको लेकर सैकड़ों ग्रामीण क्रांतिमान पार्क में इकट्ठा हुए थे। आरोप था कि वे प्रदर्शन करते हुए लघु सचिवालय पहुंचे और वहां उन्होंने रास्ता ब्लॉक कर दिया था। इस संबंध में पुलिस 800-900 लोगों के खिलाफ चार नवंबर 2014 को आईपीसी की धारा 147, 149, 341 के तहत केस दर्ज किया था।
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इनमें कुछ नामजद थे, जबकि काफी लोग अज्ञात थे। केस में शामिल न होने के चलते इस मामले से जुड़े सुरेश, दारा, दलजीत, सतबीर, अनिल, संदीप, बलसिंह, बलजीत, कुलदीप, छतर सिंह को अदालत द्वारा 1 अक्तूबर 2016 को भगौड़ा घोषित करार दिया गया था।
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सुनवाई के बाद वीरवार को अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए यशपाल मलिक, दलबीर किरमारा, विरेंद्र पूनिया, कामरेड सुरेश, बलराज बिजला, कूड़ाराम नंबरदार सहित भगौड़ा घोषित लोगों को छोड़कर बाकी सभी को बरी कर दिया। एडवोकेट मित्तल के अनुसार अदालत ने माना कि मामले में पुलिस ने आरोपियों की शनाख्त परेड नहीं कराई।
इसके अलावा मामले में न तो कोई सीडी थी और न ही कोई फोटो थी। गवाहों ने अदालत में बयान दिया था कि उन्होंने आरोपियों के नाम भाषणों में सुने थे, लेकिन अदालत में किसी भी गवाह ने आरोपियों को नहीं पहचाना। इस कारण अदालत ने सुबूतों के अभाव में आरोपियों को बैनीफिट ऑफ डाउट देते हुए बरी करने के आदेश सुनाए।