एस्मा लागू: स्वास्थ्य कर्मी 6 महीने नहीं कर सकेंगे हड़ताल, मुख्यमंत्री ने विशेषज्ञ कैडर पद सृजित करने को दी सैद्धांतिक मंजूरी
चिकित्सकों ने एलान किया है कि दो दिनों में मांगें नहीं मानी तो चिकित्सक 14 जनवरी शुक्रवार को इमरजेंसी सेवाएं बंद कर पूर्ण हड़ताल पर चले जाएंगे। वहीं मंत्री अनिल विज का कहना है कोरोना की रोकथाम में बाधा डालने के लिए डॉक्टरों के एक समूह द्वारा हड़ताल पर चले जाने के कारण एस्मा लगाने का कदम उठाया गया है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विस एसोसिएशन की 14 जनवरी की संभावित हड़ताल की चेतावनी को देखते हुए प्रदेश सरकार ने एस्मा (आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम) लागू कर दिया है। इसके तहत अब आगामी छह माह तक स्वास्थ्य कर्मी हड़ताल नहीं कर सकेंगे। इस संबंध में अधिसूचना भी जारी कर दी गई है।
साथ ही मुख्यमंत्री ने डाक्टरों की लंबित मांग विशेषज्ञ कैडर पद सृजित करने की सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। लेकिन एचसीएमएस ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों की फाइल वित्त विभाग से पास नहीं होगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा और 14 जनवरी से वह ड्यूटी पर न जाकर अपने घरों पर रहेंगे।
मंगलवार को हरियाणा में सरकारी अस्पतालों के डाक्टरों ने ओपीडी बंद रखी। स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा कि कोरोना समय में डाक्टरों के एक समूह ने हड़ताल पर जाने की घोषणा करके कोरोना लड़ाई में बाधा डालने का काम किया है। बातचीत करने के लिए डीएस ढेसी व राजीव अरोडा दो घंटे तक इंतजार करते रहे, एसोसिएशन को बताया गया कि उनकी मांगों को सीएम ने सेद्धांतिक मंजूरी दे दी है, लेकिन डाक्टर फिर भी नहीं माने। विज ने कहा कि कोई नई चीज करनी है तो समय भी लगता है। हमें लगता है कि इनके पीछे कोई है जो कोरोना के खिलाफ इस लड़ाई में विघन डालना चाहता है कि इसलिए हमें एस्मा लगाना पड़ा।
स्वास्थ्य संबंधित विभागों की हड़ताल प्रतिबंधित
एस्मा की अधिसूचना के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग, हरियाणा की विभिन्न संस्थाओं जैसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, आयुष में संविदा, दैनिक मजदूरी, मानदेय इत्यादि पर नियोजित व्यक्तियों सहित कार्यरत डाक्टरों या अन्य श्रेणी के कर्मचारियों द्वारा हड़ताल करना प्रतिबंधित है। हरियाणा आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम, 1974 ( 1974 का 40 ) की धारा 4-क की उपधारा ( 1 ) के तहत यह आदेश जारी किए गए हैं।
मांगों को मुख्यमंत्री की सैद्धांतिक मंजूरी की बात कही जा रही है, लेकिन इससे मांगें लागू नहीं हो जाती है। मामला वित्त विभाग में लंबित है, वहां की मंजूरी मिलने के बाद ही मांगें पूरी होंगी। एसोसिएशन सदस्य 14 जनवरी से ड्यूटी पर नहीं जाएंगे और घर पर ही रह कर हड़ताल करेंगे। मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। - डॉ. जसबीर परमार, अध्यक्ष, एचसीएमएस
मुख्यमंत्री ने विशेषज्ञ कैडर पद सृजित करने को दी सैद्धांतिक मंजूरी
चंडीगढ़। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने प्रदेश में एमडी या एमएस डॉक्टरों के लिए स्पेशलिस्ट कैडर पद सृजित करने की सैद्धांतिक मंजूरी दी है। इसके अलावा, डॉक्टरों को कोई प्रशासनिक कार्य भी नहीं दिया जाएगा और वे अपनी संबंधित विशेषता में ही अभ्यास करेंगे। सरकार विशेषज्ञों के लिए एक विशेष सब कैडर बनाएगी, जिन्हें सलाहकार या वरिष्ठ सलाहकार के रूप में नामित किया जाएगा। इससे पहले एमबीबीएस योग्यता और एमडी/एमएस योग्यता वाले डॉक्टर एक ही कैडर में होते थे।
विशेषज्ञ कैडर के रूप में डॉक्टरों को अब प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) के बजाय बड़े अस्पतालों में तैनात किया जाएगा। इससे उनकी पदोन्नति जल्दी सुनिश्चित होगी और उनकी प्रतिभा का सही सदुपयोग संभव होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान संकट की स्थिति में समाज में डॉक्टरों की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है और सरकार उनके कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।