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पांच साल हो गए, नहीं बजता जैमर

Sun, 06 Oct 2013 06:53 PM IST
मयंक तिवारी
मयंक तिवारी Updated Sun, 06 Oct 2013 06:53 PM IST
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five years, no rings jammer

गुड़गांव की माडर्न जेल भोंडसी में जैमर पांच साल से खराब है। जिस कंपनी के जैमर लगाए गए हैं, उनसे करार खत्म हो जाने के कारण इसे ठीक नहीं कराया गया। जेल में जैमर लगाने का प्रस्ताव प्रदेश सरकार के पास है। इसके हरी झंडी मिलने के बाद ही जेल में मोबाइल खेल पर विराम लग सकता है।

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माडर्न जेल भोंडसी में एक साथ 24 मोबाइल व 18 सिम कार्ड मिलने की घटना से जेल प्रशासन में हड़कंप है। जेल परिसर में पांच साल पहले रिलायंस व टाटा कंपनी की ओर से जैमर लगाया गया था। जो जैमर पहले लगा था वह भी खराब चल रहा है। जेल अधीक्षक के अनुसार जिन कंपनियों की ओर से इसे लगाया गया था। उनके साथ हुए करार का समय खत्म हो गया।
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प्रदेश की सभी जेलों में जैमर लगाने का प्रस्ताव जेल महानिदेशक की ओर से प्रदेश सरकार के पास लंबित है। इसकी मंजूरी के बाद ही इसे लगाया जाएगा। लेकिन कब मंजूरी मिलेगी, यह पता नहीं है।
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जेल अधीक्षक हरेंद्र कुमार के अनुसार, जैमर लगने के बाद जेल में मोबाइल का प्रयोग जीरो हो जाएगा। प्रशासन की ओर से पूरी तरह से सघन तलाशी ली जाती है। इसके बाद भी अगर कोई मोबाइल जेल में पहुंच रहा है तो उसके माध्यम तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।

जेल अधीक्षक ने अमर उजाला को बताया कि वह चाहते हैं कि पुलिस आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर ले। इसके बाद वह उनके मोबाइल जेल में पहुंचने के माध्यम का खुलासा करे। मोबाइल फोन जेल में पहुंचाने की भूमिका में जो भी लिप्त पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।


जेल में सुल्फा भी हो चुका है बरामद
जेल में एक बार नहीं तीन बार साल भर के भीतर सुल्फा बरामद किया जा चुका है। डिप्टी जेलर के बयान पर एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ है।

दो पर गिर चुकी है गाज
जेल में नशीला पदार्थ पहुंचाने व मोबाइल पहुंचाने में दो सुरक्षा कर्मियों पर गाज गिर चुकी है। जेल अधीक्षक के बयान पर उनके खिलाफ मामला भी दर्ज कराया जा चुका।

जेल में मोबाइल रखने पर यह है सजा
: छह माह की सजा है। सात दिन में जमानत मिलती है।

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