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देश की सर्वोच्च न्यायपालिका के जज बने हिसार के बेटे सूर्यकांत
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हिसार। हिसार जिले में जन्मे, पले-बढ़े और शिक्षा ग्रहण कर न्यायपालिका में पहुंचने वाले सूर्यकांत देश की सर्वोच्च न्यायपालिका जस्टिस बन गए हैं। उन्होंने अपने हिसार ही नहीं अपने गांव नारनौंद के पेटवाड़ का नाम भी रोशन किया है। वीरवार देर शाम यह खबर सुनकर गांव में खुशी की लहर दौड़ गई।
जस्टिस सूर्यकांत बेहद साधारण परिवार से निकले हैं। उनका जन्म नारनौंद कस्बे के गांव पेटवाड़ में 10 फरवरी 1962 को हुआ था। उन्होंने अपनी 10वीं कक्षा तक की पढ़ाई गांव के ही स्कूल में पूरी की। उससे आगे की शिक्षा के लिए हिसार आए और राजकीय कॉलेज से ग्रेजुएशन पूरी करके रोहतक से लॉ की डिग्री हासिल की। उनके पिता मदन गोपाल शास्त्री शिक्षक थे। परिवार में सबसे छोटे हैं और उनके तीन भाई और एक बहन हैं। सूर्यकांत को घर में पढ़ाई का अच्छा माहौल मिला। उन्होंने पारिवारिक परंपरा का निर्वहन करते हुए अंबाला की सविता देवी से अरेंज मैरिज की, जो चंडीगढ़ में लेक्चरर के पद पर रहीं। उनकी दो बेटियां भी हैं।
बेटे को उच्च पद पर देखने का था सपना
जस्टिस सूर्यकांत अक्तूबर 2018 में हिमाचल प्रदेश के चीफ जस्टिस बने थे। उस समय उनके पिता जीवित थे। अमर उजाला से तीन अक्तूबर को हुई बातचीत में मदन गोपाल शास्त्री ने बताया था कि सूर्यकांत को उच्च पद पर देखने का उसकी मां का सपना था। हालांकि उनके हिमाचल का चीफ जस्टिस बनने से पहले 27 फरवरी 2018 को उनका स्वर्गवास हो गया था। बेटे को हिमाचल का चीफ जस्टिस बनते उनकी मां नहीं देख पाईं और अब सुप्रीम कोर्ट का चीफ जस्टिस बनते उनके पिता भी नहीं देख पाए, क्योंकि उनका 9 अक्तूबर 2018 को स्वर्गवास हो गया था।
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पिता के देहांत पर गांव आए थे आखिरी बार
जस्टिस सूर्यकांत अपने पिता के देहांत पर 9 अक्तूबर 2018 को आखिरी बार अपने गांव पेटवाड़ आए थे। उनके पिता का हृदय गति रुकने से निधन हो गया था। मदन गोपाल शास्त्री ने साहित्य पर 14 पुस्तकें भी लिखी थीं। अपनी लेखनी के कारण उनको काफी बार राष्ट्रीय स्तर पर किया जा चुका था।
कविताओं का भी शौक है जस्टिस को
जस्टिस सूर्यकांत कवि हृदयी भी हैं। उन्हें कविताएं लिखने का शौक है। पढ़ाई के समय में भी वे अकसर कविताएं लिखते रहते थे और दोस्तों के बीच सुनाते थे। मंच पर मौका मिलता था तो वे अपनी भाषण कला का नमूना भी पेश करते थे। उन्होंने अनेक प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर कई पुरस्कार भी हासिल किए हैं।
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जस्टिस सूर्यकांत बेहद साधारण परिवार से निकले हैं। उनका जन्म नारनौंद कस्बे के गांव पेटवाड़ में 10 फरवरी 1962 को हुआ था। उन्होंने अपनी 10वीं कक्षा तक की पढ़ाई गांव के ही स्कूल में पूरी की। उससे आगे की शिक्षा के लिए हिसार आए और राजकीय कॉलेज से ग्रेजुएशन पूरी करके रोहतक से लॉ की डिग्री हासिल की। उनके पिता मदन गोपाल शास्त्री शिक्षक थे। परिवार में सबसे छोटे हैं और उनके तीन भाई और एक बहन हैं। सूर्यकांत को घर में पढ़ाई का अच्छा माहौल मिला। उन्होंने पारिवारिक परंपरा का निर्वहन करते हुए अंबाला की सविता देवी से अरेंज मैरिज की, जो चंडीगढ़ में लेक्चरर के पद पर रहीं। उनकी दो बेटियां भी हैं।
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बेटे को उच्च पद पर देखने का था सपना
जस्टिस सूर्यकांत अक्तूबर 2018 में हिमाचल प्रदेश के चीफ जस्टिस बने थे। उस समय उनके पिता जीवित थे। अमर उजाला से तीन अक्तूबर को हुई बातचीत में मदन गोपाल शास्त्री ने बताया था कि सूर्यकांत को उच्च पद पर देखने का उसकी मां का सपना था। हालांकि उनके हिमाचल का चीफ जस्टिस बनने से पहले 27 फरवरी 2018 को उनका स्वर्गवास हो गया था। बेटे को हिमाचल का चीफ जस्टिस बनते उनकी मां नहीं देख पाईं और अब सुप्रीम कोर्ट का चीफ जस्टिस बनते उनके पिता भी नहीं देख पाए, क्योंकि उनका 9 अक्तूबर 2018 को स्वर्गवास हो गया था।
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पिता के देहांत पर गांव आए थे आखिरी बार
जस्टिस सूर्यकांत अपने पिता के देहांत पर 9 अक्तूबर 2018 को आखिरी बार अपने गांव पेटवाड़ आए थे। उनके पिता का हृदय गति रुकने से निधन हो गया था। मदन गोपाल शास्त्री ने साहित्य पर 14 पुस्तकें भी लिखी थीं। अपनी लेखनी के कारण उनको काफी बार राष्ट्रीय स्तर पर किया जा चुका था।
कविताओं का भी शौक है जस्टिस को
जस्टिस सूर्यकांत कवि हृदयी भी हैं। उन्हें कविताएं लिखने का शौक है। पढ़ाई के समय में भी वे अकसर कविताएं लिखते रहते थे और दोस्तों के बीच सुनाते थे। मंच पर मौका मिलता था तो वे अपनी भाषण कला का नमूना भी पेश करते थे। उन्होंने अनेक प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर कई पुरस्कार भी हासिल किए हैं।