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जच्चा-बच्चा की रक्षा को जागा स्वास्थ्य विभाग
चंडीगढ़/ब्यूरो
Updated Fri, 11 Oct 2013 11:34 PM IST
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हरियाणा के सात जिलों में स्वास्थ्य सेवाओं के गिर रहे अनुपात पर विभाग ने कड़ा संज्ञान लिया है। हिसार, पलवल, मेवात, पानीपत, भिवानी, महेंद्रगढ़ और जींद जिलों में स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में हालात ज्यादा बदतर है।
मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर के मामले में हरियाणा देश में 27वें नंबर पर है। पिछले दिनों केंद्र के अधिकारी इस संबंध में दौरा भी कर चुके हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन क्षेत्रों में चिकित्सकों की तैनाती है। हिसार, पलवल, मेवात, पानीपत, भिवानी, महेंद्रगढ़ और जींद जिलों में चिकित्सक रुकते नहीं है। इसके कारण यह आंकड़ा सुधर नहीं रहा है। पंचकूला और अंबाला जैसे जिलों में चिकित्सकों की अधिक कमी नहीं है, लेकिन इन जिलों में भी स्थिति अच्छी नहीं है।
स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू करने के लिए अब स्वास्थ्य विभाग डॉक्टरों की कमी पूरा करने को आयुष विभाग के चिकित्सक लगाने की तैयारी में है। साथ ही संबंधित उपायुक्तों से भी मदद लेने की योजना है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से 50 से 70 व्यक्तियों की टीमें सभी सात जिलों में भेजी जाएंगी, जो बारीकी से सभी समस्याओं को मॉनिटर करेंगी। इस समय हरियाणा में प्रति हजार बच्चों में से 42 जन्म के बाद मर जाते हैं। मातृ मृत्यु दर के मामले में यह आंकड़ा 160 मौतें सालाना हैं। सालाना एक लाख गर्भवती महिलाओं में से 160 महिलाएं बच्चों को जन्म देने के दौरान मर जाती हैं।
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गर्भवती महिलाओं की अनदेखी की मिल रही हैं शिकायतें
प्रदेश के लगभग हर जिले से गर्भवती महिलाओं की अनदेखी करने की शिकायतें लगातार आ रही हैं। पिछले दिनों फतेहाबाद में सरकारी अस्पताल में गर्भवती को इलाज नहीं मिला और उसे मजबूरन निजी अस्पताल में जाना पड़ा। वहीं, पिछले माह फतेहाबाद में ही महिला ने अस्पताल के बाहर ही बच्चे को जन्म दे दिया था। इलाज में लापरवाही के मामलों में हाईकोर्ट भी कड़ा संज्ञान ले चुका है।
हम प्रयास कर रहे हैं कि हरियाणा को 27वें नंबर से 11वें नंबर तक ले आएं। तीन साल का समय इसके लिए तय किया गया है। नवंबर तक सभी जिलों में टीमें भेजकर सही स्थिति पता कर ली जाएगी।
- डा. राकेश गुप्ता मिशन, निदेशक , एनएचएम
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मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर के मामले में हरियाणा देश में 27वें नंबर पर है। पिछले दिनों केंद्र के अधिकारी इस संबंध में दौरा भी कर चुके हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन क्षेत्रों में चिकित्सकों की तैनाती है। हिसार, पलवल, मेवात, पानीपत, भिवानी, महेंद्रगढ़ और जींद जिलों में चिकित्सक रुकते नहीं है। इसके कारण यह आंकड़ा सुधर नहीं रहा है। पंचकूला और अंबाला जैसे जिलों में चिकित्सकों की अधिक कमी नहीं है, लेकिन इन जिलों में भी स्थिति अच्छी नहीं है।
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स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू करने के लिए अब स्वास्थ्य विभाग डॉक्टरों की कमी पूरा करने को आयुष विभाग के चिकित्सक लगाने की तैयारी में है। साथ ही संबंधित उपायुक्तों से भी मदद लेने की योजना है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से 50 से 70 व्यक्तियों की टीमें सभी सात जिलों में भेजी जाएंगी, जो बारीकी से सभी समस्याओं को मॉनिटर करेंगी। इस समय हरियाणा में प्रति हजार बच्चों में से 42 जन्म के बाद मर जाते हैं। मातृ मृत्यु दर के मामले में यह आंकड़ा 160 मौतें सालाना हैं। सालाना एक लाख गर्भवती महिलाओं में से 160 महिलाएं बच्चों को जन्म देने के दौरान मर जाती हैं।
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गर्भवती महिलाओं की अनदेखी की मिल रही हैं शिकायतें
प्रदेश के लगभग हर जिले से गर्भवती महिलाओं की अनदेखी करने की शिकायतें लगातार आ रही हैं। पिछले दिनों फतेहाबाद में सरकारी अस्पताल में गर्भवती को इलाज नहीं मिला और उसे मजबूरन निजी अस्पताल में जाना पड़ा। वहीं, पिछले माह फतेहाबाद में ही महिला ने अस्पताल के बाहर ही बच्चे को जन्म दे दिया था। इलाज में लापरवाही के मामलों में हाईकोर्ट भी कड़ा संज्ञान ले चुका है।
हम प्रयास कर रहे हैं कि हरियाणा को 27वें नंबर से 11वें नंबर तक ले आएं। तीन साल का समय इसके लिए तय किया गया है। नवंबर तक सभी जिलों में टीमें भेजकर सही स्थिति पता कर ली जाएगी।
- डा. राकेश गुप्ता मिशन, निदेशक , एनएचएम