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Fatehabad News: शादी के लिए कुंडली मिलाने के साथ थैलेसीमिया जांच जरूरी, नहीं तो संतान भी होगी ग्रस्त

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 07 May 2024 11:51 PM IST
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Thalassemia test is necessary along with matching horoscope for marriage, otherwise the child will also suffer.
फतेहाबाद। थैलेसीमिया बीमारी से पीड़ित जिले में 36 मरीज है। जो कि फतेहाबाद स्वास्थ्य विभाग के पास रजिस्टर्ड है। इन मरीजों के शरीर में खून नहीं बन पाता है और इसके लिए पीआरबीसी चढ़वाना पड़ता है लेकिन जानकार हैरानी होगी कि जिला नागरिक अस्पताल में सुविधा नहीं है। इसके अलावा टेस्ट की भी सुविधा नहीं है। मरीजों का कहना है कि जो दवाइयों है उनकी क्वालिटी भी निम्न स्तर की है जो कि काम नहीं करती है।
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थैलेसीमिया बीमारी से ग्रस्त मरीजों की मदद के लिए एफटीएस यानि फतेहाबाद थैलेसीमिया सोसायटी काम कर रही है। सोसायटी के प्रधान मोहित मुंजाल का कहना है कि अगर शादी से पहले कुंडली मिलान के साथ थैलेसीमिया जांच करवा ली जाए तो इस बीमारी को आगे बढऩे से रोका जा सकता है। क्यों कि माता-पिता के जरिए ये बीमारी बच्चों में पहुंचती है। यानि सजग रहकर हम उस रक्त विकार को रोक सकते हैं। वहीं थैलेसीमिया मरीजों का कहना है कि सरकार द्वारा मदद के नाम पर पेंशन की घोषणा हुई थी। लेकिन करीब ढाई से तीन साल बाद भी घोषणा सिरे नहीं चढ़ी है।
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मरीज को पीआरबीसी के लिए पड़ रहा भटकना
नागरिक अस्पताल में ब्लड सेपरेट कंपोनेट न होने के चलते थैलेसीमिया पीड़ित मरीजों को भटकना पड़ है। थैलेसीमिया से पीड़ित मरीज के शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं तेजी से खत्म होने लगती है और नई सेल्स नहीं बनती हैं। इस वजह से उसके शरीर में खून की कमी रहती है। इस बीमारी में आरबीसी की उम्र 10 से 25 दिन रह जाती है, जबकि सामान्य शरीर में ये 125 दिन तक रहती है। इस वजह से हर 20 से 25 दिन में में चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। हालांकि ब्लड सेपरेट कंपोनेट प्रोजेक्ट को लेकर नागरिक अस्पताल में ब्लड बैंक के साथ-साथ हॉल तैयार किया जा रहा है। यहां पर मशीनें लगाई जाएंगी।
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कोट
थैलेसीमिया मरीजों की मदद के लिए सोसायटी काम कर रही है। जो कि समय-समय पर कैंप लगाकर टेस्ट करवाती है। थैलेसीमिया बीमारी को आगे बढऩे से रोकने के लिए लोगों का जागरूक होना भी जरूरी है। सरकार से नागरिक अस्पताल में ब्लड सेपरेट कंपोनेट प्रोजेक्ट की मांग की गई है। इसको लेकर काम शुरू हो गया है। शुरू होने के बाद मरीजों को पीआरबीसी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।
-मोहित मुंजाल, प्रधान, एफटीएस
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