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पुलिस से ज्यादा हाईटेक हुए अपराधी, हर दिन नया एप बढ़ा रहा चुनौती
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फतेहाबाद। साइबर अपराध की दुनिया में अपराधी पुलिस से आगे हैं। ये बात खुद पुलिस से जुड़े साइबर एक्सपर्ट भी मानते हैं। एक्सपर्ट के अनुसार पुलिस हर रोज एक ऐसे नए एप या साइबर प्लेटफार्म की चुनौती का सामना करती है, जिसके बारे में उसे किसी अपराधी की तलाश करते हुए पता चल पाता है। इसका नतीजा यह है कि साइबर अपराध के नए तरीके ईजाद होने से पहले ही पुराने हो जाते हैं।
साइबर एक्सपर्ट के अनुसार अपराध करने के लिए या अपराध के बाद अपने बचाव में अपराधी द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले तरह-तरह के साइबर प्लेटफार्म पर पुलिस सख्ती से काम करती है। मगर फिर भी साइबर अपराध पर लगाम नहीं लग पा रही है। सबसे अधिक समस्या पुलिस को इन नई-नई एप के एडमिन या संबंधित कंपनी के साथ कम्युनिकेशन करने में आती है। किसी भी तरह की डिटेल मांगे जाने पर तुरंत जवाब मिलने की बजाय 4 से 5 दिनों के बाद जवाब मिलता है और तब तक अपराधी दूसरे प्लेटफार्म के इस्तेमाल तक पहुंच जाता है। ऐसे में पुलिस को अपना पूरा प्रोसेस दोबारा शुरू करना पड़ता है और फिर वही स्थिति पुलिस के सामने आकर खड़ी हो जाती है। संवाद
दूसरी बड़ी चुनौती, लोगों में जागरूकता की कमी
साइबर सेल से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराध और उससे निपटने की दूसरी सबसे बड़ी चुनौती, लोगों में जागरूकता की कमी है। जागरूकता की कमी के कारण इंटरनेट की दुनिया में इस्तेमाल होने वाले किसी भी प्लेटफार्म की पूरी जानकारी के बगैर लोग तरह-तरह के एप या प्लेटफार्म का प्रयोग करते हैं। ये उतना ही खतरनाक साबित होते हैं, जितना किसी भी अनट्रेंड चालक के हाथ में गाड़ी को सौंप देना, जिसकी वजह से निश्चित ही दुर्घटना होती है। इसलिए साइबर सेल से जुड़े अधिकारी कहते हैं कि किसी भी एप के बारे में जरूरी जानकारी के अलावा पर्सनल जानकारी नहीं डालें और इस्तेमाल की जाने वाले एप या संबंधित सोशल प्लेटफार्म के बारे में पहले उसके ऑपरेट के बारे में पूरी जानकारी जुटा लें। इसके बाद ही उसका इस्तेमाल शुरू किया जाए।
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फतेहाबाद में 20 से अधिक सेमिनार किए
साइबर अपराध को रोकने का सबसे बड़ा हथियार जागरूकता है। जिला फतेहाबाद में पुलिस जागरूकता अभियान के तहत अब तक करीब 20 से अधिक सेमिनार अलग-अलग आयोजित कर चुकी है। इन जागरूकता सेमीनार में पुलिस ने स्कूलों में बच्चों, शिक्षाविदों को जागरूक करते हुए उन्हें साइबर अपराध से बचाव के लिए महत्वपूर्ण जानकारियों से अवगत करवाया। खुद एसपी से लेकर सभी डीएसपी और एसएचओ को अपने-अपने क्षेत्र में जागरूकता सेमीनार लगाने के निर्देश हैं। कुछ समय से कोरोना पाबंदियों की वजह से जागरूकता अभियान रोका गया था और इसे अब दोबारा शुरू किया जाएगा।
ऑनलाइन धोखाधड़ी रोकने के लिए हेल्पलाइन नंबर 1930 करना होगा डायल
ऑनलाइन धोखाधड़ी से जुड़े साइबर अपराध होने की स्थिति में अब पीड़ित को 155260 नंबर की जगह नया हेल्पलाइन नंबर 1930 डायल करना होगा। गृह मंत्रालय ने नया साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। हेल्पलाइन नंबर 1930 पर 24 घंटे के भीतर किसी भी शिकायतकर्ता द्वारा सूचना देने पर पुलिस तुरंत बैंक व ई-वालेट सेवा प्रदाता कंपनी को धोखाधड़ी की सूचना देती है। ये जानकारी उनके ईमेल व फोन दोनों पर पहुंचती है। पुलिस के अनुरोध पर बैंक या ई-वालेट सेवा प्रदाता कंपनी द्वारा इसे रोक दिया जाता है। यह रकम बाद में शिकायतकर्ता को मिल जाती है।
साइबर अपराध के 10 मामले विचाराधीन
पिछले एक वर्ष में ऑनलाइन फ्रॉड या दूसरी श्रेणी के साइबर अपराध के 10 मामले पुलिस की साइबर सेल के पास विचाराधीन हैं। पुलिस का साइबर सेल लगातार इन मामलों में विभिन्न प्रक्रियाओं के तहत अपनी कार्रवाई करके जांच आगे बढ़ा रहा है।
कोट
