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Fatehabad News: किसानों से पराली न जलाने की अपील
Wed, 26 Aug 2026 11:42 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Wed, 26 Aug 2026 11:42 PM IST
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फतेहाबाद। फसल अवशेष प्रबंधन, टिकाऊ कृषि पद्धतियों और आजीविका संवर्धन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गांव भोडिया खेड़ा में ब्लॉक स्तरीय किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। एफडीआई द्वारा प्रोजेक्ट समृद्धि के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में किसानों को पराली प्रबंधन, सरकारी योजनाओं, कृषि मशीनरी और आधुनिक खेती के तरीकों की जानकारी दी गई। इस मौके पर किसानों ने पराली न जलाने की शपथ लेकर अन्य किसानों को भी जागरूक करने का संकल्प लिया।
इसमें खंड कृषि अधिकारी डॉ. जय कुमार भोरिया ने फसल अवशेष प्रबंधन पर जानकारी देते हुए सीआरएम सब्सिडी तथा इन-सीटू एवं एक्स-सीटू प्रबंधन की विभिन्न विधियों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि पराली जलाने से भूमि की उर्वरता और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। किसानों को पराली न जलाकर उपलब्ध कृषि मशीनरी, तकनीकों और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाते हुए फसल अवशेषों का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करना चाहिए।
कार्यक्रम में फाउंडेशन फॉर डेवलपमेंट इनिशिएटिव्स के दुर्गेश शर्मा ने किसानों को फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन तथा उनके विभिन्न उपयोगों के बारे में बताया। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को दिए जा रहे निःशुल्क प्रशिक्षण के बारे में भी जानकारी दी।
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उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाओं को कौशल प्रदान कर उन्हें रोजगार एवं आजीविका के अवसरों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। एसडीएओ डॉ संजय मेचू ने किसानों को एग्रीस्टैक आईडी के महत्व और डिजिटल कृषि सेवाओं व सरकारी योजनाओं में इसकी उपयोगिता के बारे में बताया और एफडीआई संस्था का ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन कराने के लिए धन्यवाद किया।
प्रोजेक्ट समृद्धि के माध्यम से जिले के 45 गांवों में फसल अवशेष प्रबंधन, टिकाऊ कृषि पद्धतियों और आजीविका संवर्धन के लिए कार्य किया जा रहा है। गोष्ठी में डॉ. कुलवंत बाजिया, इफको के रीजनल मैनेजर डॉ. प्रवीण कुमार, जितेंद्र वर्मा आदि मौजूद थे।
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इसमें खंड कृषि अधिकारी डॉ. जय कुमार भोरिया ने फसल अवशेष प्रबंधन पर जानकारी देते हुए सीआरएम सब्सिडी तथा इन-सीटू एवं एक्स-सीटू प्रबंधन की विभिन्न विधियों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि पराली जलाने से भूमि की उर्वरता और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। किसानों को पराली न जलाकर उपलब्ध कृषि मशीनरी, तकनीकों और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाते हुए फसल अवशेषों का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करना चाहिए।
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कार्यक्रम में फाउंडेशन फॉर डेवलपमेंट इनिशिएटिव्स के दुर्गेश शर्मा ने किसानों को फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन तथा उनके विभिन्न उपयोगों के बारे में बताया। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को दिए जा रहे निःशुल्क प्रशिक्षण के बारे में भी जानकारी दी।
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उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाओं को कौशल प्रदान कर उन्हें रोजगार एवं आजीविका के अवसरों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। एसडीएओ डॉ संजय मेचू ने किसानों को एग्रीस्टैक आईडी के महत्व और डिजिटल कृषि सेवाओं व सरकारी योजनाओं में इसकी उपयोगिता के बारे में बताया और एफडीआई संस्था का ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन कराने के लिए धन्यवाद किया।
प्रोजेक्ट समृद्धि के माध्यम से जिले के 45 गांवों में फसल अवशेष प्रबंधन, टिकाऊ कृषि पद्धतियों और आजीविका संवर्धन के लिए कार्य किया जा रहा है। गोष्ठी में डॉ. कुलवंत बाजिया, इफको के रीजनल मैनेजर डॉ. प्रवीण कुमार, जितेंद्र वर्मा आदि मौजूद थे।