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2023 में फिर से केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलेंगे किसान: राकेश टिकैत
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फतेहाबाद। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत का कहना है कि 2023 में फिर से केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलेंगे। देश में 550 किसान संगठन है, इनको जनता के बीच जाना होगा। दुनिया का दूसरा किम जोंग भारत में हैं। पूरा सिस्टम कब्जे में ले रखा है। देश में तानाशाही नहीं चलेगी। इस तरह की सरकार देश में नहीं होनी चाहिए, जहां किसी की सुनवाई न हो। टिकैत जाट धर्मशाला में किसान-मजदूर पंचायत को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार को किसान की जमीन चाहिए। अनुबंधित फार्मिंग के नाम पर सरकार किसानों की जमीन लेकर उद्योगपतियों को देंगे। अब गेहूं-सरसों की फसलों की कटाई का समय आ गया है। इसलिए किसान यह काम पूरा करें।
मुक्ति अभियान चलाने की जरूरत
टिकैत ने कहा कि देश में मुक्ति अभियान चलेगा। बहुत लोग बंधनों में हैं, उनको भी मुक्त करवाना होगा। भाजपा के कई नेता भी बंधन में हैं, उनको भी मुक्त करवाएंगे। कर्मचारी वर्ग भी पीड़ित है, इस बार वह भी आंदोलन में साथ रहेगा। इसलिए बड़े आंदोलन की जरूरत है। उसकी तैयारी करनी है। छोटी-छोटी बैठकें शुरू करनी हैं।
बीजेपी की नागपुर में है यूनिवर्सिटी
टिकैत ने कहा कि बीजेपी की नागपुर में यूनिवर्सिटी है। वहां हारे हुए प्रत्याशी को भी जीत का सर्टिफिकेट पकड़ा देते हैं। यूपी चुनाव में भी परिणाम आने से पहले ही कहा जा रहा है कि हम ही जीतेंगे। इसका मतलब है कि बीजेपी की यूनिवर्सिटी कुछ न कुछ गड़बड़ जरूर करेगी।
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यूक्रेन में बच्चे फंसे हुए, प्रधानमंत्री चुनाव प्रचार कर रहे
उन्होंने कहा कि यूक्रेन में देश के बच्चे फंसे हुए हैं। ऐसी स्थिति में प्रधानमंत्री चुनाव प्रचार करते घूम रहे हैं। इजरायल से ही सीख ले लेनी चाहिए थी। अगर इजरायल के बच्चे फंसे होते तो क्या वहां के प्रधानमंत्री चुनाव में व्यस्त रहते। प्रधानमंत्री को तो पोलेंड में जाकर बैठ जाना चाहिए था और जब तक सभी नागरिक सुरक्षित नहीं निकल जाते, तब तक मोर्चा संभाले रखना चाहिए था।
पंजाब में किसान मोर्चे के सदस्यों की हुई ट्रेनिंग
टिकैत ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़ी पंजाब की जत्थेबंदी चार महीने की छुट्टी पर हैं। वे पंजाब चुनाव में ट्रेनिंग लेकर आएंगे। यह भी जरूरी होता है। राजनीतिक पार्टियों के वोट काटने का भी काम करेंगे। वहीं, गुरनाम सिंह चढ़ूूनी के चंदे का हिसाब मांगने पर उन्होंने कहा कि गांव का धन गांव में ही रहना चाहिए। चंदे का हिसाब मांग रहे हैं, उन्हें हिसाब मिल जाएगा।
राकेश टिकैत के सामने किसान नेता पर महिला ने लगाए आरोप
गांव अहरवां निवासी एक किसान नेता पर महिला ने शोषण के आरोप लगाए हैं। महिला पंचायत के बाहर पोस्टर लेकर बैठी। बाद में उसने राकेश टिकैत के सामने आरोप लगाते हुए कहा कि उक्त किसान नेता ने 10 साल से उसे पत्नी बनाकर रखा हुआ है। मगर उसे हक नहीं दे रहा है। ऐसे आदमियों को मोर्चे में कोई जगह नहीं मिलनी चाहिए। बाद में टिकैत ने किसी दूसरे सहयोगी को महिला की पूरी बात सुनने के निर्देश दिए।
