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Fatehabad News: डॉ. मंडेर के लघुकथा संग्रह दिलों की सांझ का हुआ भव्य लोकार्पण
Sun, 01 Feb 2026 12:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sun, 01 Feb 2026 12:03 AM IST
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लघुकथा संग्रह दिलों की सांझ का लोकार्पण करते हुए साहित्यकार व गणमान्य लोग।
रतिया। साहित्य अकादमी द्वारा सम्मानित साहित्यकार डॉ. नैब सिंह मंडेर के लघुकथा संग्रह दिलों की सांझ का लोकार्पण और गोष्ठी का आयोजन लोक चेतना मंच हरियाणा के तत्वावधान में लायंस क्लब रतिया सिटी में किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में प्रसिद्ध साहित्यकार और आलोचक निरंजन बोहा तथा जगजतिंद्र सिंह शामिल हुए, जबकि उपन्यासकार अजीज सरोए, शायर दिलबाग रियोंद, तेजिंद्र सिंह औजला, गोपाल चंद कुलरियां और शायर गुलाब सिंह विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे।
सभा के महासचिव कृष्ण सिंह चित्रकार ने मुख्य वक्ता सहित विद्वानों से पुस्तक ‘दिलों की सांझ’ का लोकापर्ण करवाया। आलोचक निरंजन बोहा ने कहा कि डॉ. मंडेर के लघुकथा संग्रह में समाज का दिल धड़कता है। उन्होंने बताया कि डॉ. नैब सिंह मंडेर पंजाबी लघुकथा के पहले पी.एच.डी. रिसर्च स्कॉलर हैं, इसलिए साहित्य आलोचना के क्षेत्र में उनका नाम और कार्य उल्लेखनीय है।
प्रवक्ता जगजतिंद्र सिंह ने कहा कि इस पुस्तक में दर्ज लघुकथाएं सिर्फ लोगों की वेदनाओं का दर्द ही नहीं व्यक्त करतीं, बल्कि अच्छे समाज की सृजना के लिए प्रेरित भी करती हैं। शायर दिलबाग सिंह ने कहा कि डॉ. मंडेर मौलिक साहित्य सृजन के साथ-साथ हिंदी और पंजाबी पुस्तकों की समालोचना में भी अग्रणी भूमिका निभाते हैं। क्लब के प्रधान हरवीर सिंह जोड़ा, संस्थापक तेजिंद्र सिंह औजला, चेयरमैन प्रदीप बांसल, गुलाब सिंह, मंजीत सिंह और अवतार शर्मा ने पुस्तक में शामिल लघुकथाओं पर अपनी टिप्पणियां प्रस्तुत कीं। इस अवसर पर सुरजीत सिंह शिमलापुरी, कृष्ण चित्रकार, निर्भय सिंह, राजू अरोड़ा, नाटककार गुरमेल सिंह ग्रोहा सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार और विद्वान मौजूद थे।
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सभा के महासचिव कृष्ण सिंह चित्रकार ने मुख्य वक्ता सहित विद्वानों से पुस्तक ‘दिलों की सांझ’ का लोकापर्ण करवाया। आलोचक निरंजन बोहा ने कहा कि डॉ. मंडेर के लघुकथा संग्रह में समाज का दिल धड़कता है। उन्होंने बताया कि डॉ. नैब सिंह मंडेर पंजाबी लघुकथा के पहले पी.एच.डी. रिसर्च स्कॉलर हैं, इसलिए साहित्य आलोचना के क्षेत्र में उनका नाम और कार्य उल्लेखनीय है।
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प्रवक्ता जगजतिंद्र सिंह ने कहा कि इस पुस्तक में दर्ज लघुकथाएं सिर्फ लोगों की वेदनाओं का दर्द ही नहीं व्यक्त करतीं, बल्कि अच्छे समाज की सृजना के लिए प्रेरित भी करती हैं। शायर दिलबाग सिंह ने कहा कि डॉ. मंडेर मौलिक साहित्य सृजन के साथ-साथ हिंदी और पंजाबी पुस्तकों की समालोचना में भी अग्रणी भूमिका निभाते हैं। क्लब के प्रधान हरवीर सिंह जोड़ा, संस्थापक तेजिंद्र सिंह औजला, चेयरमैन प्रदीप बांसल, गुलाब सिंह, मंजीत सिंह और अवतार शर्मा ने पुस्तक में शामिल लघुकथाओं पर अपनी टिप्पणियां प्रस्तुत कीं। इस अवसर पर सुरजीत सिंह शिमलापुरी, कृष्ण चित्रकार, निर्भय सिंह, राजू अरोड़ा, नाटककार गुरमेल सिंह ग्रोहा सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार और विद्वान मौजूद थे।
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