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जवान पिता को मुखाग्नि देगा अधेड़ आयु का बेटा
रेवाड़ी/ब्यूरो
Updated Tue, 03 Sep 2013 07:37 PM IST
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ऐसा पहली बार होगा जब 52 साल का बेटा अपने 28 वर्षीय पिता को मुखाग्नि देगा। हरियाणा के मीरपुर गांव के रामचंद्र यादव के पास अपने फौजी पिता हवलदार जगमाल सिंह का शव पहुंच गया है।
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शव पिछले 45 साल से ग्लेशियर में दबा हुआ था। रामचंद्र ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि पिता की हादसे में हुई मौत के 45 साल बाद वे उनकी चिता को मुखाग्नि दे पाएंगे, लेकिन अब ऐसा होने जा रहा है।
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45 साल के बाद मंगलवार को सेना का एक दल हवलदार जगमाल सिंह का पार्थिव शरीर लेकर चंडीगढ़ पहुंच गया है।
7 फरवरी, 1968 को मीरपुर गांव के हवलदार जगमाल सिंह छुट्टी पूरी करके चंडीगढ़ से लेह जाने के लिए विमान से रवाना हुए थे। पिता की चिता को मुखाग्नि देने के लिए बेताब नायब सूबेदार रामचंद्र ने बताया कि बुधवार को सुबह 5 बजे सेना कर एक दल उनका पार्थिव शरीर लेकर रेवाड़ी के मीरपुर गांव के लिए रवाना होगा।
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गांव में हवलदार के परिजनों ने अंतिम संस्कार की तैयारियां की है। बैंड बाजे के साथ पार्थिव शरीर को फूलों से सजी ट्रैक्टर ट्राली में रखकर श्मशान घाट ले जाया जाएगा। ट्राली में स्वर्गीय सैनिक के फोटो लगे फ्लैक्स लगाए जाएंगे।
जेब से मिले कागजों से हुई पहचान
विमान दुर्घटना में गुम हुए 98 जवानों की तलाश में छेडे़ गए एक अभियान में 16 अगस्त को लाहौल स्पीति के चंद्रभागा क्षेत्र में मिले जिले के मीरपुर गांव के ईएमई के हवलदार जगमाल सिंह के शव को सिल्वर मेडल और उसकी जेब से मिली जीवनबीमा पॉलिसी और परिवार के एक खत से पहचाना गया है।