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Fatehabad News: डेढ़ माह के लिए बंद किए पशु मेले को प्रशासन ने डेढ़ साल तक नहीं किया शुरू
Mon, 23 Sep 2024 11:28 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Mon, 23 Sep 2024 11:28 PM IST
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फतेहाबाद के गांव अयाल्की के पास लगने वाले पशु मेले का स्थान।
फतेहाबाद। वर्ष 2023 के अप्रैल माह के अंत में प्रशासन द्वारा पशु मेले को ज्यादा गर्मी होने का हवाला देकर एक माह के लिए बंद किया गया था। इसके बाद बाढ़ आ गई। लेकिन पशु मेले वाले स्थान पर जलभराव होने के कारण काफी समय तक पशु मेला शुरू नहीं हो सका।
डेढ़ साल से व्यापारी पशु मेला शुरू करवाने की मांग कर रहे हैं लेकिन सिर्फ आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिल रहा है। यहां तक तत्कालीन पंचायत मंत्री देवेंद्र सिंह बबली ने भी अधिकारियों को पशु मेला शुरू करने के निर्देश दिए थे। पशु मेले में हरियाणा के अलावा पंजाब और यूपी से भी पशु खरीदने और बेचने के लिए व्यापारी आते हैं।
पशु मेला आरंभ करवाने के लिए व्यापारियों व किसानों ने पिछले वर्ष नवंबर माह में करीब एक माह तक फतेहाबाद के लघु सचिवालय के आगे धरना भी दिया था। इस धरने को शहर के अनेक पार्षदों ने अपना समर्थन दिया था लेकिन प्रशासन से केवल आश्वासन ही मिला।
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पशु मेला न लगने से बंद हुआ कारोबार
फतेहाबाद के रतिया रोड पर गांव अयाल्की के पास पशु मेला लगाया जाता है। पशु व्यापारी संघ के अध्यक्ष मोहरी राम का कहना है कि इस मेले से अनेक लोगों का रोजगार चलता है। यहां हर सप्ताह पशुओं को लोड करने के लिए 300 से 400 छोटी गाड़ियां, 50 के करीब कैंटर व ट्रक आते हैं। इसके अलावा यहां पर चाय वाले, टैंट वाले, व्यापारियों व किसानों को पानी पिलाने वाले, कुर्सी व चारपाई किराए पर देने वाले पहुंचते हैं और सप्ताह भर की कमाई करके जाते हैं। मेला बंद होने के कारण पशु व्यापारियों से लेकर सभी का रोजगार लगभग समाप्त हो गया है।
दूसरे राज्यों में किसान की कटती है 9 हजार की पर्ची
मोहरी राम ने बताया कि फतेहाबाद से अगर कोई किसान अपना पशु बेचने के लिए पंजाब या अन्य राज्य में जाता है तो उसे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है इसके अलावा यहां प्रशासन को भी राजस्व का नुकसान हो रहा है। यहां पर मात्र 100 रुपये की एंट्री फीस व पशु बिकने के बाद में 300 रुपये लिखित के लगते है। मेला बंद होने से सरकार को प्रति सप्ताह 15 लाख रुपये का नुकसान हो रहा है, लेकिन प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा। उन्होंने बताया कि वह इस मामले में उपायुक्त, डीडीपीओ, जिला परिषद के सीईओ से कई बार मिल चुके हैं। सीईओ ने तो ऑर्डर भी जारी कर दिए थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब भी उनको कोई ठोस जवाब नहीं मिल रहा है।
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पशु मेला जल्द से जल्द शुरू होना चाहिए ताकि जिन लोगों का कारोबार बंद पड़ा है, वो फिर से शुरू हो सके। लोकसभा चुनाव में नेताओं ने पशु मेला शुरू करवाने का आश्वासन दिया था। लेकिन मेला शुरू नहीं हुआ।
- सुरेश वर्मा, पशु व्यापारी, निवासी फतेहाबाद।
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इस मेले से अनेक लोगों का रोजगार चलता है। यहां हर सप्ताह पशुओं को लोड करने के लिए 300 से 400 छोटी गाड़ियां, 50 के करीब कैंटर व ट्रक आते हैं और ट्रक चालकों के लिए यह रोजी रोटी का बड़ा साधन है। यह जिले में लगने वाला एक मात्र पशु मेला है। इस मेले के बंद होने से सरकार को राजस्व का भी नुकसान हो रहा है।
- मोहरी राम, प्रधान, पशु व्यापारी संघ फतेहाबाद।