फीकी रह गई महापंचायत
एक दिन पहले तक इस किसान-मजदूर महापंचायत के आयोजक किसान नेताओं ने दावा किया था कि इसमें प्रदेशभर के किसान व मजदूर शामिल होंगे। दावा था कि हजारों की संख्या में किसानों व मजदूरों की मौजूदगी होगी, लेकिन महापंचायत फीकी रह गई। अपेक्षा के मुताबिक किसान नहीं पहुंचे। मात्र 200 से 250 किसान ही आए। इनमें भी कुछ विपक्षी राजनीतिक पार्टियों से जुड़े हुए लोग शामिल रहे।
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मुक्ति अभियान चलाने की जरूरत
टिकैत ने कहा कि देश में मुक्ति अभियान चलेगा। बहुत लोग बंधनों में हैं, उनको भी मुक्त करवाना होगा। भाजपा के कई नेता भी बंधन में हैं, उनको भी मुक्त करवाएंगे। कर्मचारी वर्ग भी पीड़ित है, इस बार वह भी आंदोलन में साथ रहेगा। इसलिए बड़े आंदोलन की जरूरत है। उसकी तैयारी करनी है। छोटी-छोटी बैठकें शुरू करनी हैं।
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बीजेपी की नागपुर में है यूनिवर्सिटी
टिकैत ने कहा कि बीजेपी की नागपुर में यूनिवर्सिटी है। वहां हारे हुए प्रत्याशी को भी जीत का सर्टिफिकेट पकड़ा देते हैं। यूपी चुनाव में भी परिणाम आने से पहले ही कहा जा रहा है कि हम ही जीतेंगे। इसका मतलब है कि बीजेपी की यूनिवर्सिटी कुछ न कुछ गड़बड़ जरूर करेगी।
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यूक्रेन में बच्चे फंसे हुए, प्रधानमंत्री चुनाव प्रचार कर रहे
उन्होंने कहा कि यूक्रेन में देश के बच्चे फंसे हुए हैं। ऐसी स्थिति में प्रधानमंत्री चुनाव प्रचार करते घूम रहे हैं। इजरायल से ही सीख ले लेनी चाहिए थी। अगर इजरायल के बच्चे फंसे होते तो क्या वहां के प्रधानमंत्री चुनाव में व्यस्त रहते। प्रधानमंत्री को तो पोलेंड में जाकर बैठ जाना चाहिए था और जब तक सभी नागरिक सुरक्षित नहीं निकल जाते, तब तक मोर्चा संभाले रखना चाहिए था।
पंजाब में किसान मोर्चे के सदस्यों की हुई ट्रेनिंग
टिकैत ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़ी पंजाब की जत्थेबंदी चार महीने की छुट्टी पर हैं। वे पंजाब चुनाव में ट्रेनिंग लेकर आएंगे। यह भी जरूरी होता है। राजनीतिक पार्टियों के वोट काटने का भी काम करेंगे। वहीं, गुरनाम सिंह चढ़ूूनी के चंदे का हिसाब मांगने पर उन्होंने कहा कि गांव का धन गांव में ही रहना चाहिए। चंदे का हिसाब मांग रहे हैं, उन्हें हिसाब मिल जाएगा।
राकेश टिकैत के सामने किसान नेता पर महिला ने लगाए आरोप
गांव अहरवां निवासी एक किसान नेता पर महिला ने शोषण के आरोप लगाए हैं। महिला पंचायत के बाहर पोस्टर लेकर बैठी। बाद में उसने राकेश टिकैत के सामने आरोप लगाते हुए कहा कि उक्त किसान नेता ने 10 साल से उसे पत्नी बनाकर रखा हुआ है। मगर उसे हक नहीं दे रहा है। ऐसे आदमियों को मोर्चे में कोई जगह नहीं मिलनी चाहिए। बाद में टिकैत ने किसी दूसरे सहयोगी को महिला की पूरी बात सुनने के निर्देश दिए।
फीकी रह गई महापंचायत
एक दिन पहले तक इस किसान-मजदूर महापंचायत के आयोजक किसान नेताओं ने दावा किया था कि इसमें प्रदेशभर के किसान व मजदूर शामिल होंगे। दावा था कि हजारों की संख्या में किसानों व मजदूरों की मौजूदगी होगी, लेकिन महापंचायत फीकी रह गई। अपेक्षा के मुताबिक किसान नहीं पहुंचे। मात्र 200 से 250 किसान ही आए। इनमें भी कुछ विपक्षी राजनीतिक पार्टियों से जुड़े हुए लोग शामिल रहे।