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ऑनलाइन कक्षाओं से विद्यार्थियों में व्यवहारिक बदलाव आए, चिढ़चिढ़ापन बढ़ा, घर में स्कूल की फीलिंग नहीं ले पाए
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फतेहाबाद का राजकीय कन्या स्कूल।
- फोटो : Fatehabad
फतेहाबाद। कोरोना महामारी के दौरान बंद रहे स्कूलों के कारण विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाया गया। ऑनलाइन पढ़ाई से विद्यार्थियों के व्यवहारिक में बदलाव आया। इससे चिड़चिड़ापन और तनाव बढ़ा। अब दो साल बाद स्कूल खुलने से ऑफलाइन पढ़ाई के साथ जुड़े तो नया माहौल मिला और दोस्तों के साथ विचारों को साझा करने से तनाव भी कम हो गया और चेहरे भी खिल रहे हैं। वहीं, अब उमंग कार्यक्रम के तहत शिक्षा विभाग विद्यार्थियों की काउंसिलिंग करेगा।
स्वास्थ्य विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि विद्यार्थी लंबे समय तक स्कूलों से दूर रहे, घरों मे बेशक ऑनलाइन पढ़ाई की गई लेकिन स्कूल की फीलिंग नहीं ले पाए। दोस्तों के साथ न मिल पाने के कारण सामाजिक रूप से कट गए और अपनी भावनाओं को साझा न कर पाने के कारण तनाव में आए। इसलिए विद्यार्थियों का स्कूलों से जुड़े रहना जरूरी है।
जिले में सरकारी स्कूलों की स्थिति
प्राइमरी स्कूल 386
हाई स्कूल 70
मिडल स्कूल 86
सीनियर सेकेंडरी स्कूल 74
आरोही स्कूल 05
कस्तूरबा गांधी विद्यालय 05
ऑनलाइन पढ़ाई के कारण विद्यार्थी तनाव में आए और खुद को ढाल नहीं पाए। अब स्कूल खुलने के बाद सामान्य हो गए है। हमारी कोशिश है कि बच्चे किसी तरह से तनाव में न रहे इसके लिए जागरूक कर रहे हैं और काउंसिलिंग की जा रही है। - विजय निमोर्ही, डायरेक्टर, पायनियर स्कूल
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विद्यार्थियों की काउंसिलिंग की जा रही है। इसको लेकर उमंग कार्यक्रम शुरू किया गया है। विशेषज्ञ विद्यार्थियों की काउंसिलिंग कर रहे हैं और उनके मन में जो भय है उसे दूर किया जा रहा है। ये जरूर है कि कोरोना महामारी के दौरान बंद रहे स्कूलों के कारण विद्यार्थियों में तनाव बढ़ा है। - दयानंद सिहाग, जिला शिक्षा अधिकारी
कोरोना महामारी के दौरान बंद रहे स्कूलों के कारण ऑनलाइन पढ़ाई करवाई गई। इस दौरान विद्यार्थियों में व्यवहारिक बदलाव आया। उनमें चिड़चिड़ापन बढ़ा। इस दौरान ओपीडी में भी काफी केस आए, लेकिन अब स्कूल शुरू होने के बाद ऐसे केस न के बराबर है। मुख्य वजह यह है कि स्कूल के खुलने के साथ परीक्षाएं शुरू हो गई। - गविंद्र कौर, क्लीनिकल मनोवैज्ञानिक
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स्वास्थ्य विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि विद्यार्थी लंबे समय तक स्कूलों से दूर रहे, घरों मे बेशक ऑनलाइन पढ़ाई की गई लेकिन स्कूल की फीलिंग नहीं ले पाए। दोस्तों के साथ न मिल पाने के कारण सामाजिक रूप से कट गए और अपनी भावनाओं को साझा न कर पाने के कारण तनाव में आए। इसलिए विद्यार्थियों का स्कूलों से जुड़े रहना जरूरी है।
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जिले में सरकारी स्कूलों की स्थिति
प्राइमरी स्कूल 386
हाई स्कूल 70
मिडल स्कूल 86
सीनियर सेकेंडरी स्कूल 74
आरोही स्कूल 05
कस्तूरबा गांधी विद्यालय 05
ऑनलाइन पढ़ाई के कारण विद्यार्थी तनाव में आए और खुद को ढाल नहीं पाए। अब स्कूल खुलने के बाद सामान्य हो गए है। हमारी कोशिश है कि बच्चे किसी तरह से तनाव में न रहे इसके लिए जागरूक कर रहे हैं और काउंसिलिंग की जा रही है। - विजय निमोर्ही, डायरेक्टर, पायनियर स्कूल
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विद्यार्थियों की काउंसिलिंग की जा रही है। इसको लेकर उमंग कार्यक्रम शुरू किया गया है। विशेषज्ञ विद्यार्थियों की काउंसिलिंग कर रहे हैं और उनके मन में जो भय है उसे दूर किया जा रहा है। ये जरूर है कि कोरोना महामारी के दौरान बंद रहे स्कूलों के कारण विद्यार्थियों में तनाव बढ़ा है। - दयानंद सिहाग, जिला शिक्षा अधिकारी
कोरोना महामारी के दौरान बंद रहे स्कूलों के कारण ऑनलाइन पढ़ाई करवाई गई। इस दौरान विद्यार्थियों में व्यवहारिक बदलाव आया। उनमें चिड़चिड़ापन बढ़ा। इस दौरान ओपीडी में भी काफी केस आए, लेकिन अब स्कूल शुरू होने के बाद ऐसे केस न के बराबर है। मुख्य वजह यह है कि स्कूल के खुलने के साथ परीक्षाएं शुरू हो गई। - गविंद्र कौर, क्लीनिकल मनोवैज्ञानिक