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पहलवान उदयचंद के बाद फतेहाबाद जिले से नहीं बना खेलों में कोई बड़ा नाम
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उदयचंद पहलवान।
- फोटो : Fatehabad
फतेहाबाद को जिला बने 24 साल हो चुके हैं, लेकिन यहां पहलवान उदयचंद के बाद कोई बड़ा नाम खेलों में नहीं उभर सका है। द्रोणचार्यों से लेकर खेल सुविधाओं के अभाव से अधिक अभिभावकों में बच्चों को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ाने की झिझक, इसका सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। हालांकि, कुछ खिलाड़ियों ने राज्य स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने की कोशिश की है, लेकिन ओलंपिक तक तो एक भी खिलाड़ी नहीं पहुंच सका है। 10 करोड़ की लागत से फुटबाल का एस्ट्रोटर्फ भी बना, लेकिन वह भी सफेद हाथी बन गया।
कोच मानते हैं कि रोहतक-सोनीपत के लोगों की तरह यहां के अभिभावकों में खेलों के प्रति जज्बा लाना होगा। वहां के मां-बाप बच्चों को खेलों में आगे बढ़ाने के लिए जमीन तक बेच देते हैं। यहां के अभिभावक बच्चों को स्टेडियम भी नहीं भेज रहे हैं। गौरतलब है कि देश के पहले अर्जुन अवॉर्डी पहलवान उदयचंद का जन्म फतेहाबाद जिले के गांव जांडली में हुआ था। हालांकि, उस समय हरियाणा भी नहीं बना था और जांडली हिसार जिले का हिस्सा होता था। ज्यादातर समय पहलवान उदयचंद ने हिसार में ही बिताया है।
तीन बार ओलंपिक का हिस्सा बने थे पहलवान उदयचंद
पहलवान उदयचंद बचपन से ही कुश्ती के शौकीन रहे। वर्ष 1958 से 1970 तक लगातार 12 सालों तक वह राष्ट्रीय चैंपियन रहे। पहलवान उदयचंद आजाद भारत के पहले व्यक्तिगत वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप के पदक विजेता हैं। पहलवान उदयचंद ने तीन ओलंपिक में भाग लिया था। 1960 में रोम, 1964 में टोक्यो व 1968 में मैक्सिको सिटी में हुए ओलंपिक में उन्होंने भागीदारी की। एशियाई खेलों में दो बार भाग लिया। 1962 के एशियाई खेल जकार्ता में 70 किलो ग्रेको रोमन में दो रजत पदक जीते और 1966 एशियाई खेल बैंकाक में 70 किलो फ्री स्टाइल में कांस्य पदक जीता। इसके अलावा उन्होंने चार अलग-अलग विश्व कुश्ती चैंपियनशिप 1961 में योकोहामा, 1965 में मैनचेस्टर, 1967 में दिल्ली और 1970 में एडमोंटन में भाग लिया। उन्होंने स्कॉटलैंड के एडिनबर्ग 1970 में ब्रिटिश राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक भी जीता। पहलवान उदयचंद की उपलब्धियों के लिए भारत सरकार ने उन्हें 1961 में कुश्ती में देश का पहला अर्जुन पुरस्कार प्रदान किया। अर्जुन पुरस्कार की स्थापना 1961 में ही हुई थी।
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एथलेटिक्स में आगे आ रही गांव बैजलपुर की बेटियां
कुछ समय से गांव बैजलपुर की बेटियां एथलेटिक्स में आगे आ रही हैं। राष्ट्रीय फेडरेशन कप जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में बैजलपुर की पूजा ओला ने आठ सौ मीटर दौड़ प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीता था। इसके अलावा इसी गांव की सुमिता नैन भी हॉकी में नेशनल लेवल पर नाम कमा रही है।
पहले अभिभावकों में रुझान बनाना जरूरी, फिर बच्चे आएंगे आगे
भोडियाखेड़ा जिला स्तरीय स्टेडियम में कुश्ती कोच अनिल कुमार कहते हैं कि रोहतक-सोनीपत की तरफ के अभिभावक अपने बच्चों को खेलों में आगे बढ़ाने के लिए जमीन तक बेच देते हैं। यही कारण है कि वहां गांव-गांव से खिलाड़ी निकलकर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीतते हैं। मगर फतेहाबाद में अभिभावकों की ही रुचि नहीं है, बच्चों की तो बाद में होगी। कई गांवों में प्रतिभाएं हैं, लेकिन उनको अवसर नहीं मिलता है। अभिभावक बच्चों को स्टेडियम तक ही नहीं भेजते हैं, वो मेडल कैसे जीत पाएंगे।
जिले में खेलों से संबंधित इंफ्रास्टक्चर की स्थिति
जिले में कोच : 15
मुख्य खेल स्टेडियम : 1
खेल स्टेडियम : 1
एस्ट्रोटर्फ : 1
राजीव गांधी ग्रामीण खेल परिसर : 5
खेल नर्सरियां : 14
कोट
