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लॉकडाउन में स्टील उद्योगों में 387 करोड़ रुपये का नुकसान
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हिसार। 23 दिनों तक लगे लॉकडाउन में शहर के स्टील उद्योग को करीब 387 करोड़ रुपये के उत्पादन का नुकसान हुआ है। इस लॉकडाउन के दौरान उद्योगों का उत्पादन 30 प्रतिशत तक रह गया था। चूंकि अब सरकार की तरफ से लॉकडाउन में थोड़ी राहत देते हुए बाजारों को कुछ घंटे के लिए खोला गया है। उम्मीद है कि इससे उद्योगों को कुछ फायदा जरूर होगा।
बता दें कि हिसार में छोटी बड़ी मिलाकर करीब 100 स्टील उद्योग हैं। इन उद्योगों में गार्डर, पाइप, तार, सांचे आदि बनाए जाते हैं। यहां से माल पूरे प्रदेश सहित उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश व दिल्ली में जाता है।
ये है सालाना टर्नओवर
शहर में 100 के करीब स्टील उद्योग स्थापित हैं। हालांकि इनमें ज्यादातर लघु स्तर की इकाइयां हैं। अगर बड़ी इकाइयों की बात करें तो इनका साल भर का टर्नओवर करीब 10 हजार करोड़ रुपये का है। इसके अलावा मध्यम इकाइयों का सालाना टर्नओवर करीब 1500 करोड़ व लघु स्तर की इकाइयों का कुल सालाना टर्नओवर करीब दो हजार करोड़ रुपये का है।
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मजदूरों के पलायन व लॉकडाउन के कारण कम करना पड़ा उत्पादन
हालांकि इस बार लॉकडाउन में सरकार की तरफ से उद्योगों को बंद नहीं किया गया। मगर लॉकडाउन के भय से इन उद्योगों में कार्यरत 80 प्रतिशत तक प्रवासी मजदूर अपने घरों को पलायन कर गए। इसका ज्यादा असर लघु व मध्यम स्तर की इकाइयों पर पड़ा, जहां पहले ही मजदूरों की संख्या कम होती है। मजदूरों के न होने के कारण उद्योगों का उत्पादन कम हो गया। चूंकि लॉकडाउन में बाजार भी पूरी तरह से बंद हो गए थे, तो इन उद्योगों को मिलने वाले ऑर्डर भी बंद हो गए थे। इस कारण से भी इन्हें अपना उत्पादन कम करना पड़ा।
लॉकडाउन में उद्योगों को अपना उत्पादन काफी कम करना पड़ा। बड़ी इकाइयों को छोड़ दें तो मध्यम व लघु इकाइयों पर इसका काफी असर पड़ा। अब धीरे-धीरे स्थिति सामान्य होने लगी है। मजदूर भी अब लौटने लगे हैं।
देवेंद्र जैन, प्रधान, हिसार उद्योग संघ
लॉकडाउन में सरकार की तरफ से सुबह 7 से 12 बजे तक बाजार खोलने की अनुमति दी गई है। अगर यह समय बदलकर सुबह 9 या 10 बजे कर दिया जाए तो इसका व्यापारियों व उद्योगों दोनों को फायदा होगा।
अजय बतरा, महासचिव, हिसार उद्योग संघ
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बता दें कि हिसार में छोटी बड़ी मिलाकर करीब 100 स्टील उद्योग हैं। इन उद्योगों में गार्डर, पाइप, तार, सांचे आदि बनाए जाते हैं। यहां से माल पूरे प्रदेश सहित उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश व दिल्ली में जाता है।
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ये है सालाना टर्नओवर
शहर में 100 के करीब स्टील उद्योग स्थापित हैं। हालांकि इनमें ज्यादातर लघु स्तर की इकाइयां हैं। अगर बड़ी इकाइयों की बात करें तो इनका साल भर का टर्नओवर करीब 10 हजार करोड़ रुपये का है। इसके अलावा मध्यम इकाइयों का सालाना टर्नओवर करीब 1500 करोड़ व लघु स्तर की इकाइयों का कुल सालाना टर्नओवर करीब दो हजार करोड़ रुपये का है।
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मजदूरों के पलायन व लॉकडाउन के कारण कम करना पड़ा उत्पादन
हालांकि इस बार लॉकडाउन में सरकार की तरफ से उद्योगों को बंद नहीं किया गया। मगर लॉकडाउन के भय से इन उद्योगों में कार्यरत 80 प्रतिशत तक प्रवासी मजदूर अपने घरों को पलायन कर गए। इसका ज्यादा असर लघु व मध्यम स्तर की इकाइयों पर पड़ा, जहां पहले ही मजदूरों की संख्या कम होती है। मजदूरों के न होने के कारण उद्योगों का उत्पादन कम हो गया। चूंकि लॉकडाउन में बाजार भी पूरी तरह से बंद हो गए थे, तो इन उद्योगों को मिलने वाले ऑर्डर भी बंद हो गए थे। इस कारण से भी इन्हें अपना उत्पादन कम करना पड़ा।
लॉकडाउन में उद्योगों को अपना उत्पादन काफी कम करना पड़ा। बड़ी इकाइयों को छोड़ दें तो मध्यम व लघु इकाइयों पर इसका काफी असर पड़ा। अब धीरे-धीरे स्थिति सामान्य होने लगी है। मजदूर भी अब लौटने लगे हैं।
देवेंद्र जैन, प्रधान, हिसार उद्योग संघ
लॉकडाउन में सरकार की तरफ से सुबह 7 से 12 बजे तक बाजार खोलने की अनुमति दी गई है। अगर यह समय बदलकर सुबह 9 या 10 बजे कर दिया जाए तो इसका व्यापारियों व उद्योगों दोनों को फायदा होगा।
अजय बतरा, महासचिव, हिसार उद्योग संघ