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Fatehabad News: नशा मुक्त गांव मताना में अभ्यास के लिए नहीं खेल मैदान
Thu, 05 Mar 2026 11:07 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Thu, 05 Mar 2026 11:07 PM IST
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गांव मताना में बनी कुम्हार धर्मशाला। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहाबाद। गांव मताना में खेलों के अभ्यास के लिए मैदान नहीं है। मजबूरन उन्हें सड़कों पर ही दौड़ लगानी पड़ रही है। युवाओं ने प्रदेश सरकार से खेल मैदान बनवाने की मांग की है।
जबकि पुलिस विभाग ने गांव मताना को नशा मुक्त गांव घोषित किया है फिर भी युवाओं के पास खेलों के लिए कोई उचित स्थान नहीं है। गांव में खेल सुविधाओं का पूरी तरह अभाव है। सेना, पुलिस और अन्य खेल प्रतियोगिताओं की तैयारी कर रहे युवा अभ्यास के लिए गांव से जिला मुख्यालय तक जाने वाली पुलिस लाइन के मैदान में मजबूर हैं।
स्थानीय युवाओं का कहना है कि यदि गांव में ही खेल मैदान की सुविधा उपलब्ध हो जाए तो उनकी तैयारी और खेल गतिविधियों में निखार आएगा और शहर या बाहरी मैदानों पर आने-जाने की समस्या खत्म हो जाएगी। गांव के युवाओं की मांग है कि गांव की खाली पड़ी भूमि को खेल मैदान के लिए आवंटित किया जाए। कम से कम 400 मीटर का रनिंग ट्रैक तैयार किया जाए। बुनियादी ओपन जिम और खेल किट की व्यवस्था की जाए।
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हमारा गांव नशा मुक्त है, यह गर्व की बात है। सरकार कहती है कि युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए खेलों की ओर ध्यान देना चाहिए। अगर हमें खेलना है या दौड़ लगानी है तो पुलिस लाइन जाना पड़ता है। अगर गांव में ही ट्रैक और जिम की सुविधा हो, तो महिला खिलाड़ी भी गांव से तैयार हो सकती हैं।
- राकेश जांगड़ा निवासी मताना।
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गांव के युवाओं को खेलों के अभ्यास के लिए सड़कों पर दौड़ना पड़ रहा है। पक्की सड़कों पर दौड़ने से उनके घुटनों और पैरों में चोट लगने का डर बना रहता है। सड़कों पर हादसे होने का डर भी बना रहता है। प्रशासन से गुहार है कि गांव की पंचायत भूमि पर एक छोटा ही सही, लेकिन व्यवस्थित खेल मैदान बनाया जाए।
-- अभिषेक वर्मा निवासी मताना।
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गांव में खेलने की कोई जगह नहीं है। गांव के पार्क व अन्य खाली जगहों पर बुजुर्ग बैठते हैं। पहले खाली जगह पर युवा तैयारी करते थे, लेकिन अब वहां पर जलघर बन गया है। ऐसे में उनके लिए गांव में कोई ऐसा मैदान नहीं बचा जहां वे अभ्यास कर सकें।
- पंकज वर्मा निवासी मताना।
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जिला मुख्यालय के पास गांव होने के कारण आबादी अन्य गांव से ज्यादा है, लेकिन गांव में खेल मैदान नहीं है। पुरुष पुलिस लाइन के खेल मैदान में होकर चले जाते है, लेकिन गांव की महिलाएं और लड़कियों वहां जाने में परेशानी महसूस करती हैं।
- कुलदीप सुथार निवासी मताना।
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फतेहाबाद। गांव मताना में खेलों के अभ्यास के लिए मैदान नहीं है। मजबूरन उन्हें सड़कों पर ही दौड़ लगानी पड़ रही है। युवाओं ने प्रदेश सरकार से खेल मैदान बनवाने की मांग की है।
जबकि पुलिस विभाग ने गांव मताना को नशा मुक्त गांव घोषित किया है फिर भी युवाओं के पास खेलों के लिए कोई उचित स्थान नहीं है। गांव में खेल सुविधाओं का पूरी तरह अभाव है। सेना, पुलिस और अन्य खेल प्रतियोगिताओं की तैयारी कर रहे युवा अभ्यास के लिए गांव से जिला मुख्यालय तक जाने वाली पुलिस लाइन के मैदान में मजबूर हैं।
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स्थानीय युवाओं का कहना है कि यदि गांव में ही खेल मैदान की सुविधा उपलब्ध हो जाए तो उनकी तैयारी और खेल गतिविधियों में निखार आएगा और शहर या बाहरी मैदानों पर आने-जाने की समस्या खत्म हो जाएगी। गांव के युवाओं की मांग है कि गांव की खाली पड़ी भूमि को खेल मैदान के लिए आवंटित किया जाए। कम से कम 400 मीटर का रनिंग ट्रैक तैयार किया जाए। बुनियादी ओपन जिम और खेल किट की व्यवस्था की जाए।
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हमारा गांव नशा मुक्त है, यह गर्व की बात है। सरकार कहती है कि युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए खेलों की ओर ध्यान देना चाहिए। अगर हमें खेलना है या दौड़ लगानी है तो पुलिस लाइन जाना पड़ता है। अगर गांव में ही ट्रैक और जिम की सुविधा हो, तो महिला खिलाड़ी भी गांव से तैयार हो सकती हैं।
- राकेश जांगड़ा निवासी मताना।
गांव के युवाओं को खेलों के अभ्यास के लिए सड़कों पर दौड़ना पड़ रहा है। पक्की सड़कों पर दौड़ने से उनके घुटनों और पैरों में चोट लगने का डर बना रहता है। सड़कों पर हादसे होने का डर भी बना रहता है। प्रशासन से गुहार है कि गांव की पंचायत भूमि पर एक छोटा ही सही, लेकिन व्यवस्थित खेल मैदान बनाया जाए।
गांव में खेलने की कोई जगह नहीं है। गांव के पार्क व अन्य खाली जगहों पर बुजुर्ग बैठते हैं। पहले खाली जगह पर युवा तैयारी करते थे, लेकिन अब वहां पर जलघर बन गया है। ऐसे में उनके लिए गांव में कोई ऐसा मैदान नहीं बचा जहां वे अभ्यास कर सकें।
- पंकज वर्मा निवासी मताना।
जिला मुख्यालय के पास गांव होने के कारण आबादी अन्य गांव से ज्यादा है, लेकिन गांव में खेल मैदान नहीं है। पुरुष पुलिस लाइन के खेल मैदान में होकर चले जाते है, लेकिन गांव की महिलाएं और लड़कियों वहां जाने में परेशानी महसूस करती हैं।
- कुलदीप सुथार निवासी मताना।