फतेहाबाद जिले में खेलों से संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर अभी विकसित होने लगा है। दूसरे जिलों की अपेक्षा यहां के बच्चों में खेलों में रुझान भी कम है। अभिभावकों को यह समझना होगा कि अब खेलों से भी शानदार कैरियर बन सकता है। खेलों में मेडल जीतने वालों को खूब मान-सम्मान भी मिलता है।
जगजीत सिंह मलिक, जिला खेल अधिकारी, फतेहाबाद।
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कोच मानते हैं कि रोहतक-सोनीपत के लोगों की तरह यहां के अभिभावकों में खेलों के प्रति जज्बा लाना होगा। वहां के मां-बाप बच्चों को खेलों में आगे बढ़ाने के लिए जमीन तक बेच देते हैं। यहां के अभिभावक बच्चों को स्टेडियम भी नहीं भेज रहे हैं। गौरतलब है कि देश के पहले अर्जुन अवॉर्डी पहलवान उदयचंद का जन्म फतेहाबाद जिले के गांव जांडली में हुआ था। हालांकि, उस समय हरियाणा भी नहीं बना था और जांडली हिसार जिले का हिस्सा होता था। ज्यादातर समय पहलवान उदयचंद ने हिसार में ही बिताया है।
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तीन बार ओलंपिक का हिस्सा बने थे पहलवान उदयचंद
पहलवान उदयचंद बचपन से ही कुश्ती के शौकीन रहे। वर्ष 1958 से 1970 तक लगातार 12 सालों तक वह राष्ट्रीय चैंपियन रहे। पहलवान उदयचंद आजाद भारत के पहले व्यक्तिगत वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप के पदक विजेता हैं। पहलवान उदयचंद ने तीन ओलंपिक में भाग लिया था। 1960 में रोम, 1964 में टोक्यो व 1968 में मैक्सिको सिटी में हुए ओलंपिक में उन्होंने भागीदारी की। एशियाई खेलों में दो बार भाग लिया। 1962 के एशियाई खेल जकार्ता में 70 किलो ग्रेको रोमन में दो रजत पदक जीते और 1966 एशियाई खेल बैंकाक में 70 किलो फ्री स्टाइल में कांस्य पदक जीता। इसके अलावा उन्होंने चार अलग-अलग विश्व कुश्ती चैंपियनशिप 1961 में योकोहामा, 1965 में मैनचेस्टर, 1967 में दिल्ली और 1970 में एडमोंटन में भाग लिया। उन्होंने स्कॉटलैंड के एडिनबर्ग 1970 में ब्रिटिश राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक भी जीता। पहलवान उदयचंद की उपलब्धियों के लिए भारत सरकार ने उन्हें 1961 में कुश्ती में देश का पहला अर्जुन पुरस्कार प्रदान किया। अर्जुन पुरस्कार की स्थापना 1961 में ही हुई थी।
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एथलेटिक्स में आगे आ रही गांव बैजलपुर की बेटियां
कुछ समय से गांव बैजलपुर की बेटियां एथलेटिक्स में आगे आ रही हैं। राष्ट्रीय फेडरेशन कप जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में बैजलपुर की पूजा ओला ने आठ सौ मीटर दौड़ प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीता था। इसके अलावा इसी गांव की सुमिता नैन भी हॉकी में नेशनल लेवल पर नाम कमा रही है।
पहले अभिभावकों में रुझान बनाना जरूरी, फिर बच्चे आएंगे आगे
भोडियाखेड़ा जिला स्तरीय स्टेडियम में कुश्ती कोच अनिल कुमार कहते हैं कि रोहतक-सोनीपत की तरफ के अभिभावक अपने बच्चों को खेलों में आगे बढ़ाने के लिए जमीन तक बेच देते हैं। यही कारण है कि वहां गांव-गांव से खिलाड़ी निकलकर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीतते हैं। मगर फतेहाबाद में अभिभावकों की ही रुचि नहीं है, बच्चों की तो बाद में होगी। कई गांवों में प्रतिभाएं हैं, लेकिन उनको अवसर नहीं मिलता है। अभिभावक बच्चों को स्टेडियम तक ही नहीं भेजते हैं, वो मेडल कैसे जीत पाएंगे।
जिले में खेलों से संबंधित इंफ्रास्टक्चर की स्थिति
जिले में कोच : 15
मुख्य खेल स्टेडियम : 1
खेल स्टेडियम : 1
एस्ट्रोटर्फ : 1
राजीव गांधी ग्रामीण खेल परिसर : 5
खेल नर्सरियां : 14
कोट
फतेहाबाद जिले में खेलों से संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर अभी विकसित होने लगा है। दूसरे जिलों की अपेक्षा यहां के बच्चों में खेलों में रुझान भी कम है। अभिभावकों को यह समझना होगा कि अब खेलों से भी शानदार कैरियर बन सकता है। खेलों में मेडल जीतने वालों को खूब मान-सम्मान भी मिलता है।
जगजीत सिंह मलिक, जिला खेल अधिकारी, फतेहाबाद।

तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से मिलते उदयचंद पहलवान। फाइल फोटो- फोटो : Fatehabad