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गांव अयाल्की के पास लगने वाला पशु मेला जल्द से जल्द शुरू होना चाहिए, मेला बंद होने से किसानों को अपने पशु बेचने के लिए जिले से बाहर जाना पड़ता है। जिस कारण उन्हें अतिरिक्त रुपये देने पड़ते है। उन्हें पशु बचने के लिए हिसार, सिरसा या पंजाब में लगने वाले पशु मेले में जाना पड़ रहा है।
- भूपेंद्र सिंह, किसान, निवासी फतेहाबाद।
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डेढ़ साल से व्यापारी पशु मेला शुरू करवाने की मांग कर रहे हैं लेकिन सिर्फ आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिल रहा है। यहां तक तत्कालीन पंचायत मंत्री देवेंद्र सिंह बबली ने भी अधिकारियों को पशु मेला शुरू करने के निर्देश दिए थे। पशु मेले में हरियाणा के अलावा पंजाब और यूपी से भी पशु खरीदने और बेचने के लिए व्यापारी आते हैं।
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पशु मेला आरंभ करवाने के लिए व्यापारियों व किसानों ने पिछले वर्ष नवंबर माह में करीब एक माह तक फतेहाबाद के लघु सचिवालय के आगे धरना भी दिया था। इस धरने को शहर के अनेक पार्षदों ने अपना समर्थन दिया था लेकिन प्रशासन से केवल आश्वासन ही मिला।
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पशु मेला न लगने से बंद हुआ कारोबार
फतेहाबाद के रतिया रोड पर गांव अयाल्की के पास पशु मेला लगाया जाता है। पशु व्यापारी संघ के अध्यक्ष मोहरी राम का कहना है कि इस मेले से अनेक लोगों का रोजगार चलता है। यहां हर सप्ताह पशुओं को लोड करने के लिए 300 से 400 छोटी गाड़ियां, 50 के करीब कैंटर व ट्रक आते हैं। इसके अलावा यहां पर चाय वाले, टैंट वाले, व्यापारियों व किसानों को पानी पिलाने वाले, कुर्सी व चारपाई किराए पर देने वाले पहुंचते हैं और सप्ताह भर की कमाई करके जाते हैं। मेला बंद होने के कारण पशु व्यापारियों से लेकर सभी का रोजगार लगभग समाप्त हो गया है।
दूसरे राज्यों में किसान की कटती है 9 हजार की पर्ची
मोहरी राम ने बताया कि फतेहाबाद से अगर कोई किसान अपना पशु बेचने के लिए पंजाब या अन्य राज्य में जाता है तो उसे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है इसके अलावा यहां प्रशासन को भी राजस्व का नुकसान हो रहा है। यहां पर मात्र 100 रुपये की एंट्री फीस व पशु बिकने के बाद में 300 रुपये लिखित के लगते है। मेला बंद होने से सरकार को प्रति सप्ताह 15 लाख रुपये का नुकसान हो रहा है, लेकिन प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा। उन्होंने बताया कि वह इस मामले में उपायुक्त, डीडीपीओ, जिला परिषद के सीईओ से कई बार मिल चुके हैं। सीईओ ने तो ऑर्डर भी जारी कर दिए थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब भी उनको कोई ठोस जवाब नहीं मिल रहा है।
पशु मेला जल्द से जल्द शुरू होना चाहिए ताकि जिन लोगों का कारोबार बंद पड़ा है, वो फिर से शुरू हो सके। लोकसभा चुनाव में नेताओं ने पशु मेला शुरू करवाने का आश्वासन दिया था। लेकिन मेला शुरू नहीं हुआ।
- सुरेश वर्मा, पशु व्यापारी, निवासी फतेहाबाद।
इस मेले से अनेक लोगों का रोजगार चलता है। यहां हर सप्ताह पशुओं को लोड करने के लिए 300 से 400 छोटी गाड़ियां, 50 के करीब कैंटर व ट्रक आते हैं और ट्रक चालकों के लिए यह रोजी रोटी का बड़ा साधन है। यह जिले में लगने वाला एक मात्र पशु मेला है। इस मेले के बंद होने से सरकार को राजस्व का भी नुकसान हो रहा है।
- मोहरी राम, प्रधान, पशु व्यापारी संघ फतेहाबाद।
गांव अयाल्की के पास लगने वाला पशु मेला जल्द से जल्द शुरू होना चाहिए, मेला बंद होने से किसानों को अपने पशु बेचने के लिए जिले से बाहर जाना पड़ता है। जिस कारण उन्हें अतिरिक्त रुपये देने पड़ते है। उन्हें पशु बचने के लिए हिसार, सिरसा या पंजाब में लगने वाले पशु मेले में जाना पड़ रहा है।
- भूपेंद्र सिंह, किसान, निवासी फतेहाबाद।