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खुलासा: पॉली क्लीनिक में जंग लगे औजारों से होता है इलाज
fatehabad
Updated Wed, 20 Jul 2016 12:02 AM IST
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पॉली क्लीनिक
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मुकेश खुराना। शहर के पॉली क्लीनिक में जंग लगे औजारों से मरीजों का इलाज होता है। ये चौंकाने वाला खुलासा पीजीआई की स्पेशल टीम ने अपनी जांच रिपोर्ट में किया है। पीजीआई की विशेष टीम ने पिछले सप्ताह शहर के हुडा सेक्टर तीन में स्थित पॉली क्लीनिक में छापा मारकर औचक निरीक्षण किया था। टीम के औचक निरीक्षण में जंग लगे औजारों के अलावा भी कई प्रकार की कमियां पाई गई थी। बड़ी बात ये है कि इस मामले में अब मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव राकेश गुप्ता ने सीएमओ डॉ. अशोक चौधरी से जवाब तलब किया है। 27 जुलाई को अब सीएमओ सीएम के अतिरिक्त मुख्य सचिव राकेश गुप्ता के समक्ष पेश होकर अपना पक्ष रखेंगे।
जांच में ये कमियां मिली पोलीक्लीनिक में:
शहर के हुडा सेक्टर में स्थित पॉली क्लीनिक में जब टीम के द्वारा जांच की गई तो काफी कमियां सामने आईं। इनमें मुख्य कमी जंग लगे औजारों की थी। इन्हीं औजारों से मरीजों का इजाज किया जा रहा था। जांच रिपोर्ट की मानें तो ये अपने आप में एक बहुत बड़ी लापरवाही है। उसके साथ-साथ अन्य कमियां भी सामने आई।
-अस्पताल में कुल चार बेड ही मिले
-अस्पताल में जंग लगे औजार मिले
-डी फ्रीजर में थर्मामीटर नहीं मिला
-हेपेटाइपिटस बी और सी, एचआईवी चेक करने की किट नहीं मिली
-मेल-फिमेल वार्ड मिले इकट्ठे
-लेबर रूम के बाहर नहीं मिला शूज रखने का रेक
-बायोमेडिकल के लिए कोई सुविधा नहीं मिली
फतेहाबाद के सिविल अस्पताल में बच्चे का नहीं लिया जाता फूट प्रिंट:
रोहतक पीजीआई से आई टीम ने पॉली क्लीनिक के निरीक्षण के बाद सिविल अस्पताल फतेहाबाद का भी निरीक्षण किया। पीजीआई से आई स्पेशल टीम को सामान्य अस्पताल में भी चौंकाने वाली कमियां मिली हैं। पिछले दिनों प्रदेश भर के सरकारी अस्पतालों में बच्चा बदलने के कई मामले सामने आए हैं, लेकिन फतेहाबाद का स्वास्थ्य विभाग इस बात को लेकर गंभीर नहीं है। इस बात का खुलासा पीजीआई टीम की रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार डिलीवरी के बाद फतेहाबाद के सिविल अस्पताल में बच्चे के फूट प्रिंट न लेने का मामला सामने आया है। इसके अलावा कई रिकार्ड में भी कमियां पाई गई।
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सामान्य अस्पताल से आधे मरीज, लेकिन लापरवाही में सबसे आगे पॉली क्लीनिक
अस्पताल में फतेहाबाद के सिविल अस्पताल के मुकाबले आधे ही मरीज पहुंचते हैं, लेकिन फिर भी स्टाफ लापरवाही करने में सबसे आगे मिला है। बताया गया है कि इसमें बरती जा रही लापरवाही से खुद स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी भी हैरान हैं। अब जींद में होने वाली मीटिंग में पाई गई कमियों को लेकर फतेहाबाद के सिविल सर्जन से जवाब तलबी की जाएगी। अगर सीएमओ जवाब तलबी में पीछे हटते हैं, तो इंचार्ज पर गाज गिरना तय है।
औजार सभी नए हैं, ऐसी कोई बात नहीं है। एक आधा पुराना औजार बाहर रह गया, उसी वजह से खराब हुए। 10 बेड अस्पताल में मौजूद हैं, लेकिन छह बेड नशा मुक्ति केंद्र को दे दिए गए हैं। छोटी-मोटी कुछ कमियां थी, उन्हें उसी दिन ठीक कर दिया गया। इसकी रिपोर्ट भी सिविल सर्जन कार्यालय को दे दी गई है।
डॉ. प्रीत
इंचार्ज पॉली क्लीनिक
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत एडिशनल सीफ सेकेट्री के निर्देश पर पिछले दिनों फतेहाबाद के पॉली क्लीनिक और सरकारी अस्पताल का निरीक्षण किया था। जहां पर कुछ औजार जंग लगे मिले और बायोमेडिकल को लेकर भी कोई इंतजाम नहीं मिले। इसके अलावा और भी कई कमियां मिली। इस बारे में निदेशालय और डीसी को रिपोर्ट दे दी गई है। 27 जुलाई को इसी को लेकर जींद में मीटिंग होनी है।
