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Fatehabad News: फसलें बर्बाद, अफसरों को सरकार के आदेश का इंतजार
Sat, 28 Dec 2024 11:18 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sat, 28 Dec 2024 11:18 PM IST
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फतेहाबाद। जिले में शुक्रवार को हुई ओलावृष्टि के निशान 24 घंटे बीतने के बाद भी खेतों में किनारों पर ओलों के ढेर के रूप में जमा रहा। ओलों से जहां रबी फसलों को खासा नुकसान पहुंचा, वहीं सब्जी की खेती और बागवानी भी प्रभावित हुई है।
खेतों में भरे बारिश के पानी को निकलवाने के लिए किसान शनिवार को कड़ी मशक्कत करते रहे। दूसरी तरफ, राजस्व और कृषि विभाग के अधिकारी प्रदेश सरकार के आदेशों के इंतजार में निरीक्षण के लिए निकले ही नहीं। शुक्रवार दोपहर बाद बारिश के साथ गिरे ओलों से जिले के 13 गांवों में फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है।
गांव धांगड़, बड़ोपल, ढांड, झलनिया, माजरा, तीसरा मील, भिरड़ाना, सालमखेड़ा, बिसला जबकि रतिया क्षेत्र के गांव सुखमनपुर, गुरुसर, सहनाल, अहरवां में ओलों से फसलों को काफी नुकसान पहुंचा। गांव सालमखेड़ा और धांगड़ में फसलों को सबसे अधिक नुकसान हुआ है। सालमखेड़ा से बीघड़ रोड पर लगते खेतों में गेहूं और सरसों की फसलों में बारिश का पानी जमा हो गया।
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सालमखेड़ा के किसानों ने कहा कि कुछ ही मिनटों में जमीन पर बर्फ की चादर बिछ गई। इससे उनकी रबी फसलों में सौ प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। किसानों के अनुसार अब तो सरकार से मिलने वाले मुआवजे से ही कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
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पूरे दिन खेतों में जमा पानी को निकालते रहे
किसानों के अनुसार ओलों ने पेड़ों पर लगे अमरूद, किनू, नींबू तक झाड़ दिए। सरसों की फसल बीच में से टूट गई जबकि हरे चारे के लिए लगाई गई बरसीम की फसल पूरी तरह से बिछ गई। गेहूं की फसल को भी काफी नुकसान पहुंचा है। किसानों के अनुसार पछेती बिजाई करके किसान इस नुकसान को कवर कर सकेंगे। आलू व मटर की फसल में भी पानी भरने से 80 फीसदी तक नुकसान हुआ है। गांव भिरड़ाना के किसान ज्योतिप्रकाश ने बताया कि ओलावृष्टि के कारण आलू की फसल पूरी तरह खराब हो गई है। खेतों में जमा हुए बारिश के पानी को निकालने में पूरा दिन लगे रहे।
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खेत में सरसों और गेहूं की फसल की बुवाई की हुई है। उसमें से सरसों की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। गेहूं की फसल को भी काफी नुकसान हुआ है। सरकार को ओलावृष्टि से हुए नुकसान की गिरदावरी करवा कर जल्द मुआवजा जारी करना चाहिए।
-लखा सिंह, किसान, गांव सालमखेड़ा
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खेत में मटर की फसल और कुछ फलों के पेड़ लगा रखे हैं। ओलावृष्टि के कारण सारी फसल खराब हो गई है। एक एकड़ में मटर की फसल में करीब बीस हजार रुपये तक खर्च आया था। फलों के पेड़ पर लगे फल झड़ गए। ओलों से रबी की फसल पूरी तरह से नष्ट हो गई है।
-रणदीप सिंह, किसान, गांव सालमखेड़ा
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इस बार दो एकड़ में सरसों की फसल की बुवाई की है। ओलावृष्टि के कारण काफी नुकसान हुआ है। गेहूं की फसल में नुकसान का अभी फिलहाल कोई अनुमान नहीं है। सरकार को ओलावृष्टि से प्रभावित क्षेत्र में स्पेशल गिरदावरी करके मुआवजा जारी करना चाहिए।
-अनमोल सिंह, किसान, गांव सालमखेड़ा
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ओलावृष्टि से हुए नुकसान का अभी अनुमान नहीं लगाया जा सकता है। प्रभावित क्षेत्र में राजस्व विभाग की ओर से टीम गठित करके गिरदावरी की जाएगी। वहीं गेहूं की फसल में नुकसान का अनुमान दो या तीन दिनों के बाद ही लगेगा।
