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ट्रक चालक पिता ने लोन लेकर बेटी को दिलाया धनुष, बनी इंटरनेशनल तीरंदाज

Mon, 10 Jun 2019 12:40 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 10 Jun 2019 12:40 AM IST
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ट्रक चालक पिता ने लोन लेकर बेटी को दिलाया धनुष, बनी इंटरनेशनल तीरंदाज
हिसार। तीरंदाजी सबसे महंगा खेल है। इस खेल को चुनने के लिए खिलाड़ियों को काफी सोचना पड़ता है। मगर परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने के बावजूद भी गांव उमरा की बेटी संगीता मलिक ने हौसला नहीं टूटने दिया और तीरंदाजी क्षेत्र में आगे बढ़ने की ठान ली।
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तीरंदाजी के प्रति उसका इतना जुनून बढ़ता चला गया कि पिता राजेश ने लोन लेकर बेटी को 3 लाख रुपये का धनुष खरीदकर दिया। आज वह धनुष से निशाना साध कर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना नाम चमका रही है। संगीता की दो बहनें और एक भाई है।
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तीन साल से सरकार से नहीं मिला कैश अवॉर्ड
इंटरनेशनल खिलाड़ी संगीता का कहना है कि सरकार सिर्फ खिलाड़ियों को सुविधाएं देने के दावे करती है लेकिन धरातल पर कुछ नजर नहीं आता। तीन साल से उन्हें कैश अवॉर्ड तक नहीं मिला है। इसके चलते उन्हें काफी परेशानी भी आई। ऐसे में उन्हें लोन लेकर ही धनुष खरीदना पड़ा। संगीता का कहना है कि यदि सरकार खिलाड़ियों को समय पर कैश अवॉर्ड की राशि दे तो काफी हद तक समस्या खत्म हो सकती है। संगीता के पिता राजस्थान में ट्रांसपोर्ट में ट्रक चलाते है। मां खजानी देवी गृहिणी हैं।
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सहेली ज्योति बनी कोच
संगीता मलिक ने बातचीत में बताया कि उन्हें खेलने की प्रेरणा पड़ोस में रहने वाली सहेली ज्योति से मिली है। अब वही ज्योति कोच बनकर संगीता को तीरंदाजी की नई-नई बारीकियां सीखा रही है। अब संगीता का भी सपना है कि वह ज्योति की तरह कोच बनकर खिलाड़ियों का भविष्य संवारे। इसके लिए वह मैदान में पसीना बहा रही है। उन्हें विश्वास है कि एक दिन वह भी कोच बनकर गांव का नाम रोशन करेगी।

संगीता की उपलब्धियां
- 2017 में सब जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में भागीदारी
- 2018 में ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी में सिल्वर मेडल जीता
- 2019 में ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी में गोल्ड मेडल जीता

संगीता में काफी टैलेंट है। वह अच्छा प्रदर्शन करती है। संगीता उमरा के तीरंदाजी सेंटर में प्रेक्टिस कर इंटरनेशनल लेवल पर नाम रोशन कर रही है।
- मंजीत मलिक, कोच, उमरा तीरंदाजी सेंटर।
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