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ढाई करोड़ खर्च, फिर भी पंचायत संसाधन केंद्र अधूरा, अब पौने दो करोड़ और मांगे
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पंचायतों को ट्रेनिंग देने के लिए पंचायती राज विभाग ने पांच साल पहले पंचायत संसाधन केंद्र बनाने का प्रोजेक्ट शुरू किया था, गांवों की सरकार बनी और उनका कार्यकाल पूरा हो गया लेकिन प्रोजेक्ट अधूरा ही रह गया। गांवों में पिछले कार्यकाल में चुने गए जिला पार्षद, सरपंच, पांच करोड़ों रुपये की लागत से बनने वाले पंचायत संसाधन केंद्र में ट्रेनिंग ही नहीं ले पाए। वीआईपी क्षेत्र में तैयार ही रही बिल्डिंग ढाई करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी अधूरी रह गई है। विभाग ने बिल्डिंग को पूरा करने के लिए अब पौने दो करोड़ रुपये और मांगे है। ये रुपये आने के बाद ही काम शुरू हो पाएगा।
हालात ये हैं कि पंचायत संसाधन केंद्र का मात्र एक ही हॉल तैयार हो पाया है, जो अब अधिकारियों की अनदेखी के चलते कंडम होने लगा है। कहीं दरवाजे टूटने लगे हैं तो कहीं पानी टपक रहा है जबकि अभी पूरी बिल्डिंग का काम अधूरा है। जिला पार्षदों, सरपंच, पंचों, ब्लॉक समिति सदस्यों को ट्रेनिंग देने के लिए पंचायत विभाग की तरफ से 2016 में पंचायत संसाधन केंद्र बनाने का काम शुरू हुआ था। इसका शिलान्यास एक अप्रैल 2016 को टोहाना से तत्कालीन विधायक सुभाष बराला ने किया था। पंचायत विभाग का इसे तैयार करवाने के पीछे लक्ष्य यह था कि गांवों में सरकार चलाने वाली पंचायतों को एक ही छत के नीचे ट्रेनिंग मिल सके। ट्रेनिंग से लेकर उनके ठहरने तक की व्यवस्था हो सके। इसी के चलते पंचायत संसाधन केंद्र में ट्रेनिंग हॉल के अलावा कमरों का निर्माण भी करवाया जा रहा है।
वीआईपी क्षेत्र में बिल्डिंग, लेकिन फिर भी हालात खराब
पंचायत संसाधन केंद्र का निर्माण वीआईपी क्षेत्र में करवाया जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों के रिहायशी क्षेत्र में इसका निर्माण हो रहा है। लेकिन बावजूद इसके अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे है। करीब 30 फीसदी काम अभी अधूरा पड़ा है।
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कोट
मुझे इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है कि बिल्डिंग क्यों अधूरी है। इसे जिला परिषद प्रशासन देख रहा है।
- बलजीत चहल, जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी।
काट
पंचायती राज विभाग इसका काम करवा रहा है, उनके विभाग के अधिकारियों को ही पता होगा कि काम क्यों अधूरा है।
- अजय चोपड़ा, सीईओ, जिला परिषद।
कोट
फंड की कमी है, इस वजह से बिल्डिंग का काम अधूरा है। करीब ढाई करोड़ रुपये पहले आए थे, जो कि लगा दिए गए हैं। अभी करीब 1 करोड़ 72 लाख रुपये मंजूर हो चुके है। फंड आने के बाद काम शुरू हो जाएगा।
- कुलबीर सिंह, कार्यकारी अभियंता, पंचायती राज विभाग।
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हालात ये हैं कि पंचायत संसाधन केंद्र का मात्र एक ही हॉल तैयार हो पाया है, जो अब अधिकारियों की अनदेखी के चलते कंडम होने लगा है। कहीं दरवाजे टूटने लगे हैं तो कहीं पानी टपक रहा है जबकि अभी पूरी बिल्डिंग का काम अधूरा है। जिला पार्षदों, सरपंच, पंचों, ब्लॉक समिति सदस्यों को ट्रेनिंग देने के लिए पंचायत विभाग की तरफ से 2016 में पंचायत संसाधन केंद्र बनाने का काम शुरू हुआ था। इसका शिलान्यास एक अप्रैल 2016 को टोहाना से तत्कालीन विधायक सुभाष बराला ने किया था। पंचायत विभाग का इसे तैयार करवाने के पीछे लक्ष्य यह था कि गांवों में सरकार चलाने वाली पंचायतों को एक ही छत के नीचे ट्रेनिंग मिल सके। ट्रेनिंग से लेकर उनके ठहरने तक की व्यवस्था हो सके। इसी के चलते पंचायत संसाधन केंद्र में ट्रेनिंग हॉल के अलावा कमरों का निर्माण भी करवाया जा रहा है।
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वीआईपी क्षेत्र में बिल्डिंग, लेकिन फिर भी हालात खराब
पंचायत संसाधन केंद्र का निर्माण वीआईपी क्षेत्र में करवाया जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों के रिहायशी क्षेत्र में इसका निर्माण हो रहा है। लेकिन बावजूद इसके अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे है। करीब 30 फीसदी काम अभी अधूरा पड़ा है।
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मुझे इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है कि बिल्डिंग क्यों अधूरी है। इसे जिला परिषद प्रशासन देख रहा है।
- बलजीत चहल, जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी।
काट
पंचायती राज विभाग इसका काम करवा रहा है, उनके विभाग के अधिकारियों को ही पता होगा कि काम क्यों अधूरा है।
- अजय चोपड़ा, सीईओ, जिला परिषद।
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फंड की कमी है, इस वजह से बिल्डिंग का काम अधूरा है। करीब ढाई करोड़ रुपये पहले आए थे, जो कि लगा दिए गए हैं। अभी करीब 1 करोड़ 72 लाख रुपये मंजूर हो चुके है। फंड आने के बाद काम शुरू हो जाएगा।
- कुलबीर सिंह, कार्यकारी अभियंता, पंचायती राज विभाग।