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छुट्टी के दिन भी धरने पर ंटी रही आंगनवाड़ी वर्कर्स
Updated Sun, 25 Feb 2018 11:48 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद।
अपनी मांगें मनवाने के लिए रविवार को छुट्टी के दिन भी सैकड़ों आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स उपायुक्त कार्यालय पर 7वें दिन हड़ताल करके धरने पर डटी रही। धरने की अध्यक्षता दमयन्ति व सीता देवी ने संयुक्त रूप से की व संचालन माया पूनियां ने किया।
धरने को सीटू के जिला सचिव ओमप्रकाश अनेता, दमयन्ति देवी, सीता, माया पूनियां, अनीता देवी, किरण बाला, पिंकी देवी, रमेश रानी शर्मा ने संबोधित करते हुए कहा कि सरकार वर्कर्स के धैर्य की परीक्षा न लें क्योंकि औरतें कभी बेटी का तो कभी मां का फर्ज अदा करती हैं और दोनों परिवारों को स्वर्ग बनाती हैं लेकिन यदि सरकार ने जल्दी ही उनकी मांगें पूरी नहीं की तो यही औरतें काली का रूप धारण करते देर नहीं लगाएंगी।
उन्होंने कहा कि वे कोई भीख नहीं मांग रही, काम के पूरे दाम मांगती है इसलिए सभी वर्करों, हेल्परों को पक्का कर्मचारी घोषित किया जाए व तब तक उन्हें 18 हजार रुपये न्यूनतम वेतन दिया जाए। उन्होंने कहा कि वर्कर्स व हेल्पर्स के मानदेय में मामूली बढ़ोतरी 640 रुपये व हैल्पर्स के केवल 70 रुपये की बढ़ोतरी ने साफ कर दिया है कि सरकार का बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा केवल महिलाओं के साथ मजाक है और न केवल मजाक है बल्कि धोखा है। महिलाओं के शोषण के खिलाफ और न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये देने, कर्मचारी का दर्जा देने सहित अनेक मांगों को लेकर शुरू की गई हड़ताल मान-सम्मान की लड़ाई भी है। उन्होंने मांग की कि सरकार उनके मानदेय में बढ़ोतरी कर इसे न्यूनतम वेतन करें जो 18 हजार रूपये प्रतिमाह से कम न हो, आंगनबाड़ी कर्मियों को रिटायरमेंट पर तमाम लाभों सहित पैंशन दी जाए, गर्मी-सर्दी की छुट्टियां प्रदान की जाए, आंगनबाड़ी केन्द्रों पर निरतंर राशन पूरे तौल के साथ आए। धरने में दर्शना देवी, राजबाला, गीता देवी, कृष्णा, इंद्रा देवी, मंजूला, सुनीला भठेजा, कलावती, सरोज देवी, सुमित्रा सहित आदि मौजूद रही।
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फतेहाबाद।
अपनी मांगें मनवाने के लिए रविवार को छुट्टी के दिन भी सैकड़ों आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स उपायुक्त कार्यालय पर 7वें दिन हड़ताल करके धरने पर डटी रही। धरने की अध्यक्षता दमयन्ति व सीता देवी ने संयुक्त रूप से की व संचालन माया पूनियां ने किया।
धरने को सीटू के जिला सचिव ओमप्रकाश अनेता, दमयन्ति देवी, सीता, माया पूनियां, अनीता देवी, किरण बाला, पिंकी देवी, रमेश रानी शर्मा ने संबोधित करते हुए कहा कि सरकार वर्कर्स के धैर्य की परीक्षा न लें क्योंकि औरतें कभी बेटी का तो कभी मां का फर्ज अदा करती हैं और दोनों परिवारों को स्वर्ग बनाती हैं लेकिन यदि सरकार ने जल्दी ही उनकी मांगें पूरी नहीं की तो यही औरतें काली का रूप धारण करते देर नहीं लगाएंगी।
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उन्होंने कहा कि वे कोई भीख नहीं मांग रही, काम के पूरे दाम मांगती है इसलिए सभी वर्करों, हेल्परों को पक्का कर्मचारी घोषित किया जाए व तब तक उन्हें 18 हजार रुपये न्यूनतम वेतन दिया जाए। उन्होंने कहा कि वर्कर्स व हेल्पर्स के मानदेय में मामूली बढ़ोतरी 640 रुपये व हैल्पर्स के केवल 70 रुपये की बढ़ोतरी ने साफ कर दिया है कि सरकार का बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा केवल महिलाओं के साथ मजाक है और न केवल मजाक है बल्कि धोखा है। महिलाओं के शोषण के खिलाफ और न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये देने, कर्मचारी का दर्जा देने सहित अनेक मांगों को लेकर शुरू की गई हड़ताल मान-सम्मान की लड़ाई भी है। उन्होंने मांग की कि सरकार उनके मानदेय में बढ़ोतरी कर इसे न्यूनतम वेतन करें जो 18 हजार रूपये प्रतिमाह से कम न हो, आंगनबाड़ी कर्मियों को रिटायरमेंट पर तमाम लाभों सहित पैंशन दी जाए, गर्मी-सर्दी की छुट्टियां प्रदान की जाए, आंगनबाड़ी केन्द्रों पर निरतंर राशन पूरे तौल के साथ आए। धरने में दर्शना देवी, राजबाला, गीता देवी, कृष्णा, इंद्रा देवी, मंजूला, सुनीला भठेजा, कलावती, सरोज देवी, सुमित्रा सहित आदि मौजूद रही।
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