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रेल बजट : प्रभु अब तो कर दो कृपा
ब्यूरो/अमर उजाला फतेहाबाद
Updated Thu, 25 Feb 2016 12:05 AM IST
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वीरवार को रेल बजट पेश किया जाएगा। फतेहाबाद शहर के हर बाशिंदे की एक ही मांग है कि हे प्रभु! इस बार तो फतेहाबाद पर रहमतों की बारिश कर दो। दरअसल, दो दशक से फतेहाबाद रेल लाइन शहरवासियों की दुखती रग बनी रही है। हर बार संसदीय चुनाव में प्रत्याशी जनता की इस दुखती रग को दबाते हैं और वोट लेकर चलते बने हैं।
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कांग्रेस सरकार में अशोक तंवर के सांसद रहते रेल बजट में फतेहाबाद रेल लाइन का जिक्र आया था, लेकिन उसके बाद बजट के अभाव में यह परियोजना अभी तक लटकी हुई है। दावे और आश्वासन तो बहुत दिए गए, लेकिन सिरे चढ़ाने में कोई भी कामयाब नहीं हो पाया। अब मौजूदा रेलमंत्री सुरेश प्रभु हरियाणा के कोटे से राज्यसभा सांसद हैं।
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ऐसे में पूरी उम्मीद है कि इस बार रेल बजट में वो हरियाणा के फतेहाबाद को भी बहु प्रतीक्षित सौगात दे दें। हालांकि, हाल में प्रदेश में हुए जाट आंदोलन के दौरान रेलवे को हुए नुकसान का खामियाजा प्रदेश को भुगतने की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता।
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कई बार केंद्रीय नेताओं के मुंह पर भी फतेहाबाद रेल लाइन का जिक्र आ चुका है। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और यूपीए राज में रेल मंत्री रहे लालू यादव ने बाकायदा भरी सभा से फतेहाबाद रेल का एलान किया था। वाजपेयी ने जहां जनता से वादा किया था कि वे अगली बार रेलगाड़ी पर सवार होकर फतेहाबाद आएंगे तो दूसरी ओर लालू यादव ने अग्रोहा आयोजित वार्षिकोत्सव में फतेहाबाद-अग्रोहा रेल लाइन का एलान करते हुए कहा था कि ये महज घोषणा नहीं, बल्कि नोटिफिकेशन है।
ये हैं जरूरतें
जाखल स्टेशन की सबसे बड़ी समस्या यहां अधिक ट्रेनों का नहीं रुकना है। जंक्शन होने के बावजूद यहां महज 10 से 12 गाड़ियों का ठहराव है। दिल्ली-लुधियाना शताब्दी साथ लगते टोहाना स्टेशन पर रुकती है, लेकिन जंक्शन होने के बावजूद यहां नहीं रुकती। दिल्ली और पंजाब को जोड़ने वाले इस रेलवे स्टेशन को भी जाट आंदोलन के चलते लगभग 5 से 6 लाख रुपये का नुकसान भी हुआ है।
टोहाना रेलवे स्टेशन : टोहाना में रेलवे रिजर्वेशन का कोई काउंटर नहीं है। इसके अलावा टोहानावासी सिंगल टिकट काउंटर से परेशान हैं। उनको एक और टिकट काउंटर चाहिए। टोहाना में जाट आंदोलन के 9 दिनों में लगभग 4 से 5 लाख रुपये का नुकसान रेलवे को हुआ है।
जमालपुर रेलवे स्टेशन : इस स्टेशन पर बहुत ज्यादा ट्रेनें नहीं गुजरती, लेकिन यहां पर फाटक पर ओवरब्रिज की मांग बहुत पुरानी है। पूर्व मंत्री परमवीर सिंह और सुभाष बराला इसके लिए आश्वासन दे चुके हैं। इस स्टेशन पर जाट आंदोलन से तकरीबन एक लाख रुपये का नुकसान हुआ।
भट्टू रेलवे स्टेशन : इस स्टेशन पर दिल्ली, सिरसा और भटिंडा का रूट आता है। यहां के लोगों की मांग ओवरब्रिज की है। इसके लिए प्रयास जारी हैं। इसके अलावा स्टेशन के प्लेटफार्म को भी ऊंचा करने की मांग थी। जाट आंदोलन के समय भट्टू तक रेल मार्ग बंद था। इस दौरान भट्टू में तकरीबन 2 लाख रुपये का टिकट नुकसान रेलवे को हुआ है।
जनता की है ये आवाज
फतेहाबाद में अभी तक रेलवे के नाम पर महज नेताओं के आश्वासन ही मिले हैं। किसी भी पार्टी की सरकार रही हो, कागजों से बाहर निकलकर कुछ नहीं हुआ है। पवन बंसल ने घोषणा की तो बजट का अभाव हो गया। लगता नहीं कि इस बार भी रेल की घोषणा होगी।
- सुशील अरोड़ा, सदस्य, रेल लाओ अभियान, फतेहाबाद
सपने अच्छे तो लगते हैं, लेकिन जब पूरे नहीं होते तो सबसे बुरे भी वही लगते हैं। फतेहाबाद के लिए रेल भी एक ऐसा ही सपना है जिसे 20 सालों से देखते तो आ रहे हैं लेकिन पूरा ना होने से अब चुभने लगा है। बहरहाल फिर से रेल बजट आ रहा है, देखो इस बार कुछ हो जाए।
- हरदीप सिंह, समाजसेवी, फतेहाबाद