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हरियाणा: स्कूलों में आत्मरक्षा के गुर सीखने के साथ तनाव मुक्त होंगी छात्राएं
Sun, 07 Nov 2021 09:03 AM IST
प्रमोद कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Published by: प्रमोद कुमार
Updated Sun, 07 Nov 2021 09:03 AM IST
सार
हरियाणा के स्कूलों में आत्मरक्षा के गुर सीखने के साथ छात्राओं को अब तनावमुक्त किया जाएगा। हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद बच्चियों को भयमुक्त बनाएगी। 1084 मौलिक, 2063 सेकेंडरी स्कूलों में सोमवार से प्रशिक्षण शुरू किया जाएगा। योजना के तहत कक्षा 6 से 12 तक की छात्राओं को कवर किया जाएगा।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
हरियाणा सरकार छठी से 12वीं तक की छात्राओं को आत्मरक्षा के गुर सिखाने के साथ तनावमुक्त भी करेगी। हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद ने इसके लिए शास्त्रांग इंडियन मॉडर्न मार्शल आर्ट के साथ हाथ मिलाया है। 1084 मौलिक, 2063 वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में सोमवार से इसका प्रशिक्षण शुरू होगा। कोरोना महामारी के चलते बच्चियां मानसिक तनाव का शिकार भी हुई हैं। उन्हें आत्मरक्षा प्रशिक्षण के दौरान इससे बाहर निकालते हुए भयमुक्त बनाया जाएगा। एजेंसी के प्रशिक्षक आत्मरक्षा के गुर सिखाएंगे।
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एक समूह में होंगी 35 छात्राएं
एक समूह में 30 से 35 छात्राएं आत्मरक्षा का प्रशिक्षण लेंगी। शास्त्रांग ग्रैंडमास्टर बिक्रम एस थापा ने बताया कि आत्मरक्षा प्रशिक्षण के माध्यम से छठी से 12वीं कक्षा तक की छात्राओं को मनोवैज्ञानिक, बौद्धिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनाया जाएगा। कराटे, ताइक्वांडो, किक बॉक्सिंग, बॉक्सिंग, जीकूडो आदि सिखाएंगे। एजेंसी को हिसार, अंबाला, भिवानी, चरखी दादरी, कुरुक्षेत्र, झज्जर, जींद, कैथल, करनाल, महेंद्रगढ़, पंचकूला, पानीपत, रेवाड़ी, रोहतक, सोनीपत और यमुनानगर जिले के स्कूलों में छात्राओं को प्रशिक्षण देना है।
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रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण प्रोग्राम नाम दिया
इसे रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण प्रोग्राम का नाम दिया गया है। जिसमें छात्राओं को अचानक से सामने वाले खतरे की किसी भी स्थिति का मुकाबला करने के लिए पैन, किताब या फिर बैग से अपनी सुरक्षा करना सिखाया जाएगा। विभाग ने प्रशिक्षण के लिए पंचकूला, मुंबई और उत्तरप्रदेश की निजी कंपनियों को इसका टेंडर दिया है। प्रशिक्षण कार्यक्रम नवंबर से फरवरी तक चलेगा।
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शास्त्रांग के बारे में जानिए
इसका अर्थ है, शरीर का एक हथियार बन जाना। यह शब्द संस्कृत से लिया गया है। जहां शास्त्र का अर्थ है हथियार और अंग का अर्थ है शरीर। इसमें बताया जाता है कि प्रतिकूल स्थिति में आत्मरक्षा के लिए अपने शरीर को हथियार की तरह कैसे इस्तेमाल किया जाए।