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मानसून सिर पर, प्रशासन की तैयारियां बैकफुट पर
फतेहादबाद ब्यूरो/ अमर उजाला
Updated Tue, 31 May 2016 12:10 AM IST
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बारिश
- फोटो : अमरउजाला
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अच्छी बारिश की आस से भले ही किसान बेहतर फसल की संभावना के चलते खुशी मना रहे हों, लेकिन आमजन और खुद किसानों के लिए इस बार अच्छी बरसात चिंता का सबब भी बन सकती है। इसके पीछे असल वजह बाढ़ नियंत्रक कामों को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा अपनाया जा रहा ढीला रवैया है। हर बार मई जून में बाढ़ से निपटने की तैयारियों के नाम पर अफसरों के दौरों की फोटो भेजने वाले प्रशासन ने इस बार बाढ़ नियंत्रण के लिए कितने गंभीर प्रयास किए हैं, उसकी पोल मनरेगा की विशेष रिपोर्ट ही खोल रही है। रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ नियंत्रक कार्यक्रम के तहत 65 प्रोजेक्टस ऐसे हैं, जिनको अफसरों से तो मंजूरी मिल गई है लेकिन जमीनी स्तर पर ये शुरू ही नहीं हो पाए हैं।
रतिया और जाखल में बाढ़ की ज्यादा आशंका, यहीं पर ढिलाई
मनरेगा रिपोर्ट की मानें तो बाढ़ नियंत्रक कामों में रतिया और जाखल ही सबसे ज्यादा पिछड़े हुए दिखाई पड़ रहे हैं। हैरत की बात ये भी है कि यही दोनों इलाके अक्सर बाढ़ से प्रभावित रहते आए हैं। घग्गर नदी रतिया से होकर निकलती है। बारिश के दिनों में ये नदी अपने पूरे उफान पर होती है।
मानसून के दिनों में घग्गर नदी के आस-पास रहने वाले किसान और स्थानीय निवासी हमेशा डर के साये में जीते हैं कि कहीं बाढ़ अचानक से खेत में उनकी मेहनत और बस्ती में उनके आशियाना की छत ही तबाह ना कर दे। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जिले में जाखल और रतिया में ही मनरेगा से संबंधित बाढ़ नियंत्रक काम पेंडिंग चले आ रहे हैं। अकेले जाखल में ही ऐसे प्रोजेक्ट्स की संख्या 34 तक पहुंच गई है, जिसे अफसरों की मंजूरी तो मिल गई है लेकिन इन पर काम शुरू नहीं हो पाया है। दूसरी ओर, रतिया में ऐसे प्रोजेक्टस की संख्या 31 है।
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रतिया में बाढ़ नियंत्रक के 27 काम जारी
ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग की मौजूदा रिपोर्ट के मुताबिक, रतिया में बाढ़ नियंत्रक कार्यक्रम के तहत 27 प्रोजेक्टस पर काम जारी है। ग्रामीण विकास मंत्रालय के सूत्रों की मानें तो रतिया खंड के करीब 15 गांवों में 3530 मजदूरों द्वारा नहरों और जोहड़ की सफाई का कार्य शुरू किया गया है। रतिया क्षेत्र के गांव लांबा, हासंगा, मुंशीवाली, बुर्ज, जल्लोपुर, जांडवाला सौत्र, अहरवां, हुकमावाली, रतनगढ़, अलीका, महमड़ा, बादलगढ़, सहनाल, बबनपुर, लधुवास आदि गांवों में बाढ़ नियंत्रक कार्य किए जा रहे हैं।
मनरेगा के तहत प्रोजेक्ट्स में आते हैं ये काम
1. नहरें खुदवाना
2. कुएं खुदवाना
3. खाल बनवाना
4. सड़कें बनवाना
5. अस्थायी और स्थायी बांध बनवाना
अगर ऐसा है तो इस संदर्भ में जिम्मेदार अधिकारियों से चर्चा कर कामों को तुरंत शुरू करवाया जाएगा। बारिश के मौसम से पहले बाढ़ नियंत्रक कार्य अवश्य पूरे होंगे।
जेके अभीर, एडीसी, फतेहाबाद
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रतिया और जाखल में बाढ़ की ज्यादा आशंका, यहीं पर ढिलाई
मनरेगा रिपोर्ट की मानें तो बाढ़ नियंत्रक कामों में रतिया और जाखल ही सबसे ज्यादा पिछड़े हुए दिखाई पड़ रहे हैं। हैरत की बात ये भी है कि यही दोनों इलाके अक्सर बाढ़ से प्रभावित रहते आए हैं। घग्गर नदी रतिया से होकर निकलती है। बारिश के दिनों में ये नदी अपने पूरे उफान पर होती है।
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मानसून के दिनों में घग्गर नदी के आस-पास रहने वाले किसान और स्थानीय निवासी हमेशा डर के साये में जीते हैं कि कहीं बाढ़ अचानक से खेत में उनकी मेहनत और बस्ती में उनके आशियाना की छत ही तबाह ना कर दे। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जिले में जाखल और रतिया में ही मनरेगा से संबंधित बाढ़ नियंत्रक काम पेंडिंग चले आ रहे हैं। अकेले जाखल में ही ऐसे प्रोजेक्ट्स की संख्या 34 तक पहुंच गई है, जिसे अफसरों की मंजूरी तो मिल गई है लेकिन इन पर काम शुरू नहीं हो पाया है। दूसरी ओर, रतिया में ऐसे प्रोजेक्टस की संख्या 31 है।
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रतिया में बाढ़ नियंत्रक के 27 काम जारी
ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग की मौजूदा रिपोर्ट के मुताबिक, रतिया में बाढ़ नियंत्रक कार्यक्रम के तहत 27 प्रोजेक्टस पर काम जारी है। ग्रामीण विकास मंत्रालय के सूत्रों की मानें तो रतिया खंड के करीब 15 गांवों में 3530 मजदूरों द्वारा नहरों और जोहड़ की सफाई का कार्य शुरू किया गया है। रतिया क्षेत्र के गांव लांबा, हासंगा, मुंशीवाली, बुर्ज, जल्लोपुर, जांडवाला सौत्र, अहरवां, हुकमावाली, रतनगढ़, अलीका, महमड़ा, बादलगढ़, सहनाल, बबनपुर, लधुवास आदि गांवों में बाढ़ नियंत्रक कार्य किए जा रहे हैं।
मनरेगा के तहत प्रोजेक्ट्स में आते हैं ये काम
1. नहरें खुदवाना
2. कुएं खुदवाना
3. खाल बनवाना
4. सड़कें बनवाना
5. अस्थायी और स्थायी बांध बनवाना
अगर ऐसा है तो इस संदर्भ में जिम्मेदार अधिकारियों से चर्चा कर कामों को तुरंत शुरू करवाया जाएगा। बारिश के मौसम से पहले बाढ़ नियंत्रक कार्य अवश्य पूरे होंगे।
जेके अभीर, एडीसी, फतेहाबाद