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साहस: 73 बेटियों का बाल विवाह रुकवाकर उन्हें पढ़ने के लिए रास्ता दिखा चुकीं अंजू

Tue, 08 Mar 2022 07:38 PM IST
भूपेंद्र सिंह कपिल शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद (हरियाणा)
कपिल शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Tue, 08 Mar 2022 07:38 PM IST
सार

अंजू ने पांच साल पहले बुलंद उड़ान संस्था बनाई और अब देशभर में जागरूकता बढ़ा रही है। अपने ने ही गलत हरकत की कोशिश की तो अंजू बेटियों की हमदर्द बन गईं।

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Anju making girls aware by stopping child marriage in Fatehabad of Haryana
पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह अंजू वर्मा को सम्मानित करते हुए। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

जिस उम्र में बेटियां किसी चीज को ठीक से समझ भी नहीं पाती हैं, उस उम्र में अगर कोई अपना ही गलत हरकत की कोशिश करे तो क्या हालात रहे होंगे, सुनकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। हरियाणा के फतेहाबाद जिले के गांव दौलतपुर निवासी अंजू वर्मा ने तो पांचवीं कक्षा की छात्रा रहते यह झेला है। इसी हरकत ने अंजू को दूसरी बेटियों का हौसला बढ़ाने का साहस दिया। अब स्थिति ऐसी है कि एक हजार से अधिक बेटियों को अंजू सशक्त बना चुकी हैं। 73 बेटियों का बाल विवाह रुकवाकर उन्हें पढ़ने के लिए रास्ता दिखा चुकी हैं।

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अंजू बताती हैं कि जब वह पांचवीं कक्षा में पढ़ रही थी तो गर्मी की छुट्टियों में अपने पिता की रिश्तेदार के साथ उनके घर चली गई थी। वहां उस रिश्तेदार के बेटे ने उससे गलत हरकत की कोशिश की। इस घटना ने उसके जीवन में बड़ा बदलाव लाया। इसके बाद अंजू ने हर मोर्चे पर बेटियों का बाल विवाह रुकवाने, उनके होने वाली छेड़छाड़ की घटनाओं को रोकने के लिए प्रयास किए।
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साल 2017 में बनाई बुलंद उड़ान संस्था
19 वर्षीय अंजू वर्मा ने साल 2017 में बुलंद उड़ान संस्था बनाई। इस संस्था के जरिये वह कम उम्र में ही पढ़ाई छोड़ने वाली बेटियों, स्कूल नहीं जाने वाले बच्चों की मदद करती हैं। ऐसी बेटियों व बच्चों की जानकारी लेकर उनका स्कूलों में दाखिला सुनिश्चित करवाती हैं। बेटियों को खुलकर जीने की हिम्मत बढ़ाती हैं। उन्हें आत्मरक्षा से लेकर स्वरोजगार के लिए प्रेरित करती हैं। अंजू स्कूल छोड़ देने वाली एक हजार से अधिक बेटियों को दोबारा से स्कूल में दाखिल दिलवाने में सफल हुई हैं।
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जान से मारने की धमकी भी मिली
अंजू बताती हैं कि वह किसी भी महिला के साथ गलत होते नहीं देख सकती। एक बच्ची के साथ दुष्कर्म हुआ। दुष्कर्मी के खिलाफ आवाज उठाई तो दुष्कर्मी के दोस्तों की तरफ से जान से मारने की धमकी तक दी गई। मगर उसका हौसला नहीं टूटा। अंजू कहती हैं कि उसके माता-पिता ने हर कदम पर उसका साथ दिया। उसके पिता राजेंद्र कुमार उसकी हिम्मत बढ़ाते हैं। वहीं, संस्था की सह संस्थापक दिव्या बराड़, रमेश गोरा, दीनबंधु प्रजापति भी उनकी मुहिम में योगदान देते हैं।
 
15 अवॉर्ड मिले, स्मृति ईरानी व डॉ. मनमोहन सिंह कर चुके हैं सम्मानित
अंजू को अब तक नारी सशक्तीकरण के लिए 15 अवॉर्ड मिल चुके हैं। वह हरियाणा के साथ-साथ पुणे, बेंगलुरु, दिल्ली, पटना जैसे बड़े शहरों में जाकर भी मोटिवेशन सेमिनार में अपनी प्रजेंटेशन देती हैं। उन्हें साल 2019 में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के हाथों दिल्ली में अवॉर्ड मिला तो केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, पूर्व एचआरडी मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल भी सम्मानित कर चुके हैं। हाल ही में केरल में डॉ. एपीजे अबुल कलाम आजाद अवॉर्ड मिला।

 
जो दहेज लेगा या देगा, उस शादी में नहीं जाएंगे
अंजू बताती हैं कि इस बार 8 मार्च को महिला दिवस पर फतेहाबाद में उनकी संस्था कार्यक्रम का आयोजन करेगी। जहां दहेज लेने या देने वालों की शादी में नहीं जाने का संकल्प लिया जाएगा। बेशक वह शादी अपने ही परिवार या रिश्तेदारी में क्यों न हों।

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