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गेहूं की फसल पर रहेगा डबल सर्विलांस
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 03 Dec 2013 01:39 AM IST
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हरियाणा में गेहूं की फसल पर इस बार डबल सर्विलांस होगा। कृषि विभाग के साथ व्हीट रिसर्च डायरेक्टोरेट भी फसल पर निगाह रखेगा।
पिछली बार कई कारणों से गेहूं की फसल प्रभावित हुई थी, जिसमें यलो रस्ट एक बड़ा कारण था। इसके अलावा गर्मी अधिक होने से भी गेहूं का दाना छोटा रह गया था। राज्य में अभी तक 80 फीसदी गेहूं की बिजाई का काम पूरा हो गया है।
पीबीडब्ल्यू 343 की बजाए इस बार कृषि विभाग ने डीबीडब्लयू 17, डब्लयूएच 542, एचडी 2967, डीबीडब्लयू 621-50 और पीबीडब्लयू 550 आदि वैरायटी को अधिक बढ़ावा दिया है।
पिछली बार राज्य में असमय हुई बरसात, यलो रस्ट, जलभराव और तापमान बढ़ने के कारण दाना छोटा रह गया था। इन सब कारणों से प्रभावित हो कर करीब 15 से 20 लाख मीट्रिक टन फसल का नुकसान हुआ था।
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इसलिए राज्य सरकार इस बार कोई रिस्क नहीं लेना चाह रही है। इस बार हरियाणा में 25 लाख हेक्टेयर टारगेट एरिया है, जिसमें से 22 लाख दस हजार हेक्टेयर पर बिजाई हो चुकी है।
उत्पादन का लक्ष्य 123.81 लाख मीट्रिक टन है। प्रति हेक्टेयर के हिसाब से उत्पादन का यह लक्ष्य 49.52 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। जबकि पिछले वर्ष उत्पादन 111.17 लाख मीट्रिक टन रह गया था। जबकि टारगेट एरिया 24.97 लाख हेक्टेयर था।
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पिछली बार कई कारणों से गेहूं की फसल प्रभावित हुई थी, जिसमें यलो रस्ट एक बड़ा कारण था। इसके अलावा गर्मी अधिक होने से भी गेहूं का दाना छोटा रह गया था। राज्य में अभी तक 80 फीसदी गेहूं की बिजाई का काम पूरा हो गया है।
पीबीडब्ल्यू 343 की बजाए इस बार कृषि विभाग ने डीबीडब्लयू 17, डब्लयूएच 542, एचडी 2967, डीबीडब्लयू 621-50 और पीबीडब्लयू 550 आदि वैरायटी को अधिक बढ़ावा दिया है।
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पिछली बार राज्य में असमय हुई बरसात, यलो रस्ट, जलभराव और तापमान बढ़ने के कारण दाना छोटा रह गया था। इन सब कारणों से प्रभावित हो कर करीब 15 से 20 लाख मीट्रिक टन फसल का नुकसान हुआ था।
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इसलिए राज्य सरकार इस बार कोई रिस्क नहीं लेना चाह रही है। इस बार हरियाणा में 25 लाख हेक्टेयर टारगेट एरिया है, जिसमें से 22 लाख दस हजार हेक्टेयर पर बिजाई हो चुकी है।
उत्पादन का लक्ष्य 123.81 लाख मीट्रिक टन है। प्रति हेक्टेयर के हिसाब से उत्पादन का यह लक्ष्य 49.52 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। जबकि पिछले वर्ष उत्पादन 111.17 लाख मीट्रिक टन रह गया था। जबकि टारगेट एरिया 24.97 लाख हेक्टेयर था।