साइबर अपराध आज के समय में पुलिस के सामने बड़ी चुनौती है। इससे निपटने के लिए पुलिस हर दिन नए रूप में नई तकनीक के साथ अपडेट होती है। किस तरह का अपराध हुआ और उसको सुलझाने के लिए अपडेट वर्जन के साथ कौन सी तकनीक या तरीका इस्तेमाल किया जाए, ये सब मौके पर जरूरत के अनुसार ही तय होता है। साइबर अपराध से बचने के लिए जागरूकता और सावधानी जरूरी है। लोग जागरूक होकर सावधानी बरतें।
डॉ. कविता, डीएसपी, फतेहाबाद
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साइबर एक्सपर्ट के अनुसार अपराध करने के लिए या अपराध के बाद अपने बचाव में अपराधी द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले तरह-तरह के साइबर प्लेटफार्म पर पुलिस सख्ती से काम करती है। मगर फिर भी साइबर अपराध पर लगाम नहीं लग पा रही है। सबसे अधिक समस्या पुलिस को इन नई-नई एप के एडमिन या संबंधित कंपनी के साथ कम्युनिकेशन करने में आती है। किसी भी तरह की डिटेल मांगे जाने पर तुरंत जवाब मिलने की बजाय 4 से 5 दिनों के बाद जवाब मिलता है और तब तक अपराधी दूसरे प्लेटफार्म के इस्तेमाल तक पहुंच जाता है। ऐसे में पुलिस को अपना पूरा प्रोसेस दोबारा शुरू करना पड़ता है और फिर वही स्थिति पुलिस के सामने आकर खड़ी हो जाती है। संवाद
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दूसरी बड़ी चुनौती, लोगों में जागरूकता की कमी
साइबर सेल से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराध और उससे निपटने की दूसरी सबसे बड़ी चुनौती, लोगों में जागरूकता की कमी है। जागरूकता की कमी के कारण इंटरनेट की दुनिया में इस्तेमाल होने वाले किसी भी प्लेटफार्म की पूरी जानकारी के बगैर लोग तरह-तरह के एप या प्लेटफार्म का प्रयोग करते हैं। ये उतना ही खतरनाक साबित होते हैं, जितना किसी भी अनट्रेंड चालक के हाथ में गाड़ी को सौंप देना, जिसकी वजह से निश्चित ही दुर्घटना होती है। इसलिए साइबर सेल से जुड़े अधिकारी कहते हैं कि किसी भी एप के बारे में जरूरी जानकारी के अलावा पर्सनल जानकारी नहीं डालें और इस्तेमाल की जाने वाले एप या संबंधित सोशल प्लेटफार्म के बारे में पहले उसके ऑपरेट के बारे में पूरी जानकारी जुटा लें। इसके बाद ही उसका इस्तेमाल शुरू किया जाए।
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फतेहाबाद में 20 से अधिक सेमिनार किए
साइबर अपराध को रोकने का सबसे बड़ा हथियार जागरूकता है। जिला फतेहाबाद में पुलिस जागरूकता अभियान के तहत अब तक करीब 20 से अधिक सेमिनार अलग-अलग आयोजित कर चुकी है। इन जागरूकता सेमीनार में पुलिस ने स्कूलों में बच्चों, शिक्षाविदों को जागरूक करते हुए उन्हें साइबर अपराध से बचाव के लिए महत्वपूर्ण जानकारियों से अवगत करवाया। खुद एसपी से लेकर सभी डीएसपी और एसएचओ को अपने-अपने क्षेत्र में जागरूकता सेमीनार लगाने के निर्देश हैं। कुछ समय से कोरोना पाबंदियों की वजह से जागरूकता अभियान रोका गया था और इसे अब दोबारा शुरू किया जाएगा।
ऑनलाइन धोखाधड़ी रोकने के लिए हेल्पलाइन नंबर 1930 करना होगा डायल
ऑनलाइन धोखाधड़ी से जुड़े साइबर अपराध होने की स्थिति में अब पीड़ित को 155260 नंबर की जगह नया हेल्पलाइन नंबर 1930 डायल करना होगा। गृह मंत्रालय ने नया साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। हेल्पलाइन नंबर 1930 पर 24 घंटे के भीतर किसी भी शिकायतकर्ता द्वारा सूचना देने पर पुलिस तुरंत बैंक व ई-वालेट सेवा प्रदाता कंपनी को धोखाधड़ी की सूचना देती है। ये जानकारी उनके ईमेल व फोन दोनों पर पहुंचती है। पुलिस के अनुरोध पर बैंक या ई-वालेट सेवा प्रदाता कंपनी द्वारा इसे रोक दिया जाता है। यह रकम बाद में शिकायतकर्ता को मिल जाती है।
साइबर अपराध के 10 मामले विचाराधीन
पिछले एक वर्ष में ऑनलाइन फ्रॉड या दूसरी श्रेणी के साइबर अपराध के 10 मामले पुलिस की साइबर सेल के पास विचाराधीन हैं। पुलिस का साइबर सेल लगातार इन मामलों में विभिन्न प्रक्रियाओं के तहत अपनी कार्रवाई करके जांच आगे बढ़ा रहा है।
कोट
साइबर अपराध आज के समय में पुलिस के सामने बड़ी चुनौती है। इससे निपटने के लिए पुलिस हर दिन नए रूप में नई तकनीक के साथ अपडेट होती है। किस तरह का अपराध हुआ और उसको सुलझाने के लिए अपडेट वर्जन के साथ कौन सी तकनीक या तरीका इस्तेमाल किया जाए, ये सब मौके पर जरूरत के अनुसार ही तय होता है। साइबर अपराध से बचने के लिए जागरूकता और सावधानी जरूरी है। लोग जागरूक होकर सावधानी बरतें।
डॉ. कविता, डीएसपी, फतेहाबाद