डॉ. जय प्रकाश
पीजीआई टीम इंचार्ज
इस बारे में सिविल सर्जन डॉ. अशोक चौधरी से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि पॉली क्लीनिक इंचार्ज ने स्टाफ को कहा था कि जंग लगे औजार को साइड में रख दें, लेकिन उनकी तरफ से लापरवाही बरती गई। टीम ने कुछ कमियां बताई थी जिन्हें ठीक कर लिया गया है।
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जांच में ये कमियां मिली पोलीक्लीनिक में:
शहर के हुडा सेक्टर में स्थित पॉली क्लीनिक में जब टीम के द्वारा जांच की गई तो काफी कमियां सामने आईं। इनमें मुख्य कमी जंग लगे औजारों की थी। इन्हीं औजारों से मरीजों का इजाज किया जा रहा था। जांच रिपोर्ट की मानें तो ये अपने आप में एक बहुत बड़ी लापरवाही है। उसके साथ-साथ अन्य कमियां भी सामने आई।
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-अस्पताल में कुल चार बेड ही मिले
-अस्पताल में जंग लगे औजार मिले
-डी फ्रीजर में थर्मामीटर नहीं मिला
-हेपेटाइपिटस बी और सी, एचआईवी चेक करने की किट नहीं मिली
-मेल-फिमेल वार्ड मिले इकट्ठे
-लेबर रूम के बाहर नहीं मिला शूज रखने का रेक
-बायोमेडिकल के लिए कोई सुविधा नहीं मिली
फतेहाबाद के सिविल अस्पताल में बच्चे का नहीं लिया जाता फूट प्रिंट:
रोहतक पीजीआई से आई टीम ने पॉली क्लीनिक के निरीक्षण के बाद सिविल अस्पताल फतेहाबाद का भी निरीक्षण किया। पीजीआई से आई स्पेशल टीम को सामान्य अस्पताल में भी चौंकाने वाली कमियां मिली हैं। पिछले दिनों प्रदेश भर के सरकारी अस्पतालों में बच्चा बदलने के कई मामले सामने आए हैं, लेकिन फतेहाबाद का स्वास्थ्य विभाग इस बात को लेकर गंभीर नहीं है। इस बात का खुलासा पीजीआई टीम की रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार डिलीवरी के बाद फतेहाबाद के सिविल अस्पताल में बच्चे के फूट प्रिंट न लेने का मामला सामने आया है। इसके अलावा कई रिकार्ड में भी कमियां पाई गई।
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सामान्य अस्पताल से आधे मरीज, लेकिन लापरवाही में सबसे आगे पॉली क्लीनिक
अस्पताल में फतेहाबाद के सिविल अस्पताल के मुकाबले आधे ही मरीज पहुंचते हैं, लेकिन फिर भी स्टाफ लापरवाही करने में सबसे आगे मिला है। बताया गया है कि इसमें बरती जा रही लापरवाही से खुद स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी भी हैरान हैं। अब जींद में होने वाली मीटिंग में पाई गई कमियों को लेकर फतेहाबाद के सिविल सर्जन से जवाब तलबी की जाएगी। अगर सीएमओ जवाब तलबी में पीछे हटते हैं, तो इंचार्ज पर गाज गिरना तय है।
औजार सभी नए हैं, ऐसी कोई बात नहीं है। एक आधा पुराना औजार बाहर रह गया, उसी वजह से खराब हुए। 10 बेड अस्पताल में मौजूद हैं, लेकिन छह बेड नशा मुक्ति केंद्र को दे दिए गए हैं। छोटी-मोटी कुछ कमियां थी, उन्हें उसी दिन ठीक कर दिया गया। इसकी रिपोर्ट भी सिविल सर्जन कार्यालय को दे दी गई है।
डॉ. प्रीत
इंचार्ज पॉली क्लीनिक
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत एडिशनल सीफ सेकेट्री के निर्देश पर पिछले दिनों फतेहाबाद के पॉली क्लीनिक और सरकारी अस्पताल का निरीक्षण किया था। जहां पर कुछ औजार जंग लगे मिले और बायोमेडिकल को लेकर भी कोई इंतजाम नहीं मिले। इसके अलावा और भी कई कमियां मिली। इस बारे में निदेशालय और डीसी को रिपोर्ट दे दी गई है। 27 जुलाई को इसी को लेकर जींद में मीटिंग होनी है।
डॉ. जय प्रकाश
पीजीआई टीम इंचार्ज
इस बारे में सिविल सर्जन डॉ. अशोक चौधरी से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि पॉली क्लीनिक इंचार्ज ने स्टाफ को कहा था कि जंग लगे औजार को साइड में रख दें, लेकिन उनकी तरफ से लापरवाही बरती गई। टीम ने कुछ कमियां बताई थी जिन्हें ठीक कर लिया गया है।