-डॉ. राजेश सिहाग, उपनिदेशक, कृषि एवं कल्याण विभाग, फतेहाबाद।
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अभी सिर्फ ओलावृष्टि से नुकसान होने की रिपोर्ट भेजी है। प्रदेश सरकार के आगामी आदेशों का इंतजार है, उसके बाद टीमें फील्ड में भेजकर गिरदावरी करवाई जाएगी।
-श्याम लाल, जिला राजस्व अधिकारी, फतेहाबाद
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खेतों में भरे बारिश के पानी को निकलवाने के लिए किसान शनिवार को कड़ी मशक्कत करते रहे। दूसरी तरफ, राजस्व और कृषि विभाग के अधिकारी प्रदेश सरकार के आदेशों के इंतजार में निरीक्षण के लिए निकले ही नहीं। शुक्रवार दोपहर बाद बारिश के साथ गिरे ओलों से जिले के 13 गांवों में फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है।
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गांव धांगड़, बड़ोपल, ढांड, झलनिया, माजरा, तीसरा मील, भिरड़ाना, सालमखेड़ा, बिसला जबकि रतिया क्षेत्र के गांव सुखमनपुर, गुरुसर, सहनाल, अहरवां में ओलों से फसलों को काफी नुकसान पहुंचा। गांव सालमखेड़ा और धांगड़ में फसलों को सबसे अधिक नुकसान हुआ है। सालमखेड़ा से बीघड़ रोड पर लगते खेतों में गेहूं और सरसों की फसलों में बारिश का पानी जमा हो गया।
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सालमखेड़ा के किसानों ने कहा कि कुछ ही मिनटों में जमीन पर बर्फ की चादर बिछ गई। इससे उनकी रबी फसलों में सौ प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। किसानों के अनुसार अब तो सरकार से मिलने वाले मुआवजे से ही कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
पूरे दिन खेतों में जमा पानी को निकालते रहे
किसानों के अनुसार ओलों ने पेड़ों पर लगे अमरूद, किनू, नींबू तक झाड़ दिए। सरसों की फसल बीच में से टूट गई जबकि हरे चारे के लिए लगाई गई बरसीम की फसल पूरी तरह से बिछ गई। गेहूं की फसल को भी काफी नुकसान पहुंचा है। किसानों के अनुसार पछेती बिजाई करके किसान इस नुकसान को कवर कर सकेंगे। आलू व मटर की फसल में भी पानी भरने से 80 फीसदी तक नुकसान हुआ है। गांव भिरड़ाना के किसान ज्योतिप्रकाश ने बताया कि ओलावृष्टि के कारण आलू की फसल पूरी तरह खराब हो गई है। खेतों में जमा हुए बारिश के पानी को निकालने में पूरा दिन लगे रहे।
खेत में सरसों और गेहूं की फसल की बुवाई की हुई है। उसमें से सरसों की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। गेहूं की फसल को भी काफी नुकसान हुआ है। सरकार को ओलावृष्टि से हुए नुकसान की गिरदावरी करवा कर जल्द मुआवजा जारी करना चाहिए।
-लखा सिंह, किसान, गांव सालमखेड़ा
खेत में मटर की फसल और कुछ फलों के पेड़ लगा रखे हैं। ओलावृष्टि के कारण सारी फसल खराब हो गई है। एक एकड़ में मटर की फसल में करीब बीस हजार रुपये तक खर्च आया था। फलों के पेड़ पर लगे फल झड़ गए। ओलों से रबी की फसल पूरी तरह से नष्ट हो गई है।
-रणदीप सिंह, किसान, गांव सालमखेड़ा
इस बार दो एकड़ में सरसों की फसल की बुवाई की है। ओलावृष्टि के कारण काफी नुकसान हुआ है। गेहूं की फसल में नुकसान का अभी फिलहाल कोई अनुमान नहीं है। सरकार को ओलावृष्टि से प्रभावित क्षेत्र में स्पेशल गिरदावरी करके मुआवजा जारी करना चाहिए।
-अनमोल सिंह, किसान, गांव सालमखेड़ा
ओलावृष्टि से हुए नुकसान का अभी अनुमान नहीं लगाया जा सकता है। प्रभावित क्षेत्र में राजस्व विभाग की ओर से टीम गठित करके गिरदावरी की जाएगी। वहीं गेहूं की फसल में नुकसान का अनुमान दो या तीन दिनों के बाद ही लगेगा।
-डॉ. राजेश सिहाग, उपनिदेशक, कृषि एवं कल्याण विभाग, फतेहाबाद।
अभी सिर्फ ओलावृष्टि से नुकसान होने की रिपोर्ट भेजी है। प्रदेश सरकार के आगामी आदेशों का इंतजार है, उसके बाद टीमें फील्ड में भेजकर गिरदावरी करवाई जाएगी।
-श्याम लाल, जिला राजस्व अधिकारी, फतेहाबाद